
बिलासपुर। बिलासपुर क्षेत्र में 116.49 लाख रुपये की लागत से बने नाले का स्लैब निर्माण के मात्र 80 दिन बाद ही दो बार वर्षा में ध्वस्त हो चुका है। इससे ग्रामीणों में भारी आक्रोश है। कस्बा के ग्रामीणों ने नवनिर्मित नाले की निर्माण सामग्री की गुणवत्ता पर सवाल उठाते हुए टूटे स्लैब की तत्काल मरम्मत की मांग की है।
ग्रामीणों का कहना है कि वर्षों से दनकौर-सिकंद्राबाद मुख्य मार्ग पर जलभराव की समस्या थी। नाले से उम्मीद थी कि पानी निकासी सुधरेगी, लेकिन निर्माण के कुछ दिन बाद ही स्लैब टूट गया। आरोप है कि शुरू से ही घटिया सामग्री का इस्तेमाल हुआ।
कम सीमेंट और काले बालू से निर्माण किया गया। पहली बार स्लैब टूटने पर भी अधिकारियों ने कोई ठोस कदम नहीं उठाया। अब दोबारा स्लैब ध्वस्त होने से सरकारी धन के दुरुपयोग पर सवाल उठ रहे हैं। ग्रामीण मुकीम अली ने कहा कि समय पर गुणवत्ता जांच होती तो यह नौबत नहीं आती।
एक जुलाई से स्कूल खुलने पर बच्चों के नाले में गिरने की आशंका है। राकेश भाटी ने भौतिक सत्यापन और तकनीकी जांच कर दोषियों पर कार्रवाई की मांग की। उनका कहना है कि नियमों को ताक पर रखकर अनियमितता बरती गई। 80 दिन में दो बार स्लैब टूटना मानकविहीन निर्माण को दर्शाता है।
इस पर नगर पंचायत बिलासपुर की अध्यक्ष लता सिंह ने बताया कि नाले की खुदाई के बाद मिट्टी उठाते समय जेसीबी मशीन से स्लैब टूट गया था। जल्द मरम्मत कराई जाएगी। दोषी पाए जाने पर कार्रवाई होगी और भरपाई ठेकेदार से कराई जाएगी।
