623 करोड़ की कथित धोखाधड़ी की जांच तेज, ताशी ग्रुप के 7 ठिकानों पर ईडी की रेड

News Desk
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नोएडा: राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र (एनसीआर) में घर देने के नाम पर 600 से अधिक खरीदारों से 623 करोड़ रुपये से ज्यादा की धोखाधड़ी करने वाले ताशी लैंड डिवेलपर्स के खिलाफ प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) का शिकंजा और कस गया है।

सुप्रीम कोर्ट के कड़े रुख के बाद ईडी ने गुरुवार को नोएडा और गुड़गांव सहित कुल सात ठिकानों पर छापेमारी की। जांच में खरीदारों से बटोरे गए करोड़ों रुपये विदेश की कंपनियों में ट्रांसफर करने और प्रमोटर परिवार द्वारा अवैध संपत्ति बेचने के पुख्ता सबूत मिले हैं।

ईडी को मिले पुख्ता सबूत

ईडी प्रवक्ता ने बताया कि यह कार्रवाई प्रिवेंशन ऑफ मनी लॉन्ड्रिंग एक्ट 2002 के तहत दिल्ली और हरियाणा पुलिस की ईओडब्ल्यू द्वारा दर्ज प्राथमिकियों के आधार पर की जा रही है। यह मामला गुड़गांव के सेक्टर-111 स्थित ताशी कैपिटल गेटवे और सेक्टर-68 स्थित ‘ओरियन गैलेक्सी’ (पूर्व नाम ‘स्पायर साउथ’) प्रॉजेक्ट्स से जुड़ा है। ईडी की जांच में कई पुख्ता सबूत हाथ लगे हैं।

15 साल बाद भी खरीदारों को नहीं दिया घर

ईडी की जांच में सामने आया कि ताशी ग्रुप ने लगभग 10-15 साल पहले 600 से अधिक खरीदारों से करीब 386 करोड़ रुपये एकत्र किए थे, लेकिन आज तक उन्हें घर का कब्जा नहीं दिया। यही नहीं, ग्रुप ने स्पेशल विडो फॉर अफोर्डेबल एंड मिड इनकम हाउसिंग फंड के 98 करोड़ रुपये सहित 120 करोड़ रुपये के निवेश का गबन किया। खरीदारों और वित्तीय संस्थानों से जुटाया गया पैसा ग्रुप की आपस में जुड़ी शेल कंपनियों में डायवर्ट कर दिया गया।

22 लाख रुपये के खाते फ्रीज

ताजा छापेमारी के दौरान ईडी ने विदेशी निवेश से संबंधित वित्तीय रिकॉर्ड, डिजिटल डेटा और कई महत्वपूर्ण दस्तावेज जब्त किए है। इसके अलावा 22 लाख रुपये के बैंक बैलेंस/एफडीआर और एक लग्जरी कार को फ्रीज और जब्त किया है। ईडी की जांच फिलहाल जारी है।

विदेश में बस गया पूरा परिवार

ईडी की जांच में यह भी पता चला है कि मुख्य प्रमोटर काशी नाथ शुक्ला के परिवार के सदस्य कथित तौर पर विदेश में बस गए हैं और उन्होंने पिछले 5-10 वर्षों में भारत में मौजूद अपनी बड़ी संपत्तियों को बेच दिया है। यह भी पता चला है कि उनके परिवार के सदस्यों के नाम पर विदेशी कंपनियों/संस्थाओं में भारी निवेश किया गया है, जिसमें यूके में एक ओल्ड एज केयर होम चलाना भी शामिल है। उनके परिवार के एक सदस्य ने निवेश के जरिए सेंट किट्स की नागरिकता के लिए आवेदन किया था।

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