ग्रेटर नोएडा बस अग्निकांड: फॉरेंसिक जांच से सामने आएगी आग की असली वजह, ड्राइवर-कंडक्टर से होगा सीन रीक्रिएट

News Desk
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ग्रेटर नोएडा: यमुना एक्सप्रेसवे पर बस में आग लगने की असली वजह अब आगरा की फॉरेंसिक लैब की रिपोर्ट से साफ होगी। पुलिस ने बस से लिए गए अलग-अलग नमूने जांच के लिए आगरा स्थित लैब भेज दिए हैं। रिपोर्ट से यह पता लगाने की कोशिश होगी कि आग की शुरुआत आखिर किस हिस्से से हुई और इसका कारण इलेक्ट्रिक फॉल्ट था या कोई अन्य वजह। सूत्रों का दावा है कि बस में इलेक्ट्रिक वायरिंग अधिकृत सर्विस सेंटर के बजाय लोकल मिस्त्री से कराई गई थी।

फॉरेंसिक रिपोर्ट से खुलेगा राज

वहीं, ड्राइवर और कंडक्टर को घटनास्थल पर ले जाकर हादसे का पूरा घटनाक्रम दोहराया जाएगा। पुलिस यह जानने का प्रयास करेगी कि बस में सबसे पहले धुआं कहां से उठा, उस समय बस कितनी रफ्तार से चल रही थी, धुआं दिखाई देने के बाद बस कितनी दूरी तक चली और आखिर उसे कहां रोका गया। यात्रियों की ओर से धुआं या आग की सूचना कब दी गई।

फिटनेस और सर्विस रिकॉर्ड खंगाला जाएगा

पुलिस स्लीपर बस के संचालन से जुड़े दस्तावेजों के साथ उसके फिटनेस रिकॉर्ड की भी जांच कर रही है। बस की फिटनेस कब हुई, उसमें किन-किन कमियों को दूर किया गया और अगली फिटनेस कब होनी थी, इसका रिकॉर्ड देखा जाएगा।

शॉर्ट सर्किट से आग लगने की आशंका

जांच से जुड़े सूत्रों के अनुसार, बस को मॉडिफाई करने के दौरान उसकी पूरी इलेक्ट्रिक वायरिंग बदले जाने की बात सामने आई है। सूत्रों का दावा है कि यह काम किसी अधिकृत सर्विस सेंटर के बजाय लोकल मिस्त्री से कराया गया था। ऐसे में पुलिस अब यह पता लगाने में जुटी है कि वायरिंग में किस तरह का बदलाव किया गया था और इस्तेमाल किए गए तार और इलेक्ट्रिकल उपकरण मानकों के अनुरूप थे या नहीं। आशंका है कि वायरिंग में शॉर्ट सर्किट के कारण आग लगी हो सकती है। हालांकि इसकी पुष्टि फॉरेंसिक रिपोर्ट आने के बाद ही होगी।

यात्रियों को नहीं मिला निकलने का मौका

हादसे में जान गंवाने वाले यात्रियों में बड़ी संख्या उन लोगों की बताई जा रही है, जो बस की ऊपरी सीटों पर बैठे थे। आग तेजी से फैलने के कारण उन्हें नीचे उतरने और बस से बाहर निकलने का पर्याप्त मौका नहीं मिल सका। इसके साथ ही जेवर पुलिस ऐम्बुलेंस, फायर ब्रिगेड और अन्य मदद के मौके पर पहुंचने के समय का भी मिलान करेगी। हादसे की सूचना मिलने से लेकर राहत टीमों के पहुंचने तक कितना समय लगा, इसकी टाइमलाइन तैयार की जा रही है। सीसीटीवी, कॉल डिटेल और अन्य उपलब्ध साक्ष्यों से इस टाइमलाइन का मिलान किया जाएगा।

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