गाजियाबाद में 30-37 साल से बेकार खड़ी पानी की टंकियां, अब ध्वस्तीकरण की तैयारी

News Desk
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गाजियाबाद। एक साल में प्रदेश में सर्वाधिक टंकियों की खराब गुणवत्ता के कारण हादसे हो ही रहे हैं, लेकिन 30 वर्ष पहले भी ऐसे ही कुछ हालात थे। पटेल नगर में 30 वर्ष पहले एक टंकी और नंदग्राम में 37 वर्ष पहले दो टंकियों के निर्माण में हुए भ्रष्टाचार को छिपाने के लिए तीन दशक से अधिक समय बीतने का इंतजार किया गया।

इन तीनों टंकियों से एक दिन भी लोगों को पानी नहीं मिला। पटेल नगर में बनाने के बाद लीकेज की समस्या आ गई थी, जिसे कभी ठीक करने का प्रयास नहीं किया गया। जबकि नंदग्राम की दोनों टंकियां झुक गई थीं। हादसे के डर की वजह से इनका भी इस्तेमाल नहीं किया गया।

जीडीए ने किया था निर्माण

अब इन टंकियों को ध्वस्त करने की तैयारी की जा रही है। इन टंकियों का निर्माण जीडीए ने किया था। अब नगर निगम इन टंकियों के ध्वस्तीकरण पर पैसा खर्च करेगा। तीनों टंकियों की मौजूदा स्थिति का आकलन कराने के लिए निगम ने अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय को तकनीकी जांच का जिम्मा दिया है। यदि विशेषज्ञ जांच में ढांचा असुरक्षित पाया जाता है तो इसे ध्वस्त करने की प्रक्रिया शुरू की जाएगी।

पटेल नगर में जीडीए ने 30 वर्ष पहले आवासीय कालोनी विकसित करने के साथ ही 1500 केएल की टंकी का निर्माण किया था। उस दौरान टंकी निर्माण में कितना पैसा खर्च किया गया, इसके बारे में वर्तमान में किसी अधिकारी को नहीं पता। जीडीए ने इस कालोनी को निगम के हैंडओवर कर दिया।

यह टंकी भी निगम के हिस्से में चली गई। टंकी के निर्माण के बाद इसमें पानी भरा गया तो इसमें लीकेज की समस्या आ गई। तीन दशक के लंबे समय में नगर निगम ने टंकी के लीकेज को ठीक कराने या उसकी तकनीकी स्थिति का सर्वे कराने का कोई गंभीर प्रयास नहीं किया।

माना जा रहा है कि उस दौरान यदि टंकी को तोड़ा जाता या उसकी खामी को दूर करने का प्रयास किया जाता तो भ्रष्टाचार उजागर हो जाता। इस भ्रष्टाचार को दबाने के लिए 30 व 37 वर्ष का इंतजार किया गया।

वहीं जल निगम के एक्सपर्ट का दावा है कि टंकी की आयु अधिकतम 50 वर्ष होती है। मेंटेनेंस न किया जाए तो वह 30 वर्ष बाद जर्जर होनी शुरू हो जाती है। निर्माण के समय हुई खामियों की जिम्मेदारी तय करने के बजाय क्या समय बीतने का इंतजार किया गया।

निर्माण के बाद झुक गई थीं नंदग्राम की दोनों टंकियां 

जीडीए ने आवासीय कालोनी नंदग्राम विकसित करने के बाद यहां 1800 किलोलीटर की एक ही स्थान पर दो टंकियों का निर्माण किया था। दोनों टंकियों की एक-दूसरे से दूरी महज 10 मीटर से भी कम है। दोनों टंकियों का निर्माण 1989 में किया गया। निर्माण के बाद पहले दिन जब दोनों टंकियों में पानी भरा गया तो वे एक-दूसरे की ओर झुक गईं। इन टंकियों से नंदग्राम के लोगों को एक दिन भी पानी नहीं मिला। जीडीए ने टंकी सहित कालोनी को नगर निगम के हैंडओवर कर दिया था। वर्तमान में टंकी परिसर में कार पार्किंग बना रखी है। दोनों टंकियां जर्जर हो चुकी हैं।

पानी की किल्लत से जूझ रहे लोग

पटेल नगर में पानी की व्यवस्था ठीक है, लेकिन नंदग्राम के लोग पानी की किल्लत से जूझ रहे हैं। नंदग्राम में तीन लाख से अधिक आबादी निवास करती है। लोगों का सवाल है कि यदि टंकी निर्माण के समय ही पानी रोकने में सक्षम नहीं थी तो इसकी खामी दूर कराने के लिए संबंधित एजेंसी या जिम्मेदार अधिकारियों से जवाब क्यों नहीं मांगा गया। नगर निगम के पास टंकी आने के बाद भी इसे चालू कराने की दिशा में कोई प्रभावी कदम नहीं उठाया गया। वर्षों तक टंकी उसी स्थिति में खड़ी रही और अब उसकी उम्र अधिक होने का हवाला देकर उसे हटाने की तैयारी की जा रही है।

वर्तमान समय में 2000 किलोलीटर क्षमता की पानी की टंकी बनाने में करीब तीन करोड़ रुपये तक खर्च होते हैं। इस हिसाब से इतनी बड़ी क्षमता वाली टंकियों को बनाने में उस समय भी अच्छा-खासा सरकारी धन खर्च हुआ होगा। अब ध्वस्तीकरण कराने में भी नगर निगम को पैसा खर्च करना पड़ेगा।

क्या बोले लोग

टंकी के निर्माण के बाद एक दिन भी इससे हमें पानी नहीं मिला। हम पानी की किल्लत से जूझ रहे हैं। टंकी निर्माण में हुए भ्रष्टाचार की अधिकारियों से जांच होनी चाहिए।
– राजन गुप्ता, स्थानीय निवासी।

टंकी के निर्माण में भारी अनियमितता बरती गई हैं। हैरानी की बात है कि इसे बनाने वालों पर कोई कार्रवाई नहीं हुई। हम पानी खरीदकर पीने के लिए मजबूर हैं।
– हरिशंकर, स्थानीय निवासी।

नंबर गेम
– 30 वर्ष पहले पटेल नगर में बनी टंकी की क्षमता : 1500 किलोलीटर
– 37 वर्ष पहले बनी नंदग्राम की दोनों टंकियों की क्षमता : 1800 किलोलीटर
– नंदग्राम की अनुमानित आबादी : करीब तीन लाख
– वर्तमान समय में 2000 किलोलीटर टंकी की लागत : करीब तीन करोड़ रुपये

तीनों टंकियों की स्थिति का आंकलन एएमयू के विशेषज्ञों की टीम से कराया जाएगा। यदि तीनों टंकियों को असुरक्षित बताया बताया जाता है तो इन्हें गिराने की कार्रवाई की जाएगी।
– केपी आनंद, जलकल, नगर निगम।

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