दिल्ली में ई-रिक्शा बैटरी चार्जिंग का अवैध कारोबार बना जानलेवा, रघुबीर नगर हादसे ने खोली पोल

News Desk
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पश्चिमी दिल्ली। रिहायशी इलाकों में ई-रिक्शा की पोर्टेबल बैटरियों की असुरक्षित और अवैध चार्जिंग जानलेवा खतरा बनती जा रही है। पुलिस, नगर निगम और बिजली विभाग की अनदेखी के बीच खासकर जेजे कालोनियों, पुनर्वास बस्तियों और घनी आबादी वाले क्षेत्रों में घरों, कमरों, दुकानों, गैराज और छोटे गोदामों में बैटरी चार्ज करने का कारोबार विकसित हो गया है।

सोमवार तड़के रघुबीर नगर में इसका भयावह उदाहरण सामने आया, जहां चार्जिंग पर लगी बैटरी में विस्फोट से आग फैलने के बाद मामा-भांजे की मौत हो गई।

यहां एक मकान की पहली मंजिल के कमरे में सोमवार तड़के करीब 24 पोर्टेबल बैटरियां चार्ज हो रही थीं। एक बैटरी में विस्फोट से आग फैल गई थी। पता चला यहां किशन नाम का व्यक्ति ई रक्शा के पोर्टेबल बैटरियां चार्ज करने का काम करता था।

चार्जिंग के लिए बिजली चोरी की जा रही थी, जिसमें मकान मालिक मुस्तकीन मदद कर रहा था।इधर घटना के 24 घंटों बाद भी इसमें पुलिस ने सिर्फ मामला दर्ज कर अपनी जिम्मेदारी निभा दी है। वहीं मृतक के रिश्तेदारों ने मामले में कार्रवाई नहीं होने को मंगलवार को थाने पहुंचे पर उन्हें थाने से लौटा दिया गया।

गौरतलब हो कि रघुबीर नगर से पहले दिलशाद गार्डन की कोड़ी कालोनी, शाहदरा का रामनगर, बिंदापुर, सोनिया विहार, रोहिणी का विजय विहार और अरबिंदो मार्ग जैसे इलाकों में ई-रिक्शा, ई-स्कूटर या ई-वाहन की चार्जिंग से जुड़ी आग की घटनाएं सामने आ चुकी हैं। इन घटनाओं में भी जांच में आग का कारण असुरक्षित चार्जिंग स्थल पाए गए थे।

पुलिस, निगम और बिजली विभाग की निगरानी पर सवाल

पुलिस, नगर निगम, बिजली वितरण कंपनियों और अग्निशमन विभाग को चार्जिंग केंद्रों में वेंटिलेशन और अग्निशमन इंतजामों की जांच करनी चाहिए। रघुबीर नगर की घटना चेतावनी है कि ऐसे असुरक्षित केंद्रों पर हादसे के बाद नहीं, हादसे से पहले कार्रवाई जरूरी है।

घनी बस्तियों में किसी कमरे या दुकान में रोजाना बड़ी संख्या में बैटरियां लाई जाएं और घंटों चार्जिंग हो तो यह पूरी तरह छिपी गतिविधि नहीं है। इसके बावजूद कार्रवाई नहीं होने पर संबंधित विभागों की निगरानी पर सवाल उठते हैं।

रघुबीर नगर मामले में बिजली चोरी की भी जांच हो रही है। अनधिकृत कनेक्शन, कमजोर वायरिंग, क्षमता से अधिक विद्युत भार ,खराब बैटरी, अनुपयुक्त चार्जरऔर ओवरचार्जिंग से बैटरी अत्यधिक गर्म होकर आग आग के खतरे को बढा देती है।

यही नहीं सामान्य रूप से भी चार्जिंग के दौरान बैटरी से हाईड्रोजन और आक्सीजन गैस लगातार निकलती रहती है। दोनों मिलकर एक विस्फोटक मिश्रण की तरह होती है। एक छोटी सी गलती इसे एक विस्फोटक बम बना देती है।

ऐसे में कई बार आवासीय परिसर में जलने वाले चूल्हे या सिगरेट भी आगजनी का कारण बन सकता है। जरूरी है घनी आबादी वाले क्षेत्रों में संयुक्त सर्वे की जरूरत है।

चार गुणा हुई निबंधित ई-रिक्शा संख्या

दिल्ली में पिछले कुछ वर्षों में ई-रिक्शा की संख्या बढ़ी है। दिल्ली सरकार के आर्थिक सर्वेक्षण 2022-23 के अनुसार 2021-22 तक 15,952 ई-रिक्शा, ई-आटो और ई-कार्ट पंजीकृत थे।

वहीं परिवहन विभाग के आंकड़ों के अनुसार 2022 में 13,611 ई-रिक्शा पंजीकृत हुए थे। 2023 में यह संख्या बढ़कर 17,546, 2024 में 27,798 और 2025 में 44,361 हो गई। 2026 के मध्य तक यह संख्या बढकर 50 हजार के पार पहुंच चुकी है।

यानी 2022 के मुकाबले 2026 के दौरान पंजीकृत होने वाले ई-रिक्शा की संख्या करीब चार गुना हो गई।

वहीं दिल्ली में बिजली वितरण कंपनी डिस्काम द्वारा 2025 में ही जारी एक सार्वजनिक बयान में बताया गया था कि दिल्ली की सड़कों पर करीब 1.6 लाख ई-रिक्शा चल रहे थे। इनमें करीब 50 हजार के पंजीकृत हैं।

कंपनी ने ई-रिक्शा की अवैध चार्जिंग से होने वाली बिजली चोरी और सुरक्षा संबंधी जोखिम को लेकर भी चिंता जताई थी।

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