गाजियाबाद में प्रदूषण पर फिर सर्वे की तैयारी, सर्दियों से पहले यूपीपीसीबी का प्लान

News Desk
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साहिबाबाद (गाजियाबाद)। हर वर्ष अक्टूबर में सर्दी शुरू होने के साथ ही प्रदूषण का स्तर भी बढ़ना शुरू हो जाता है। लोगों को सर्दियों के ज्यादातर दिनों में खराब, बेहद खराब व गंभीर श्रेणी की हवा में ही रहना पड़ता है।

प्रदूषण रोकथाम के लिए दो बार सर्वे की योजना बनी, लेकिन कागजों में ही दबकर रह गई। अब फिर से उत्तर प्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (यूपीपीसीबी) सर्दी शुरू होने से पहले अधिक प्रदूषित इलाकों का सर्वे कराने की योजना बना ली है।

इसमें देखा जाएगा कि किस क्षेत्र में प्रदूषण का कारण क्या हैं और उनका अनुपात कितना है। इसी के आधार पर इन क्षेत्रों में विशेष टीम गठित कर कड़ी निगरानी की जाएगी, लेकिन देखना होगा इस बार यह योजना कितनी सफल होती है।

सर्दियों में एक दिन भी नहीं नसीब हुई साफ हवा

सेंटर फार रिसर्च आन एनर्जी एंड क्लीन एयर (सीआरईए) की रिपोर्ट में एक अक्टूबर 2025 से 28 फरवरी 2026 तक सर्दियों में पीएम 2.5 का औसत 172 माइक्रो ग्राम प्रति घन मीटर दर्ज किया गया था। इस रिपोर्ट में गाजियाबाद पहले, नोएडा दूसरे व दिल्ली देश में तीसरे नंबर पर रही थी।

सर्दियों के 151 दिन में से गाजियाबाद के लोगों को एक दिन भी साफ हवा नहीं मिल सकी। यही कारण है कि सर्दियों के मौसम में प्रदूषण के कारण लोगों की आंखों में जलन, गले में खराश जैसी समस्याएं रहीं।

सांस व दमा के मरीजों को सबसे ज्यादा परेशानी झेलनी पड़ी। कुछ लोग शहर छोड़कर दूसरे शहरों में रहने के लिए चले गए थे। प्रदूषण बोर्ड इस बार सर्वे रिपोर्ट तैयार कर कार्रवाई के दावे कर रहा है।

एबीईएस और एमएमएच कालेज के प्रोफेसर को दी थी जिम्मेदारी 

केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के आदेश पर पहले भी एबीईएस और एमएमएच कालेज के प्रोफेसर को सर्वे की जिम्मेदारी दी जा चुकी है, लेकिन दोनों बार यह केवल कागजों में ही दबकर रह गया।

क्षेत्रीय अधिकारी अंकित सिंह का कहना है कि जो बेहतर रिपोर्ट उपलब्ध करा सके ऐसी संस्था की तलाश की जा रही है। जिन्हें पहले जिम्मेदारी सौंपी गई थी, वह प्रदूषण के कारकों की सही जानकारी नहीं जुटा पा रहे थे। इसीलिए सर्वे को बीच में ही रोकना पड़ा।

स्वच्छ वायु सर्वेक्षण-2025 में 12वें नंबर पर रहा था जिला

पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय की तरफ से जारी स्वच्छ वायु सर्वेक्षण-2025 रिपोर्ट में भी गाजियाबाद 10 लाख से अधिक आबादी वाले शहरों में टाप-10 में भी जगह नहीं बना सका था। 198 में से 183 अंक पाकर देश के 48 शहरों में 12 वें पायदान पर रहा था।

बीते वर्ष चिह्नित किए गए हॉटस्पॉट व प्रदूषण के प्रमुख कारण

  • मोहननगर: वाहनों का दबाव, सड़क पर उड़ती धूल।
  • राजनगर एक्सटेंशन: वाहनों का दबाव, निर्माण कार्य और सड़क की धूल।
  • लोनी: अवैध औद्योगिक क्षेत्र, वाहनों का दबाव, खुले में बिकती निर्माण सामग्री और सड़कों की धूल।
  • भोपुरा-दिल्ली बॉर्डर: अवैध फैक्ट्रियां, खुले में बिकती निर्माण सामग्री और सड़क पर उड़ती धूल।
  • सिद्धार्थ विहार: वाहनों का दबाव, निर्माण कार्य, टूटी सड़कें, उड़ती धूल और निर्माण सामग्री।
  • कनावनी पुस्ता रोड: वाहनों का दबाव, निर्माण कार्य, टूटी सड़कें, उड़ती धूल और निर्माण सामग्री।
  • विजय नगर एवं साउथ साइड जीटी रोड: एनएच-9 पर वाहनों का दबाव, टूटी सड़कें, धूल, निर्माण कार्य और औद्योगिक उत्सर्जन।
  • लालकुआं: सड़कों पर उड़ती धूल, वाहनों का दबाव और निर्माण गतिविधियां।

1 अक्टूबर 2025 से 28 फरवरी 2026 तक वायु गुणवत्ता (AQI) की स्थिति

श्रेणी दिन
साफ 00
संतोषजनक 04
मध्यम 12
खराब 52
बेहद खराब 67
गंभीर 16

अक्टूबर से पहले सर्वे रिपोर्ट तैयार कर ली जाएगी। इसमें देखा जाएगा कि औद्योगिक क्षेत्र, जाम, टूटी सड़कें आदि की प्रदूषण में कितनी भागीदारी है। इसके बाद टीम बनाकर अधिक प्रदूषित इलाकों में कड़ी निगरानी की जाएगी।

अंकित सिंह, क्षेत्रीय अधिकारी, उत्तर प्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड।

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