गाजियाबाद। शहर में गोबर की समस्या को खत्म करने के लिए नगर निगम ने पहल शुरू की है। निगम द्वारा अब गोशाला, डेरी क्लस्टरों, गोशाला से निकलने वाले गोबर का प्रोसेसिंग कर उससे बायो फ्यूल, औद्योगिक ईंधन, जैविक खाद और अन्य उत्पाद तैयार किए जाएंगे। इस संबंध में निगम ने टेंडर जारी कर दिया है। एजेंसी का चयन होने के बाद काम शुरू कर दिया जाएगा।
नगर निगम क्षेत्र में डेरी व गोशाला आदि से प्रतिदिन लगभग 20 टन गोबर निकलता है। निगम क्षेत्र में लगभग सात हजार मवेशी पाले जाते हैं। अकेले नगर निगम की गोशाला में ही 1700 से अधिक गोवंशी हैं। हर दिन बड़ी मात्रा में निकलने वाला गोबर से बदबू फैलती है। डेरी का गोबर नालों में बहाया जा रहा है। वर्षा के दिनों में यह समस्या और बढ़ जाती है।
निगम ने गोबर से बायो फ्यूल बनाने सहित अन्य कार्यों में इस्तेमाल करने का निर्णय लिया है। चयनित एजेंसी सबसे पहले शहर के सभी जोन में सर्वे करेगी। इसमें गोशालाओं, डेरी क्लस्टरों, गोशाला और बड़े पशुपालकों की पहचान कर यह तय किया जाएगा कि कहां से कितनी मात्रा में गोबर मिल सकता है। गोबर को प्रोसेसिंग प्लांट तक ले जाकर उसका वजन किया जाएगा और फिर उसे सुखाकर अलग-अलग तकनीक से काम में लिया जाएगा।
बायो-सीएनजी या अन्य स्वीकृत उत्पाद भी होंगे तैयार
उप मुख्य पशु चिकित्सा एवं कल्याण अधिकारी डा. अनुज ने बताया कि एजेंसी गोबर से औद्योगिक ईंधन, फ्यूल पेलेट, ब्रिकेट, जैविक खाद, मिट्टी सुधारक, बायोगैस, बायो-सीएनजी या अन्य स्वीकृत उत्पाद तैयार कर सकेगी।
कौन-सी तकनीक अपनाई जाएगी, यह गोबर की उपलब्धता, उसकी नमी और बाजार की मांग पर निर्भर करेगा। निगम प्रोसेसिंग प्लांट लगाने के लिए जमीन उपलब्ध कराने में मदद करेगा।
वाहन में ढुलाई के दौरान सड़क पर गोबर का नहीं होगा रिसाव
पर्यावरण सुरक्षा पर भी विशेष ध्यान दिया जाएगा। गोबर के एकत्रित करने और परिवहन के दौरान बदबू, गोबर की ढुलाई के दौरान रिसाव और सड़क पर फैलाव रोकना एजेंसी की जिम्मेदारी होगी।
प्रोसेसिंग प्लांट पर मक्खियों की रोकथाम व गंदे पानी का प्रबंधन आदि की जिम्मेदारी भी एजेंसी की होगी। निगम समय-समय पर इसकी निगरानी करेगा।
