नई दिल्ली: राजधानी दिल्ली को प्रदूषण मुक्त बनाने और यमुना को पुनर्जीवित करने की दिशा में बुधवार का दिन ऐतिहासिक साबित हुआ. दिल्ली नगर निगम (एमसीडी) और राष्ट्रीय डेयरी विकास बोर्ड (एनडीडीबी) के बीच कंप्रेस्ड बायो गैस (CBG) परियोजनाओं की स्थापना के लिए एक महत्वपूर्ण समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर किए गए. केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह की उपस्थिति में हुआ. यह करार न केवल स्वच्छ ऊर्जा की दिशा में एक बड़ा कदम है, बल्कि यमुना की सफाई के लिए भी एक ‘गेम चेंजर’ साबित होगा. इस मौके पर केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने एक बड़ा संकल्प दोहराते हुए कहा कि दिसंबर 2028 तक सरकार यह सुनिश्चित करेगी कि गंदे पानी की एक भी बूंद यमुना नदी में न गिरे.
यमुना में बहने वाला कचरा अब बनेगा ऊर्जा
दिल्ली के लिए लंबे समय से चिंता का विषय बनी यमुना की स्वच्छता को लेकर यह पहल अत्यंत महत्वपूर्ण है. आंकड़ों के मुताबिक, शहर में स्थित गौशालाओं और पशुपालकों से प्रतिदिन लगभग 1,500 मीट्रिक टन गोबर निकलता था, जिसका बड़ा हिस्सा अनुपचारित होकर सीधे यमुना में प्रवाहित होता था. इसके कारण नदी के प्रदूषण स्तर में लगातार वृद्धि हो रही थी. अब इस परियोजना के तहत, इस विशाल मात्रा में निकलने वाले गोबर का वैज्ञानिक प्रबंधन किया जाएगा. इसे न केवल कंप्रेस्ड बायो गैस (CBG) में बदला जाएगा, बल्कि इससे उच्च गुणवत्ता वाली जैविक खाद भी तैयार की जाएगी.
पशुपालकों की बढ़ेगी आय
इस परियोजना का दोहरा लाभ होगा. एक ओर जहां शहर को प्रदूषण से मुक्ति मिलेगी, वहीं दूसरी ओर गौशालाओं और पशुपालकों के लिए अतिरिक्त आय के नए द्वार खुलेंगे. गोबर जो अब तक समस्या बना हुआ था, अब वह एक मूल्यवान संसाधन में परिवर्तित होकर दिल्ली की अर्थव्यवस्था में योगदान देगा. विशेषज्ञों का मानना है कि यह मॉडल न केवल पर्यावरण के अनुकूल है, बल्कि टिकाऊ विकास का भी एक बेहतरीन उदाहरण है.
विशेषज्ञों का यह भी मानना है कि यदि यह परियोजना अपने निर्धारित लक्ष्यों को प्राप्त करती है, तो दिल्ली न केवल अपनी यमुना को साफ करने में सक्षम होगी, बल्कि भारत की ‘स्वच्छ ऊर्जा’ वाली राजधानी के रूप में भी अपनी पहचान को और अधिक सुदृढ़ करेगी. आने वाले समय में, यह तकनीक अन्य महानगरों के लिए भी एक रोल मॉडल के रूप में देखी जाएगी.
इस ऐतिहासिक अवसर पर दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता, केंद्रीय मत्स्यपालन, पशुपालन एवं डेयरी तथा पंचायती राज मंत्री राजीव रंजन सिंह और दिल्ली के उपराज्यपाल तरनजीत सिंह संधू विशेष रूप से मौजूद रहे. दिल्ली नगर निगम के महापौर प्रवेश वाही की उपस्थिति में हुए इस समझौते को दिल्ली के भविष्य के लिए एक बड़ी उपलब्धि माना जा रहा है.

