गाजियाबाद में मोबाइल टावर उपकरण चोरी गिरोह का भंडाफोड़, 3 गिरफ्तार

News Desk
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गाजियाबाद। पुलिस ने मोबाइल टावरों से करोड़ों रुपये के महंगे इलेक्ट्रानिक उपकरण रिमोट रेडियो यूनिट (आरआरयू) व बेसबैंड यूनिट (बीबीयू) चोरी कर थाईलैंड व हांगकांग भेजने वाले अंतरराज्यीय गिरोह के तीन गुर्गों को गिरफ्तार किया है। इनके पास से एक करोड़ रुपये मूल्य के 27 चोरी किए गए उपकरण बरामद हुए हैं। आरोपित बीएमडब्ल्यू कार से चोरी की वारदातों को अंजाम देते थे। वे समुद्र के रास्ते उपकरण विदेश भेजते थे।

पकड़े गए आरोपित जावेद मीरपुरिया के गिरोह से जुड़े हैं। पूर्व में गिरोह का सरगना जावेद मीरपुरिया दुबई में बैठकर इस गिरोह का संचालन करता था। पुलिस अब इस अंतरराष्ट्रीय नेटवर्क तथा विदेश सामान भेजने वाले अन्य लोगों की तलाश में जुटी है।

पकड़े गए आरोपितों में एक नगर निगम का सफाईकर्मी भी है। अतिरिक्त पुलिस आयुक्त राज करन नय्यर ने बताया कि स्वाट टीम, अपराध शाखा और थाना ट्रोनिका सिटी पुलिस ने संयुक्त कार्रवाई कर तीनों आरोपितों को ट्रोनिका सिटी क्षेत्र में मोबाइल टावर से आरआरयू चोरी करते समय गिरफ्तार किया। आरोपितों की पहचान अदनान उर्फ अर्जुन, आमिर और सौरभ के रूप में हुई है।

पुलिस के मुताबिक, गिरोह गाजियाबाद, दिल्ली-एनसीआर, हरियाणा, पंजाब, राजस्थान, बिहार, बंगाल, महाराष्ट्र व मध्य प्रदेश समेत कई राज्यों में मोबाइल टावरों को निशाना बनाता था। आरोपितों की निशानदेही पर करीब एक करोड़ रुपये मूल्य के चोरी किए उपकरण बरामद हुए हैं। इनमें 20 आरआरयू, सात बीबीयू, एक रेडियो रिसीवर यूनिट खोलने की मशीन और एक बीएमडब्ल्यू कार शामिल है।

इसलिए विदेश भेजे जाते थे उपकरण 

पुलिस पूछताछ में आरोपित अदनान उर्फ अर्जुन ने बताया कि चोरी आरआरयू व बीबीयू जैसे उपकरण पहले गिरोह से जुड़े सोनू, शहनवाज व जावेद को बेचे जाते थे। इसके बाद यह सामान थाईलैंड व हांगकांग भेजा जाता था। पुलिस का कहना है कि विदेशों में इन उपकरणों की मांग व कीमत अधिक होने से तस्करी कर बड़ा मुनाफा कमाया जाता था।

कौन है गिरोह का सरगना 

वर्ष 2024 में पुलिस ने इस गिरोह से जुड़े 40 से अधिक लोगों को गिरफ्तार किया था। तब पता चला था कि इस गिरोह का सरगना जावेद मीरपुरिया है। वह दुबई में बैठकर गिरोह चला रहा था। जब वह दुबई से लौटा तो दिल्ली पुलिस ने उसे गिरफ्तार कर लिया था। बाद में जमानत मिलने के बाद से वह फरार है। अब फिर से यह गिरोह सक्रिय है। पुलिस जावेद की तलाश में जुटी है।

जेल में बनी योजना, फिर शुरू की चोरी

पूछताछ में आमिर ने बताया कि वह 10वीं पास है। पहले स्क्रैप का काम करता था। वर्ष 2023 में भूमि विवाद में हत्या के मामले में वह जेल गया था। जेल में उसकी मुलाकात फरीदनगर, भोजपुर के अनस से हुई। उसने आमिर को मोबाइल टावरों से आरआरयू व बीबीयू जैसे महंगे उपकरण चोरी कर बेचने के फायदे बताए। जेल से बाहर आने के बाद उसने इस धंधे में कदम रखा।

इसके बाद उसकी मुलाकात अदनान उर्फ अर्जुन से हुई। दोनों ने मिलकर मोबाइल टावरों से उपकरण चोरी करना शुरू कर दिया। आमिर ने बताया कि उसे प्रत्येक उपकरण के बदले 70 से 80 हजार रुपये मिलते थे, जबकि इनकी वास्तविक कीमत पांच से 10 लाख रुपये होती है।

आरोपित अदनान उर्फ अर्जुन ने बताया कि वह 12वीं तक पढ़ा है और मूल रूप से मुजफ्फरनगर का रहने वाला है। पिता की मृत्यु के बाद वह फरीदाबाद में एक स्क्रैप की दुकान पर काम करने लगा। वर्ष 2025 में उसकी मुलाकात आमिर से हुई।

इसके बाद उसने चोरी किए गए उपकरणों की खरीद-फरोख्त शुरू कर दी। तीसरे आरोपित सौरभ ने बताया कि वह 10वीं पास है और गाजियाबाद नगर निगम में सफाईकर्मी है। वह अपने साथियों के साथ टावरों से उपकरण चोरी कर आमिर को देने लगा। इसके बदले उसे हर उपकरण पर 20 से 30 हजार रुपये मिलते थे।

क्या होता है बीबीयू और आरआरयू बीबीयू मोबाइल टावर का सबसे अहम हिस्सा होता है, जो सिग्नल प्रोसेसिंग का काम करता है। इसकी कीमत पांच से 10 लाख रुपये होती है। वहीं, आरआरयू एंटीना व बीबीयू के बीच संपर्क स्थापित करती है। इसकी कीमत डेढ़ से दो लाख रुपये तक होती है।

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