नई दिल्ली। निर्माणाधीन इमारत को गिराने की धमकी देकर एक ठेकेदार से दो लाख की रिश्वत मामले में आरोपित एमसीडी के अवर अभियंता नवदीप खत्री को अग्रिम जमानत देने से दिल्ली हाई कोर्ट ने इन्कार कर दिया है।
न्यायमूर्ति सौरभ बनर्जी की पीठ ने कहा कि याचिकाकर्ता को प्राथमिकी के बारे में जानकारी मिलने पर भी वह जांच में नहीं शामिल हुआ और सह-आरोपित के पांच मई 2026 को गिरफ्तार किए गए जाने के बाद से फरार है।
इतना ही नहीं ट्रायल कोर्ट द्वारा उसे घोषित अपराधी करार दिए जाने से पहले उसके खिलाफ दो गैर-जमानती वारंट जारी किए जा चुके थे। उक्त तथ्यों को देखते हुए इस बात को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता कि आरोपित एक लोक सेवक है और अहम पद पर है। ऐसे में उसे अग्रिम जमानत नहीं दी जा सकती है।
तथ्यों को संपूर्ण परिस्थितियों को देखते हुए अग्रिम जमानत याचिका खारिज की जाती है।
गुरबख्श सिंह सिब्बिया बनाम पंजाब सरकार के एक मामले में सुप्रीम कोर्ट के निर्णय का हवाला देते हुए पीठ ने कहा कि गिरफ्तारी से पहले जांच में सहयोग न करने वाले आरोपित के पक्ष में अग्रिम जमानत का मामला नहीं बनता है। शीर्ष अदालत ने कहा था कि ऐसी स्थिति में अग्रिम जमानत देते समय अधिक सावधानी बरतनी चाहिए।
अदालत ने यह भी रिकार्ड पर लिया कि शिकायतकर्ता को 12 मई 2026 से याचिकाकर्ता व उसके सहयोगियों के माध्यम से धमकी मिल रही है। ऐसे में यह आरोपित याचिकाकार्ता को अग्रिम जमानत देने से इन्कार करने का अहम तथ्य है।
इमारत ध्वस्त करने की धमकी दी
प्राथमिकी के अनुसार जीबी रोड के पास एक निर्माणाधीन इमारत के लिए सह-आरोपित लाेकेश ने अवर अभियंता नवदीप खत्री के नाम पर ठेकेदार से दो लाख रुपये की रिश्वत मांगी थी और धमकी दी थी कि अगर वह उक्त धनराशि नहीं देगा तो अवर अभियंता नवदीप खत्री उसकी इमारत को ध्वस्त करवा देंगे।
इस संबंध में मिली 30 अप्रैल को मिली शिकायत पर सीबीआइ जांच शुरू की थी और पांच मई को सीबीआइ ने दो लाख रुपये की रिश्वत लेते हुए सह-आरोपित लोकेश व लवकेश को पांच मई को गिरफ्तार किया गया था।
जांच में शामिल नहीं होने पर ट्रायल कोर्ट ने याचिकाकर्ता अवर अभियंता के खिलाफ छह जून व एक जुलाई को गैर जमानती वारंट जारी किया था।

