
नई दिल्ली। राजधानी में पहचान और केवाईसी दस्तावेजों के दुरुपयोग का एक हैरान करने वाला मामला सामने आया है। नई दिल्ली के एक व्यक्ति के पैन और पहचान संबंधी दस्तावेजों का इस्तेमाल कर महाराष्ट्र में जीएसटी पंजीकरण कराया गया और उसके नाम से करीब 79.4 करोड़ रुपये की आउटवर्ड सप्लाई दर्शा दी गई।
खास बात यह है कि शिकायतकर्ता को इस कारोबार की जानकारी तब हुई, जब वह वित्त वर्ष 2025-26 का आयकर रिटर्न तैयार करने के दौरान अपना एनुअल इंफार्मेशन स्टेटमेंट (एआइएस) देख रहे थे। मामले में दिल्ली पुलिस की आर्थिक अपराध शाखा ने एफआइआर दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।
जीएसटी पोर्टल पर फर्जी पंजीकरण
शिकायतकर्ता के मुताबिक, उसने महाराष्ट्र में कभी कोई कारोबार शुरू नहीं किया और न ही किसी व्यक्ति को अपने पैन, फोटो, पता, मोबाइल नंबर, ईमेल क्रेडेंशियल या अन्य केवाईसी दस्तावेजों का इस्तेमाल करने की अनुमति दी।
जीएसटी रिकार्ड में कारोबार का पता मुंबई का दर्ज है। उसका कहना है कि वह न तो उस जगह का मालिक रहा और न ही उसने उसे किराये पर लेकर वहां कोई व्यवसाय किया।
जांच में सामने आए जीएसटी पोर्टल के रिकार्ड के मुताबिक, संबंधित जीएसटीइन का स्टेटस ‘कैंसिल्ड सुओ-मोटो’ है। पंजीकरण बीते वर्ष 17 अगस्त को हुआ था और इसी तारीख से उसका कैंसिलेशन प्रभावी दिख रहा है।
रिकार्ड में आधार प्रमाणीकरण और ई-केवाईसी वेरिफिकेशन भी नहीं हुआ था। शिकायतकर्ता ने पुलिस को बताया कि उसने इस पंजीकरण के लिए किसी तरह का ओटीपी, आधार प्रमाणीकरण अनुरोध, ईमेल वेरिफिकेशन, ईवीसी या डिजिटल सिग्नेचर क्रेडेंशियल प्राप्त या साझा नहीं किया।
संबंधित जीएसटी रजिस्ट्रेशन से जुड़े आयकर डेटा में करीब 79.4 करोड़ रुपये का सालाना टर्नओवर और आउटवर्ड सप्लाई दर्ज है। एआइएस में इसी जीएसटीइन के तहत विभिन्न सप्लायर और प्रतिपक्ष से जुड़ी खरीद संबंधी जानकारी भी दिखाई दी है।
शिकायतकर्ता ने इन सभी लेनदेन से किसी भी तरह का संबंध होने से इनकार किया है। उसने कहा कि उसने न कोई सामान या सेवा बेची, न कोई बिल जारी किया और न ही इन लेनदेन से कोई भुगतान या वित्तीय लाभ प्राप्त किया।
धोखाधड़ी की जांच और वित्तीय ट्रेल
ईआडब्ल्यू अब यह पता लगाने में जुटी है कि शिकायतकर्ता की पहचान का इस्तेमाल कर जीएसटी पंजीकरण किसने कराया, इसके पीछे कौन लोग थे और इस कारोबार को कौन संचालित कर रहा था।
पुलिस यह भी पता लगा रही है कि जीएसटी रिटर्न किसने दाखिल किए, लेनदेन में शामिल दूसरी कंपनियां या व्यक्ति कौन थे और 79.4 करोड़ रुपये के कारोबार से जुड़े पैसों का वास्तविक वित्तीय ट्रेल कहां तक जाता है।
