नई दिल्ली: सत्य निकेतन में इमारत गिरने की घटना के बाद दिल्ली नगर निगम (एमसीडी) ने राजधानी में खतरनाक इमारतों और अनधिकृत निर्माण के खिलाफ प्रवर्तन अभियान तेज कर दिया है. रविवार को निगम के सभी 12 जोन में चलाए गए सघन अभियान के दौरान 11 संपत्तियों पर तोड़फोड़ की कार्रवाई की गई, जबकि चार संपत्तियों को सील कर दिया गया. निगम की कार्रवाई में दिल्ली मास्टर प्लान और भवन उप-नियमों के उल्लंघन को प्रमुख आधार बनाया गया है.
एमसीडी के मुताबिक, रविवार को दक्षिण-पश्चिम जोन के बिजवासन, उत्तर-पूर्व जोन के दिलशाद कॉलोनी और दिलशाद गार्डन और पुराने दिल्ली जोन के विभिन्न इलाकों में अवैध निर्माण के खिलाफ तोड़फोड़ की कार्रवाई की गई. इसके अलावा पूर्वी जोन और पुराने दिल्ली जोन में चार संपत्तियों को सील किया गया.
इससे एक दिन पहले भी निगम ने बड़े स्तर पर कार्रवाई की थी. शनिवार को दिल्ली के अलग-अलग हिस्सों में 33 संपत्तियों को ध्वस्त किया गया था और पांच अन्य संपत्तियों को सील किया गया था. लगातार दो दिनों में हुई कार्रवाई से साफ है कि निगम ने भवन नियमों के उल्लंघन और संभावित रूप से खतरनाक निर्माणों पर निगरानी बढ़ा दी है.
खतरनाक इमारतों और पीजी भवनों पर भी सवाल: सत्य निकेतन हादसे के बाद राजधानी में खतरनाक इमारतों और पीजी भवनों को लेकर भी सवाल उठे हैं. इसे देखते हुए एमसीडी ने दिल्लीभर में पेइंग गेस्ट (पीजी) आवासों का व्यापक क्षेत्रीय सर्वेक्षण शुरू किया है. निगम का उद्देश्य पीजी भवनों का विस्तृत डेटाबेस तैयार करना और नियमों के उल्लंघन की पहचान के आधार पर आगे की कार्रवाई की रणनीति बनाना है.
एमसीडी के अनुसार, सर्वेक्षण के दौरान अब तक करीब 2114 ऐसे भवनों की पहचान की जा चुकी है, जहां पीजी सुविधाएं संचालित हो रही हैं. इन भवनों की स्थिति और नियमों के अनुपालन से जुड़ी जानकारी जुटाई जा रही है. निगम ने दोहराया है कि राजधानी के सभी 12 जोन में अनधिकृत निर्माण, खतरनाक इमारतों और भवन उप-नियमों के उल्लंघन के खिलाफ कार्रवाई जारी रहेगी. सत्य निकेतन हादसे के बाद बढ़ी निगरानी के बीच अब निगम की नजर उन इमारतों पर भी है, जहां सुरक्षा मानकों की अनदेखी कर व्यावसायिक या पीजी गतिविधियां संचालित की जा रही हैं.
