दिल्ली-एनसीआर में प्लेसमेंट एजेंसियों के वेरिफिकेशन सिस्टम पर चिंता

News Desk
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पश्चिमी दिल्ली। दिल्ली-एनसीआर में घरेलू सहायिका, कुक, बेबीसिटर और केयरटेकर उपलब्ध कराने वाले आनलाइन ऐप और प्लेसमेंट एजेंसियों की संख्या तेजी से बढ़ी है।

कुछ ही मिनटों में मोबाइल ऐप के जरिए घर के लिए सहायिका बुक करने का दावा किया जाता है, लेकिन इन सेवाओं की सबसे अहम कड़ी घरेलू सहायिकाओं के सत्यापन को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं।

कुछ स्थापित और संगठित कंपनियों को छोड़ दें तो दिल्ली में काम कर रही बड़ी संख्या में प्लेसमेंट एजेंसियां घरेलू सहायिकाओं का सत्यापन केवल आधार कार्ड, वोटर आईडी या अन्य पहचान पत्र की प्रति लेने तक सीमित रखती हैं।

कई मामलों में यह जांच भी नहीं की जाती कि जमा कराया गया दस्तावेज वास्तविक है या नहीं, उसका पता सही है या नहीं अथवा उस व्यक्ति का आपराधिक रिकॉर्ड है या नहीं। कई एजेंसियां पुलिस सत्यापन भी नहीं करातीं और सीधे ग्राहक के घर कर्मचारी भेज देती हैं।

हाल के वर्षों में घरेलू सहायकों से जुड़े अपराधों के बाद पुलिस लगातार नागरिकों से घरेलू सहायकों का पुलिस सत्यापन कराने की अपील करती रही है। विभिन्न राज्यों की पुलिस और निजी बैकग्राउंड वेरिफिकेशन सेवाएं भी स्पष्ट करती हैं कि केवल आधार या पहचान पत्र की प्रति लेना पर्याप्त नहीं है।

सुरक्षित नियुक्ति के लिए पहचान, पता, पूर्व नियोक्ता, आपराधिक रिकॉर्ड और पुलिस सत्यापन जैसे कई स्तरों की जांच आवश्यक मानी जाती है। पुलिस अधिकारी का कहना है कि असंगठित प्लेसमेंट एजेंसियों के बढ़ने से जवाबदेही का संकट भी पैदा हुआ है।

यदि किसी घरेलू सहायिका का रिकॉर्ड सत्यापित नहीं किया गया हो तो किसी अप्रिय घटना की स्थिति में जांच एजेंसियों के सामने भी कठिनाई खड़ी हो सकती है। इसके लिए पहले से वेरिफिकेशन के मानक निर्धारित भी हैं।

क्या है वेरिफिकेशन मानक?

  • सरकारी पहचान पत्र की प्रामाणिकता की जांच।
  • स्थायी और वर्तमान पते का सत्यापन।
  • पूर्व नियोक्ता से रेफरेंस चेक।
  • पुलिस सत्यापन।
  • मोबाइल नंबर और अन्य विवरण का मिलान।
  • जरूरत पड़ने पर फील्ड वेरिफिकेशन।

केवल दस्तावेज लेना पर्याप्त नहीं

पुलिस अधिकारी का कहना है कि आधार या वोटर आईडी की फोटो कापी लेना केवल पहचान जुटाने का पहला चरण है। इससे यह स्वतः साबित नहीं होता कि दस्तावेज असली है, व्यक्ति उसी पते पर रहता है या उसका कोई आपराधिक इतिहास नहीं है।

इसी कारण पुलिस और पेशेवर बैकग्राउंड वेरिफिकेशन एजेंसियां बहु-स्तरीय जांच की सलाह देती हैं। उपायुक्त द्वारका कुशल पाल सिंह के अनुसार यदि किसी एजेंसी का दावा है कि वह वेरिफाइड घरेलू सहायिका उपलब्ध कराती है, तो उपभोक्ता को यह जरूर पूछना चाहिए कि सत्यापन में केवल पहचान पत्र लिया गया है या पुलिस सत्यापन, पता सत्यापन और रेफरेंस चेक भी कराया गया है।

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