
दादरी के बहुचर्चित मुकेश शर्मा हत्याकांड में 13 साल बाद अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश आशीष कुमार चौरसिया की अदालत ने आरोपी दादरी निवासी सुरेश उर्फ टीटू और बुलंदशहर निवासी सुभाष शर्मा को हत्या का दोषी करार दिया। दोनों को आजीवन कारावास और 50-50 हजार रुपये के अर्थदंड की सजा सुनाई गई। जुर्माना न देने पर दोनों को छह-छह माह की अतिरिक्त कैद भुगतनी होगी। तीसरे आरोपी कपिल कुमार को संदेह का लाभ देते हुए बरी कर दिया गया।
अभियोजन के अनुसार 2 जून 2013 को दोपहर करीब तीन बजे दो लोग दादरी के ब्रह्मपुरी निवासी मुकेश शर्मा (38 वर्ष) को घर से बुलाकर ले गए थे। इसके बाद वह घर नहीं लौटे। मुकेश अपने भाई की सेंट्रो कार भी साथ ले गए थे। 3 जून की शाम करीब पौने आठ बजे उनका शव रामा सिनेमा के पीछे श्मशान घाट में क्षत-विक्षत हालत में मिला था। भाई अशोक कुमार शर्मा की तहरीर पर थाना दादरी में हत्या का मुकदमा दर्ज हुआ था। पुलिस ने विनय, सुरेश उर्फ टीटू, सुभाष शर्मा और कपिल कुमार को गिरफ्तार कर आरोप पत्र दाखिल किया था। कपिल के खिलाफ चाकू की बरामदगी पर आयुध अधिनियम की धारा का अलग मुकदमा भी चला। सुनवाई के दौरान आरोपी विनय की मृत्यु हो गई, जिसके बाद 14 जनवरी 2025 को उसके खिलाफ कार्यवाही समाप्त कर दी गई।
लास्ट सीन की गवाही बनी निर्णायक
अभियोजन ने 10 गवाह पेश किए। अदालत ने मृतक की बेटी दीपाली शर्मा उर्फ दीपू की गवाही को सबसे अहम माना। उसने बताया कि 2 जून 2013 की शाम सुभाष और सुरेश उसके पिता को बुलाने घर आए और उन्हें अपने साथ ले गए। अदालत ने कहा कि प्रतिपरीक्षा में बचाव पक्ष इस मूल तथ्य को नहीं डिगा सका। अदालत के अनुसार मृतक को आखिरी बार इन्हीं दोनों के साथ देखा गया, जबकि अगले दिन उसका शव बरामद हुआ। बचाव पक्ष ने तर्क दिया कि बेटी ने पुलिस को दिए बयान (धारा 161) में यह बात नहीं कही थी। हालांकि अदालत ने इसे खारिज कर दिया। प्रतिपरीक्षा में गवाह ने कहा कि उसने यह बात पुलिस को बताई थी। पर विवेचक ने दर्ज नहीं की।
पोस्टमॉर्टम से टूटा दुर्घटना का तर्कः
पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट के अनुसार मृतक के सिर, गर्दन और छाती पर तीन फटे हुए गहरे घाव थे। मृत्यु का कारण चोटों से हुआ शॉक और रक्तस्राव बताया गया। मृत्यु पोस्टमार्टम से करीब डेढ़ से दो दिन पहले हुई मानी गई, जो गवाही में बताए गए समय से मेल खाता है। जबकि बचाव पक्ष ने कार दुर्घटना और अत्यधिक शराब सेवन का तर्क दिया था। डॉक्टर ने प्रतिपरीक्षा में कहा कि माथे की चोट दुर्घटना से संभव हो सकती है। पर गर्दन और छाती की चोटें किसी धारदार हथियार से ही आ सकती हैं और वही मृत्यु का कारण थीं। रिपोर्ट के अनुसार मृतक के पेट में शराब भी नहीं मिली।
एडीजीसी अपराध नितिन कुनार त्यागी ने बताया कि अदालत ने दुर्घटना की दलील को निराधार माना। मामला परिस्थितिजन्य साक्ष्यों पर आधारित था। अदालत ने कहा कि कपिल मृतक को बुलाने नहीं गया था और किसी चश्मदीद ने उसकी मौजूदगी की गवाही नहीं दी। चश्मदीद के रूप में पेश एक गवाह अदालत में अपने पुलिस बयान से मुकर गया। केवल सह-आरोपी की संस्वीकृति और पुलिस अभिरक्षा में हुई स्वीकारोक्ति पर सजा नहीं दी जा सकती। अदालत ने कपिल को हत्या, साक्ष्य मिटाने और आयुध अधिनियम, तीनों आरोपों से दोषमुक्त किया। वहीं सुरेश और सुभाष को दोषी करार दिया। बचाव पक्ष ने सुभाष शर्मा के वृद्ध और लकवाग्रस्त होने और सुरेश के टीबी का गंभीर रोगी होने का हवाला देकर कम से कम सजा मांगी। वहीं अभियोजन ने कठोरतम सजा की मांग की थी। अदालत ने दोनों आजीवन कारावास की सजा सुनाई।
