आकृति चौधरी को 5 महीने जेल में रखने पर 5 लाख मुआवजा, DM मेधा रूपम को HC का आदेश

News Desk
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इसी साल अप्रैल में नोएडा में मजदूर आंदोलन हुआ। मजदूर आंदोलन के दौरान कई सामाजिक कार्यकर्ताओं पर आंदोलन भड़काने के आरोपों में ऐक्शन हुआ, जिनमें से एक आकृति चौधरी पर एनएसए लगाकर जेल में डाल दिया गया था। अब इलाहाबाद हाई कोर्ट ने आकृति कि हिरासत को रद्द कर दिया और 5 महीने जेल में रहने के लिए मुआवजा देने का भी आदेश दिया है। सरकार ने आकृति पर एनएसए लगाते हुए कहा था कि उनके पास इस हिंसा में शामिल रहने के सबूत भी हैं। हालांकि, कोर्ट में वो साबित नहीं कर पाए।

इलाहाबाद हाई कोर्ट की अतुल श्रीधरन और अचल सचदेव की बेंच ने इस मामले पर सुनवाई करते हुए इस केस को मनगढ़ंत बताते हुए आकृति को तत्काल जेल से रिहा करने का आदेश दिया और नोएडा की डीएम मेधा रूपम को 5 महीने जेल में रखने के एवज में उन्हें 5 लाख रुपए का मुआजवा देने का आदेश भी दिया है। ये मुआवजा आकृति को दिया जाएगा।

क्या था मामला

इसी साल 10-18 अप्रैल के बीच नोएडा के कुछ इलाकों में मजदूरों ने प्रदर्शन किया था। मजदूरों की मांग की थी उनकी सैलरी बढ़ाई जाए। इस दौरान 13 अप्रैल को नोएडा में हिंसा फैल गई थी। हिंसा के आरोपों में आकृति के साथ ही कई सामाजिक कार्यकर्ताओं को हिरासत में लिया गया था। इस मामले पर सुनवाई के दौरान सरकार की तरफ से कहा गया कि आकृति 13 अप्रैल को हुई हिंसा को भड़काने वालों में शामिल थीं। जब कोर्ट ने इसका सबूत मांगा तो, वो नहीं मिल सका। इसके लिए सरकार ने समय मांगा। कोर्ट ने समय देने से इनकार कर दिया और आकृति को तत्काल रिहा करने का आदेश देते हुए, उन्हें 5 लाख रुपए का मुआवजा देने का आदेश भी दिया है।

सरकार ने कहा था- सबूत हैं

नोएडा हिंसा के एक महीने बाद राज्य सरकार ने आकृति पर राष्ट्रीय सुरक्षा कानून (NSA) लगा दिया था। सरकार ने आकृति पर आरोप लगाया था कि वो 13 अप्रैल को नोएडा में हुई हिंसा को भड़काने वालों में शामिल थीं। सरकार ने दावा करते हुए कहा था कि आकृति के इस हिंसा में शामिल होने के इलेक्ट्रॉनिक और वीडियोग्राफी के सबूत भी हैं।

इस मामले पर आकृति के वकील की तरफ से बताया गया कि 13 अप्रैल को हिंसा से पहले ही पुलिस ने उन्हें हिरासत में ले रखा था। ऐसे में हिंसा में शामिल होने या उसे भड़काने का कोई सवाल ही नहीं बनता है।

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