नई दिल्ली। दिल्ली विकास प्राधिकरण (डीडीए) ने जमीन की धोखाधड़ी रोकने के लिए अपनी 3768 से अधिक खाली संपत्तियों का ब्योरा तो आनलाइन कर दिया, लेकिन उसकी कार्यशैली पर एक गंभीर सवालिया निशान भी खड़ा कर दिया है।
सवाल यह है कि डीडीए ने जो डेटा ‘पूरी सार्वजनिक किया है, वह सिर्फ तरह खाली’ प्लाटों का है या इनमें वो जमीनें भी शामिल हैं जिन पर भूमाफिया कुंडली मारकर बैठे हैं? सूत्रों की मानें तो डीडीए के पास फिलहाल इसका कोई साफ वर्गीकृत आंकड़ा नहीं है कि उसकी कितने एकड़ जमीन पर वास्तव में अवैध कब्जा या अतिक्रमण हो चुका है।
डीडीए के ‘वैकेंट लैंड मैनेजमेंट सिस्टम’ (वीएलएमएस) के जरिए जारी किए गए आंकड़ों के मुताबिक, इंजीनियरिंग, हार्टिकल्चर व मैनेजमेंट विंग के कुल 3768 प्लाटों को वेबसाइट पर डाला गया है, लेकिन इस पूरी लिस्टिंग में सबसे बड़ा झोल यही है।
कागज बनाम हकीकत
डेटा में वर्गीकरण का अभाव
संपत्ति खरीदते हुए इन बातों का खास ख्याल रखें
अगर डीडीए पोर्टल पर कोई जमीन खाली दिख रही है, तो यह न मान लें कि वह विवाद मुक्त है। मौके पर जाकर ‘फिजिकल वेरिफिकेशन’ जरूर करें।
अतिक्रमण की पोल खोलें
यदि वेबसाइट पर आपका पड़ोसी प्लाट डीडीए का ‘वैकेंट लैंड’ दिखा रहा है और वहां अवैध कब्जा है तो पोर्टल के माध्यम से सीधे इसकी शिकायत दर्ज कराएं।
ऑनलाइन आंकड़ों की स्थिति
| विवरण | प्लाट की संख्या |
|---|---|
| इंजीनियरिंग विंग के प्लाट | 2,820 |
| हार्टिकल्चर विंग के प्लाट | 756 |
| मैनेजमेंट विंग के प्लाट | 192 |
| कुल प्लाट | 3,768 |
