हरियाणा में फसल मुआवजे के नाम पर फर्जीवाड़ा, सरकार ने शुरू की सख्त जांच प्रक्रिया

Amit
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नोएडा। हरियाणा के कई जिलों में हालिया भारी बारिश और जलभराव के कारण किसानों की फसलें बर्बाद हो गईं। इस संकट की घड़ी में जब सरकार ने किसानों को राहत देने के लिए मुआवजे की प्रक्रिया शुरू की, तब कुछ शातिर ठगों ने इस योजना का दुरुपयोग कर मुआवजे के लिए फर्जी आवेदन दाखिल कर दिए।

अन्य जिलों के लोग कर रहे हैं असली किसानों के नाम पर आवेदन

प्राप्त जानकारी के अनुसार रोहतक, भिवानी, हिसार, सोनीपत, जींद और अंबाला जैसे जिलों में दर्जनों मामले सामने आए हैं, जिनमें दूसरे जिलों में बैठे जालसाजों ने “क्षतिपूर्ति पोर्टल” पर असली किसानों की भूमि और फसल की जानकारी का दुरुपयोग कर मुआवजा पाने के लिए आवेदन कर दिए। इससे वास्तविक किसान सरकारी सहायता से वंचित हो रहे हैं।

सरकार की कार्रवाई: गिरदावरी के दौरान होगी जांच

राजस्व और कृषि विभाग ने इस फर्जीवाड़े को गंभीरता से लेते हुए निर्देश जारी किए हैं कि अब गिरदावरी (फसल निरीक्षण) के दौरान पटवारी मौके पर जाकर जांच करेंगे कि क्षतिपूर्ति पोर्टल पर पंजीकरण सही किसान के नाम से है या नहीं।
जहां फर्जी पंजीकरण पाए जाएंगे, वहां तहसील स्तर पर सत्यापन कर गलत नाम को हटाकर असली किसान का नाम जोड़ा जाएगा।

अब तक 2.21 लाख से अधिक शिकायतें

“मेरी फसल–मेरा ब्योरा” पोर्टल पर अब तक किसानों द्वारा 2,21,824 शिकायतें दर्ज कराई जा चुकी हैं। इनमें से कई शिकायतें सीधे जिला उपायुक्तों को भेजी गई हैं। नूंह जिले में फर्जी पंजीकरण का मामला सामने आने पर पुलिस में एफआईआर भी दर्ज की गई है।

अधिकारियों की निगरानी में सुलझेंगी शिकायतें

अतिरिक्त मुख्य सचिव, कृषि एवं किसान कल्याण विभाग पंकज अग्रवाल ने जानकारी दी कि पोर्टल पर फसलों का पंजीकरण बंद कर दिया गया है, लेकिन गलत पंजीकरण से संबंधित शिकायतें अभी भी दर्ज की जा सकती हैं।
इन शिकायतों का समाधान तहसील स्तर पर पटवारी और तहसीलदार के सत्यापन के बाद किया जाएगा। इसके अलावा एसडीएम, डीसी और मंडल आयुक्त भी सीधे निगरानी कर रहे हैं।

आधार या पीपीपी से लिंक होगा डेटा, यूनिक ID बनेगी

भविष्य में फर्जीवाड़ा रोकने के लिए सरकार पोर्टल में तकनीकी बदलाव की तैयारी कर रही है। पंजीकरण की प्रक्रिया को आधार या परिवार पहचान पत्र (PPP) से जोड़ने और यूनिक किसान ID जारी करने की योजना है, जिससे कोई भी अन्य व्यक्ति किसी और की जमीन या फसल का पंजीकरण न कर सके।

फायदे की योजनाएं भी हो सकती हैं प्रभावित

“मेरी फसल–मेरा ब्योरा” पोर्टल पर पंजीकृत किसानों को न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP), डीएसआर, पराली प्रबंधन और “मेरा पानी–मेरी विरासत” जैसी योजनाओं का लाभ मिलता है। फर्जीवाड़े के चलते न सिर्फ असली किसानों को नुकसान हो रहा है, बल्कि सरकारी योजनाएं भी प्रभावित हो रही हैं।

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