
नई दिल्ली। जंतर-मंतर पर कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के विरोध प्रदर्शन के दौरान नई दिल्ली जिले में किए गए हिंसक उपद्रव को लेकर दिल्ली पुलिस ने मंगलवार को सुप्रीम कोर्ट में हलफनामा दाखिल कर कहा कि CJP का विरोध प्रदर्शन पूरी तरह से हिस्ट्रीशीटर और असामाजिक तत्वों के कब्जे में आ गया था।
पुलिस अधिकारियों व जवानों पर लगातार पथराव व जानलेवा हमले किए जाने के बावजूद पुलिस संयम बरतती रही और जरूरत पड़ने पर ही न्यूनतम बल प्रयोग किया गया। हलफनामे में पुलिस ने 20 जुलाई के प्रदर्शन से जुड़े घटनाक्रम, कानून-व्यवस्था की स्थिति, सुरक्षा इंतजामों और आपराधिक तत्वों की मौजूदगी को लेकर कई अहम दावे किए गए।
दिल्ली पुलिस ने सुप्रीम कोर्ट को बताया है कि उनके पास पूरे घटनाक्रम से जुड़े खुफिया इनपुट, पुलिस तैनाती के आदेश, डेली डायरी, वायरलेस लाग्स, सीसीटीवी फुटेज, बाॅडी-वार्न कैमरा रिकाॅर्डिंग्स, मेडिकल रिपोर्ट और संपत्ति के नुकसान का पूरा ब्योरा उपलब्ध है।
सिर्फ 20 जून तक के लिए थी परमिशन
पुलिस का कहना है कि प्रदर्शन निर्धारित नियमों और अनुमति की सीमाओं का उल्लंघन कर हिंसक हो गया था। संविधान के तहत किसी को भी शांतिपूर्ण प्रदर्शन का अधिकार तो है, लेकिन जब यह सुरक्षा व्यवस्था, सार्वजनिक संपत्ति और पुलिसकर्मियों के लिए खतरा बन जाए, तो कानून-व्यवस्था कायम रखना अनिवार्य हो जाता है।
हलफनामे में कहा गया है कि 17 जून को 20 जून के प्रदर्शन के लिए अनुमति मांगी गई थी, जिसमें जंतर-मंतर पर 500-600 लोगों के शामिल होने की बात कही गई थी। आवेदन तय समय-सीमा से कम समय में दिया गया था और सुप्रीम कोर्ट के दिशा-निर्देशों के अनुरूप नहीं था।
इसके बावजूद एडिशनल डीसीपी ने एक दिन के लिए अपवाद के रूप में अनुमति प्रदान की थी। अनुमति 20 जून शाम पांच बजे समाप्त हो गई थी, लेकिन प्रदर्शनकारी हटने के बजाय वहीं डटे रहे और भीड़ जुटाते रहे।
संसद मार्च के लिए न मंजूरी मांगी, न प्रशासन ने दी
हलफनामे में साफ कहा गया है कि CJP द्वारा संसद मार्च के लिए न तो कोई मंजूरी मांगी गई और न ही प्रशासन द्वारा कोई मंजूरी दी गई थी। जंतर-मंतर पर नियमानुसार प्रदर्शनकारियों की अधिकतम सीमा एक हजार तय की गई है।
CJP नेताओं द्वारा लगातार अपील कर इस सीमा का उल्लंघन किया गया। 20 जुलाई को प्रदर्शन स्थल पर 30 हजार से अधिक लोगों की भारी भीड़ एकत्र हो गई, जिसे नियंत्रित करने के लिए पांच हजार पुलिसकर्मियों को तैनात किया गया था।
सुरक्षा बलों की बार-बार की गई अपीलों को दरकिनार करते हुए प्रदर्शनकारियों का एक हिंसक हिस्सा बैरिकेड तोड़कर संसद भवन की ओर बढ़ने लगा।
बैरिकेड तोड़कर संसद की ओर बढ़ने का आरोप
हलफनामे में आरोप लगाया गया है कि उपद्रवियों ने पुलिसकर्मियों पर हमला किया, उन्हें खींचा और भारी पथराव किया। इस दौरान पुलिस व अन्य सरकारी वाहनों और बैरिकेड्स समेत सार्वजनिक संपत्ति को काफी नुकसान पहुंचाया गया।
हिंसक झड़पों के दौरान 240 से अधिक पुलिसकर्मी घायल हुए। इसके अलावा लगभग 200 प्रदर्शनकारियों और नागरिकों का भी मेडिकल परीक्षण कराया गया। अलग-अलग स्थानों पर एक साथ बिगड़े हालात और भीड़ के बड़े आकार को देखते हुए पुलिस बलों ने अत्यंत संयम बरतते हुए केवल न्यूनतम जरूरी बल का प्रयोग किया।
अपराधियों की पहचान के लिए इस्तेमाल किया एफआरएस
पुलिस ने फेशियल रिकाग्निशन सिस्टम (एफआरएस) के इस्तेमाल पर स्पष्ट किया कि इसका उद्देश्य आम प्रदर्शनकारियों की निगरानी करना नहीं था, बल्कि गंभीर अपराधियों की पहचान करना था। एफआरएस जांच के दौरान 20 से 26 जुलाई के बीच चौकाने वाले आंकड़े सामने आए।
प्रदर्शन स्थल पर मौजूद 2,873 लोगों का डाटा पुलिस के आपराधिक रिकॉर्ड से मेल खाया। इनमें 2,402 लोगों की पहचान ‘क्राइम कुंडली’ से हुई। यह दिल्ली पुलिस का एक एकीकृत डिजिटल और बायोमेट्रिक डेटाबेस प्लेटफाॅर्म है, जिसे अपराधियों का पूरा रिकॉर्ड रखने, उनकी पहचान करने और दोहरी जिंदगी जीने वाले बदमाशों को ट्रैक करने के लिए लांच किया गया है।
इसके अलावा 471 की पहचान ‘डोजियर रिकॉर्ड’ के आधार पर की गई। इनमें से 92 लोग ऐसे पाए गए जो 10 से अधिक मामलों में शामिल रहे हैं, जबकि 47 घोषित हिस्ट्रीशीटर थे।
‘कील लगी लाठी’ के प्रयोग से इन्कार
महिला प्रदर्शनकारियों से निपटने और सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए व्यापक इंतजाम किए गए थे। प्रदर्शन स्थल, प्रवेश-निकास द्वारों, संवेदनशील बिंदुओं और रिजर्व प्वाइंट्स पर 4,600 से ज्यादा महिला पुलिसकर्मियों को तैनात किया गया था।
महिला प्रदर्शनकारियों के साथ संवाद और आवश्यक कार्रवाई केवल महिला पुलिसकर्मियों के जरिये ही कराई गई। प्रदर्शनकारियों द्वारा पुलिस पर ‘कील लगी लाठी’ का प्रयोग करने के आरोपों को पुलिस ने सिरे से खारिज कर दिया।
हलफनामे में कहा गया कि जिस प्रसारित वीडियो को आधार बनाकर यह दावा किया जा रहा है, उसमें वह लाठी किसी पुलिसकर्मी के हाथ में नहीं, बल्कि एक प्रदर्शनकारी के हाथ में दिख रही है। इसके अतिरिक्त, किसी भी मेडिकल रिपोर्ट में प्रदर्शनकारियों को ऐसी लाठी से चोट लगने की पुष्टि नहीं हुई है।
