नई दिल्ली: दिल्ली पुलिस के मध्य जिला की साइबर सेल थाना पुलिस ने एक बड़े अंतरराज्यीय सिंडिकेट का भंडाफोड़ करते हुए चार शातिर अपराधियों को गिरफ्तार किया है। यह सिंडिकेट देशभर के साइबर ठगों को फर्जी बैंक खाते (म्यूल अकाउंट) और पीओएस (POS) मशीनें सप्लाई करने का काम कर रहा था। पुलिस ने गुप्त सूचना के आधार पर पहाड़गंज के ‘कृष्णा होटल’ में छापेमारी कर इन आरोपियों को उस समय रंगे हाथों दबोचा, जब वे साइबर अपराधियों के लिए बैंकिंग इन्फ्रास्ट्रक्चर तैयार कर रहे थे।
गिरफ्तार किए गए आरोपियों की पहचान स्थानीय कोऑर्डिनेटर संजय (आनंद पर्वत), इंफ्रास्ट्रक्चर मैनेजर कुलदीप गोले (पटेल नगर), फर्जी फर्में बनाने वाले अंतरराज्यीय सप्लायर निर्दोष बिदलान (सोनीपत, हरियाणा) और मर्चेंट किट अरेंज करने वाले दीपक बिश्नोई (हनुमानगढ़, राजस्थान) के रूप में हुई है।
डीसीपी रोहित राजबीर सिंह ने बताया कि यह सिंडिकेट बेहद व्यवस्थित तरीके से काम कर रहा था। आरोपी फर्जी रेंट एग्रीमेंट के जरिए ‘एसजी एंटरप्राइजेस’ और ‘जीएम एंटरप्राइजेस’ जैसी फर्जी पार्टनरशिप फर्में बनाते थे और उनके नाम पर कमर्शियल करंट अकाउंट खुलवा लेते थे। इसके बाद, देशभर में होने वाली साइबर ठगी की रकम को इन खातों में ट्रांसफर किया जाता था।
पैसे को पुलिस की नजरों से बचाने के लिए आरोपी पीओएस मशीन और मर्चेंट यूपीआई क्यूआर कोड का इस्तेमाल करके उस अवैध पैसे को वैध बिजनेस ट्रांजेक्शन की तरह दिखाते थे। इस काम के लिए खाताधारकों को 8% कमीशन दिया जाता था, जबकि एजेंट आपस में 2 से 4% कमीशन बांटते थे।
पुलिस ने आरोपियों के कब्जे से एक एक्टिव इंडसइंड बैंक पीओएस टर्मिनल, एक मर्चेंट यूपीआई क्यूआर कोड स्कैनर, 5 कमर्शियल करंट अकाउंट की चेक बुक, 6 एक्टिव एटीएम कार्ड, फर्जी रेंट एग्रीमेंट, पैन कार्ड और 4 मोबाइल फोन बरामद किए हैं।
तकनीकी जांच और राष्ट्रीय साइबर अपराध पोर्टल (NCRP) के रिकॉर्ड से पता चला है कि जब्त किए गए खाते पहले से ही देश के कई राज्यों में हुई साइबर धोखाधड़ी से जुड़े हैं। इनमें से एक्सिस बैंक और एचडीएफसी बैंक के खाते 5-5 अलग-अलग साइबर ठगी की शिकायतों में फ्लैग पाए गए हैं। अदालत ने चारों आरोपियों को न्यायिक हिरासत में भेज दिया है और पुलिस अब इस नेटवर्क के मनी ट्रेल को खंगाल रही है।
