नोएडा में 5 लाख की रिश्वत लेते धरा गया PSU का अफसर, CBI की दिल्ली-NCR में ताबड़तोड़ छापेमारी!

News Desk
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नोएडा: केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (CBI) ने भ्रष्टाचार के खिलाफ बड़ी कार्रवाई करते हुए कर्नाटक एंटीबायोटिक्स एंड फार्मास्यूटिकल्स लिमिटेड (KAPL) के मैनेजिंग डायरेक्टर अनुराग दनायक को 5 लाख रुपये की रिश्वत लेते हुए रंगे हाथ गिरफ्तार किया है। आरोप है कि उन्होंने भोपाल की एक अधिकृत सर्विस एजेंट फर्म से कुल 15 लाख रुपये की रिश्वत की मांग की थी। सीबीआई ने जाल बिछाकर उन्हें नोएडा में रिश्वत लेते हुए दबोच लिया। इसके बाद बेंगलुरु, नोएडा और जबलपुर स्थित ठिकानों पर छापेमारी में भारी मात्रा में नकदी, विदेशी मुद्रा, सोना और संपत्ति से जुड़े दस्तावेज बरामद किए गए।
15 लाख की रिश्वत की थी मांग

सीबीआई के अनुसार, आरोपी मैनेजिंग डायरेक्टर ने भोपाल स्थित एक फर्म से 15 लाख रुपये की अवैध मांग की थी। यह फर्म KAPL की अधिकृत सर्विस एजेंट है और मध्य प्रदेश के सरकारी संस्थानों को दवाइयों की आपूर्ति करती है।

जांच में सामने आया कि रिश्वत की मांग सर्विस एजेंट एग्रीमेंट को मंजूरी देने, अतिरिक्त सरकारी संस्थानों का आवंटन करने, लंबित नवीनीकरण को स्वीकृति देने और दवाओं की बिक्री पर मिलने वाले कमीशन में हिस्सा लेने के बदले की गई थी।

5 लाख लेते ही CBI ने दबोचा

बुधवार को रिश्वत के लेन-देन की सूचना मिलने के बाद सीबीआई ने नोएडा में ट्रैप बिछाया। जैसे ही आरोपी ने 5 लाख रुपये की पहली किस्त स्वीकार की, सीबीआई की टीम ने उसे मौके पर ही गिरफ्तार कर लिया।

सीबीआई प्रवक्ता के मुताबिक आरोपी को रिश्वत लेते हुए रंगे हाथ पकड़ा गया, जिसके बाद उसके ठिकानों पर एक साथ छापेमारी की गई।

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छापों में मिला कैश, विदेशी मुद्रा और सोना

गिरफ्तारी के बाद सीबीआई ने बेंगलुरु, नोएडा और जबलपुर स्थित आरोपी के घर और कार्यालयों की तलाशी ली। इस दौरान जांच एजेंसी को बड़ी मात्रा में संपत्ति मिली। बरामदगी में शामिल हैं:

  • करीब 75 लाख रुपये नकद
  • लगभग 4 लाख रुपये की विदेशी मुद्रा
  • 697 ग्राम सोने के गहने और सिक्के, जिनकी अनुमानित कीमत करीब 86 लाख रुपये है।
  • रिहायशी फ्लैट और अन्य संपत्तियों से जुड़े दस्तावेज

सीबीआई अब आरोपी की आय के स्रोत, संपत्तियों और रिश्वतखोरी के पूरे नेटवर्क की जांच कर रही है।

कमीशन के बदले मांगा था हिस्सा

सीबीआई के मुताबिक आरोपी पर आरोप है कि उसने सरकारी संस्थानों में दवाओं की आपूर्ति से मिलने वाले कमीशन में हिस्सा मांगते हुए रिश्वत की मांग की थी। फिलहाल एजेंसी इस पूरे मामले में अन्य संभावित आरोपियों और वित्तीय लेन-देन की भी जांच कर रही है।

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