नई दिल्ली: दिल्ली विधानसभा के मॉनसून सत्र के अंतिम दिन मंगलवार को मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने सदन में प्रस्तुत सीएजी रिपोर्ट्स पर चर्चा के दौरान पिछली सरकार के कार्यकाल में सामने आई वित्तीय अनियमितताओं, योजनाओं के क्रियान्वयन में लापरवाही और सरकारी व्यवस्था में पारदर्शिता की कमी को लेकर गंभीर सवाल उठाए.
उन्होंने कहा कि ये रिपोर्ट्स किसी राजनीतिक दल या सरकार द्वारा तैयार नहीं की गई हैं, बल्कि देश की सर्वोच्च संवैधानिक ऑडिट संस्था सीएजी द्वारा तैयार की गई हैं, जिनमें विभिन्न विभागों और योजनाओं की कार्यप्रणाली का विस्तृत ऑडिट सामने रखा गया है. वर्तमान सरकार के सत्ता में आने के बाद लंबित सीएजी रिपोर्ट्स को सदन में प्रस्तुत किया गया है और अपने लगभग डेढ़ वर्ष के कार्यकाल में 19 सीएजी रिपोर्ट्स विधानसभा में रखी जा चुकी हैं. इन पर लगातार कार्रवाई की जा रही है और पब्लिक अकाऊंट्स कमेटी (पीएसी) भी इनका संज्ञान ले रही है.
सीएजी रिपोर्ट्स पिछली सरकार का रिपोर्ट कार्ड
मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने कहा कि इस ऑडिट संस्था ने पिछली सरकार के कामकाज की पूरी तस्वीर सामने रख दी है और एक-एक विषय को विस्तार से बताया है कि किस प्रकार पिछली आम आदमी पार्टी सरकार के कार्यकाल में जनता के पैसे के साथ गड़बड़ियां हुईं और दिल्ली के धन का दुरुपयोग हुआ. मुख्यमंत्री ने कहा कि पिछली सरकार ने किसी भी सेक्टर या विभाग को नहीं छोड़ा. हेल्थ के क्षेत्र में उनके कार्यकाल से जुड़े मामले सामने आए, एजुकेशन के क्षेत्र में गड़बड़ियों की बात सामने आई, विज्ञापन और सब्सिडी से जुड़े विषय सामने आए. इसी प्रकार दिल्ली जल बोर्ड, पीडब्ल्यूडी सहित विभिन्न विभागों में भी अनियमितताओं के मामले सामने आए. स्थिति यह थी कि टेंडर से लेकर सब्सिडी देने तक सभी में गड़बड़ी पाई गई। यह घोटालों की सरकार थी और इस दौरान जनता परेशान होती रही, लेकिन उसे कोई राहत नहीं मिली.
फंड उपलब्ध होने के बावजूद खर्च नहीं किया गया
मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने सीएजी रिपोर्ट्स से जुड़े एक अन्य महत्वपूर्ण पहलू का उल्लेख करते हुए कहा कि विधायकों ने रिपोर्ट्स के कई विषयों पर चर्चा की, लेकिन इससे भी बड़ी बात यह है कि पिछली सरकार के पास फंड उपलब्ध था, लेकिन उस फंड का भी पूरा उपयोग नहीं किया गया. उन्होंने वित्त वर्ष 2024-25 के फाइनेंशियल बजट का उदाहरण देते हुए कहा कि उस वर्ष 80,798 करोड़ रुपये का बजट था, लेकिन वास्तविक खर्च कितना हुआ, यह विचार करने का विषय है. कुल बजट में से मात्र लगभग 61,000 करोड़ रुपये ही खर्च किए गए, यानी सरकार के पास उपलब्ध पूरा फंड भी जनता के हित में खर्च नहीं किया गया.
उन्होंने कहा कि यदि जनता के हित में कैपिटल एक्सपेंडिचर किया जाता तो सड़कें बन सकती थीं, फ्लाईओवर बन सकते थे, स्कूल खुल सकते थे और अन्य आवश्यक विकास कार्य किए जा सकते थे. लेकिन पिछली सरकार का ध्यान इस पर नहीं था. उनका उद्देश्य यह था कि घोटाला कहां से हो सकता है, पैसे का गबन कैसे किया जा सकता है और बिना काम किए भी बड़ी-बड़ी तस्वीरें लगाकर जनता को कैसे भ्रमित किया जा सकता है. लगभग 81,000 करोड़ रुपये के बजट में से करीब 20,000 करोड़ रुपये की राशि खर्च नहीं की गई, यानी जनता के लिए उपलब्ध धन का बड़ा हिस्सा उपयोग में ही नहीं लाया गया.
दिल्ली लक्ष्मी योजना पर भी हर साल बजट रखा, लेकिन खर्च नहीं किया
मुख्यमंत्री ने दिल्ली लक्ष्मी योजना का उदाहरण देते हुए कहा कि जिस योजना को वर्तमान सरकार ने पांच साल के भीतर लागू करने का संकल्प लिया और आज दिल्ली की महिलाओं को उसका लाभ मिलने की स्थिति आ गई है, उसके लिए पिछली सरकार भी हर साल बजट में फंड रखती थी. लेकिन उस फंड का उपयोग नहीं किया गया. हर साल महिलाओं से वादा किया जाता था कि योजना लागू की जाएगी और उन्हें पैसे दिए जाएंगे, लेकिन चुनाव का समय आते ही फिर नए वादे किए जाते थे. मुख्यमंत्री ने कहा कि वादा लगातार किया गया, लेकिन उसे जमीन पर उतारने का काम नहीं हुआ.
जीएसटी रिफंड में भी पिछली सरकार ने जनता को इंतजार कराया
मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने कहा कि जनता के पैसे से जुड़े जीएसटी रिफंड के मामले में भी पिछली सरकार का रवैया संतोषजनक नहीं था. उन्होंने आंकड़े देते हुए कहा कि वित्त वर्ष 2024-25 में जीएसटी रिफंड मात्र 695 करोड़ रुपये था. वर्तमान सरकार के आने के बाद वित्त वर्ष 2025-26 में 1,313 करोड़ रुपये का जीएसटी रिफंड दिया गया. वित्त वर्ष 2026-27 का अभी आधा वर्ष भी पूरा नहीं हुआ है, लेकिन वर्तमान सरकार अब तक 550 करोड़ रुपये का जीएसटी रिफंड कर चुकी है. वर्तमान सरकार का प्रयास है कि जनता का पैसा समयबद्ध तरीके से जनता तक वापस पहुंचे और लोगों को अपने ही पैसे के लिए इंतजार न करना पड़े.
पिछली सरकार में लगे ‘दीमक’ को हटाने के लिए ‘पेस्टिसाइड’ का छिड़काव किया गया
मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने विपक्ष के नेताओं का उल्लेख करते हुए कहा कि आज वे अलग-अलग मुद्दों पर सदन में जोर-जोर से सवाल उठा रहे हैं, लेकिन उन्हें यह भी देखना चाहिए कि जिन विभागों और क्षेत्रों में उनके कार्यकाल के दौरान जिम्मेदारी रही, वहां क्या हुआ और सीएजी रिपोर्ट्स ने क्या तथ्य सामने रखे हैं. पिछली सरकार के कार्यकाल में व्यवस्था में जो ‘दीमक’ लगी थी, वर्तमान सरकार उसे खत्म करने के लिए काम कर रही है. मुख्यमंत्री ने इसे उदाहरण के तौर पर समझाते हुए कहा कि वर्तमान सरकार ने सिस्टम में सुधार के लिए ‘पेस्टिसाइड’ का छिड़काव किया है और अब उसी प्रक्रिया में पिछली सरकार के समय की गड़बड़ियां सामने आ रही हैं. उन्होंने आरोप लगाया कि पिछली सरकार ने दस वर्षों में पूरे सिस्टम को नुकसान पहुंचाया और दिल्ली की जनता के साथ अन्याय किया.
बिजली कंपनियों की 38,000 करोड़ रुपये की रेगुलेटरी एसेट पर सवाल
मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने बिजली कंपनियों की रेगुलेटरी एसेट से जुड़े मामले का भी उल्लेख किया. उन्होंने कहा कि वर्ष 2014 के बाद बिजली के टैरिफ में वृद्धि नहीं हुई, जिसके कारण बिजली की खरीद और वितरण से होने वाली वास्तविक आय के बीच अंतर बढ़ता गया. यही अंतर धीरे-धीरे रेगुलेटरी एसेट के रूप में जमा होता गया. मुख्यमंत्री ने बताया कि वर्ष 2019-20 में यह रेगुलेटरी एसेट करीब 9,000 करोड़ रुपये थी. इसके बाद यह बढ़कर 27,200 करोड़ रुपये हो गई और वर्तमान में यह अंतर लगभग 38,000 करोड़ रुपये तक पहुंच चुका है. उन्होंने स्पष्ट किया कि यह वह बड़ा वित्तीय अंतर है जो बिजली कंपनियों द्वारा बिजली खरीदने की लागत और उपभोक्ताओं को बिजली देने के बाद प्राप्त राजस्व के बीच बना है. आने वाले समय में बिजली कंपनियां इस 38,000 करोड़ रुपये के बोझ को दिल्ली की जनता पर डालने की कोशिश कर सकती हैं, लेकिन वर्तमान दिल्ली सरकार ऐसा नहीं होने देगी. वर्तमान सरकार इस मामले में मजबूती से खड़ी है और कोर्ट में लड़ाई लड़ रही है.
530 करोड़ रुपये के 45 टेंडर एक ही पैन कार्ड से
मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने टेंडर प्रक्रिया में सामने आई अनियमितताओं का उल्लेख करते हुए कहा कि 530 करोड़ रुपये की कुल राशि के 45 टेंडर एक ही पैन कार्ड से किए गए. उन्होंने सवाल उठाया कि इतनी बड़ी राशि से जुड़े 45 टेंडर एक ही पैन कार्ड के माध्यम से कैसे हो सकते हैं और इस पूरी प्रक्रिया की निगरानी किस स्तर पर की गई. मुख्यमंत्री ने कहा कि वर्तमान सरकार ऐसी व्यवस्थाओं को समाप्त करने के लिए लगातार प्रशासनिक सुधार कर रही है और सरकारी खरीद प्रक्रिया को अधिक पारदर्शी एवं जवाबदेह बनाया जा रहा है.
डेढ़ साल में व्यवस्था सुधारने के लिए बड़े प्रशासनिक फैसले
मुख्यमंत्री ने कहा कि उनकी सरकार ने मात्र डेढ़ वर्ष के कार्यकाल में व्यवस्था में सुधार के लिए कई महत्वपूर्ण कदम उठाए हैं. मुख्यमंत्री ने कहा कि स्वास्थ्य क्षेत्र में दवाइयों की खरीद-फरोख्त से जुड़े मामलों में सरकार ने रिपोर्ट सामने आने के बाद तत्काल कार्रवाई की. प्रोक्योरमेंट सेल से 40 अधिकारियों का एक ही दिन में ट्रांसफर किया गया तथा तीन अधिकारियों को सस्पेंड किया गया. उन्होंने कहा कि इन तीनों अधिकारियों के निलंबन के बाद करीब 60 दिन बीत चुके हैं और वे अभी भी जेल में हैं. वर्तमान सरकार की नीति स्पष्ट है कि जहां भी गड़बड़ी सामने आएगी, वहां सरकार स्वयं कार्रवाई करेगी.
मुख्यमंत्री ने विधानसभा अध्यक्ष से आग्रह किया कि सदन के पटल पर रखी गई सीएजी रिपोर्ट्स और उन पर सदस्यों द्वारा व्यक्त किए गए विचारों का संज्ञान लेकर आगे की कार्रवाई को गति दी जाए, ताकि दिल्ली की जनता के साथ अन्याय करने और सरकारी धन के दुरुपयोग के लिए जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कानून के अनुसार कार्रवाई हो सके. उन्होंने कहा कि वर्तमान दिल्ली सरकार पारदर्शिता, जवाबदेही और सुशासन के सिद्धांत पर काम कर रही है और सरकारी व्यवस्था में ऐसी कोई गुंजाइश नहीं छोड़ी जाएगी, जहां जनता के पैसे या अधिकारों के साथ किसी भी प्रकार की अनियमितता हो.

