
नोएडा: दिल्ली से पूर्वांचल और बिहार तक एक्सप्रेसवे पर दौड़ रही स्लीपर बसें यात्रियों की सुरक्षा के साथ खिलवाड़ का जरिया बनती जा रही हैं। बसों में यात्रियों के सामान के साथ बड़े पैमाने पर बिना बिल का माल भी ढोया जा रहा है। इससे एक ओर जीएसटी चोरी हो रही है, वहीं दूसरी ओर ओवरलोडिंग से हादसे का खतरा बढ़ रहा है।
परिवहन विभाग की निगरानी व्यवस्था पर लगातार सवाल उठने के बावजूद बसों में सामान की अवैध ढुलाई पर प्रभावी रोक नहीं लग सकी हैं। सवाल है कि ओवरलोड और अवैध सामान ढोने वाली बसें बार-बार सड़कों पर कैसे लौट आती हैं? क्या परिवहन विभाग हादसे के बाद ही जागेगा या यात्रियों की सुरक्षा के लिए पहले से प्रभावी निगरानी व्यवस्था लागू होगी?
स्लीपर बस में लदा था अतिरिक्त माल
23 सितंबर को देर रात जिस स्लीपर बस में आग लगने से 9 यात्रियों की मौत हुई, उसमें भी यात्रियों के सामान के अलावा अतिरिक्त माल लदा होने की बात सामने आई है। इस बस का ओवरलोड को लेकर पहले भी कई बार चालान हो चुका था। इसके बावजूद बस सड़क पर दौड़ती रही। हादसे के बाद सवाल उठ रहा है कि यदि बस पहले से जांच के दायरे में थी तो परिवहन विभाग ने उसके संचालन पर रोक क्यों नहीं लगाई?
जीएसटी विभाग के अलर्ट के बावजूद लापरवाही
यमुना एक्सप्रेसवे पर स्लीपर बसों के निरीक्षण के दौरान जीएसटी विभाग को इनमें सामान ढोने के मामले मिले है। विभाग ने परिवहन विभाग की एआरटीओ टीम को बसों पर लगे कैरियर हटाने और ओवरलोड लगेज की जांच करने का सुझाव दिया है। इसके बावजूद बसों की नियमित जांच, यात्रियों की सुरक्षा और सामान की निगरानी को लेकर ठोस कार्रवाई नजर नहीं आ रही है। स्लीपर बसों में सुरक्षा से जुड़े कई गंभीर मामले सामने आए हैं।
नाबालिग के साथ भी हुआ था दुष्कर्म
एक नाबालिग से दुष्कर्म के मामले के बाद बस में आग लगने की घटना ने इन बसों के संचालन, चालक-परिचालक की जिम्मेदारी और निगरानी व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं। अब जीएसटी विभाग की कार्रवाई से यह भी सामने आया है कि बसों का इस्तेमाल यात्रियों के साथ-साथ बिना बिल वाले माल की ढुलाई के लिए किया जा रहा है।
जीएसटी विभाग की कार्रवाई में पकड़ी गई बड़ी चोरी
जीएसटी विभाग की जांच में सामने आया है कि दिल्ली से बिहार तक जाने वाली बसों के जरिए बड़ी मात्रा में कीमती सामान बिना उचित जीएसटी भुगतान के ले जाया जा रहा है। इससे विभाग को काफी नुकसान हो रहा है। जीएसटी विभाग के जॉइंट कमिश्नर कुशवाहा के अनुसार, वित्तीय वर्ष 2024-25 में 120 बसों की जांच की गई थी। इनमें जीएसटी नियमों के उल्लंघन के मामले मिलने पर करीब 75 लाख रुपये की पेनल्टी लगाई गई।
98 बसों की जांच में 1.67 करोड़ रुपये की पेनल्टी
वित्तीय वर्ष 2025-26 में 98 बसों की जांच में करीब 1.67 करोड़ रुपये की पेनल्टी लगाई गई। विभाग के आकड़ों के मुताबिक, अप्रैल 2026 से अगस्त 2026 तक 21 स्लीपर बसो की जांच की गई। इनमें अनियमितताएं मिलने पर 26.42 लाख रुपये की पेनल्टी लगाई गई।
