नई दिल्ली: काकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) और सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक द्वारा 20 जुलाई को जंतर-मंतर से देश की संसद तक ‘संसद मार्च’ करने का आह्वान किया गया था. हजारों की संख्या में युवा व अन्य लोग पहुंचे, लेकिन घंटों तक उन्हें संसद की ओर नहीं जाने दिया गया. घंटों की जद्दोजहद के बाद किसी तरह युवा पटेल चौक तक पहुंचे तो वहां पर दिल्ली पुलिस और अर्धसैनिक बलों ने आंसू गैस के गोले छोड़ने शुरू कर दिए. इससे पहले कई बार प्रदर्शन कर रहे लोगों पर लाठीचार्ज किया गया, जिसमें दर्जनों लोग घायल हो गए. आंसू गैस के गोले छोड़ने के बाद आंदोलनकारियों को वहां से भागना पड़ा, इस तरह दिल्ली पुलिस ने संसद मार्च को विफल कर दिया. पुलिस जंतर-मंतर को भी खाली कराने में जुटी हुई है.
सीजेपी ने एक महीने पहले शुरू किया था प्रदर्शन: नीट पेपर लीक के बाद केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे व शिक्षा व्यवस्था में सुधार समेत कई मांगों को लेकर सीजेपी ने एक महीने पहले जंतर-मंतर पर प्रदर्शन शुरू किया था. इसके बाद सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक ने 23 दिन पहले भूख हड़ताल शुरू कर दी और 20 जुलाई को उन्होंने संसद मार्च का आह्वान किया, जिसमें लोगों से जंतर-मंतर पहुंचकर देश की संसद तक पैदल मार्च करने की अपील की थी, क्योंकि 20 जुलाई से संसद का मानसून सत्र शुरू हो रहा था.
संसद मार्च सफल या विफल जानिए पूरी इनसाइड स्टोरी (ETV Bharat)18 जुलाई को इलाज के नाम पर वांगचुक को धरने से उठाया18 जुलाई की सुबह दिल्ली पुलिस ने भूख हड़ताल से तबीयत बिगड़ने का हवाला देकर जबरन जंतर-मंतर से सोनम वांगचुक को उठाकर सफदरजंग अस्पताल में भर्ती करा दिया. लेकिन सोनम वांगचुक अस्पताल में भी भूख हड़ताल पर हैं. दिल्ली पुलिस को उम्मीद थी कि सोनम वांगचुक को अस्पताल में भर्ती कराने से जंतर-मंतर पर भीड़ कम हो जाएगी और फिर इसे आसानी से खाली करा लिया जाएगा, लेकिन इसके विपरीत भीड़ कम होने की बजाय बढ़ने लगी.
संसद मार्च की रणनीति विफल करने में जुटी रही पुलिस
20 जुलाई को संसद मार्च में पूरी ताकत झोंकने की रणनीति के तहत देशभर से लोगों के पहुंचने का आह्वान किया गया. लेकिन प्रशासन व पुलिस ने इस प्रदर्शन को नाकाम करने के लिए पहले से ही एक मजबूत रणनीति तैयार की थी. आइए सिलसिलेवार तरीके से समझते हैं कि कैसे इस संसद मार्च की रणनीति को विफल करने के लिए प्रशासनिक तंत्र ने जमीन से लेकर डिजिटल स्पेस तक घेराबंदी की.
संसद मार्च में पहुंचने से पहले ही लोगों की घेराबंदी
20 जुलाई की सुबह से ही देश के अलग-अलग हिस्सों से युवा, छात्र व समर्थक ट्रेन, निजी बसों और सार्वजनिक परिवहन के जरिए दिल्ली पहुंचना शुरू हो गए थे. उत्तर प्रदेश, हरियाणा, पंजाब व राजस्थान जैसे पड़ोसी राज्यों से लोग जंतर-मंतर पर पहुंचने लगे. युवाओं का एक ही मकसद था – जंतर-मंतर पर एकत्र होकर सीधे संसद भवन की ओर रुख करना.
जंतर-मंतर के पास के सभी मेट्रो स्टेशनों को किया बंद
भीड़ को संसद मार्ग तक पहुंचने से रोकने के लिए पुलिस ने सबसे पहले सार्वजनिक परिवहन प्रणाली पर नियंत्रण किया. दिल्ली पुलिस की तरफ से जंतर-मंतर के आसपास के सभी मेट्रो स्टेशनों को बंद कर दिया गया, जिससे लोग जंतर-मंतर न पहुंच सकें. अन्य मेट्रो स्टेशनों से बाहर आकर लोग जंतर-मंतर की ओर आगे बढ़े तो दिल्ली पुलिस ने जगह-जगह बैरिकेडिंग करके उन्हें रोक दिया. लेकिन हजारों की संख्या में लोग रात से ही जंतर-मंतर पर मौजूद थे. बड़ी संख्या में लोग पुलिस की घेराबंदी से पहले ही पहुंच चुके थे.
जंतर-मंतर के आसपास इंटरनेट सेवाओं पर ब्रेक
दिल्ली पुलिस ने न सिर्फ भौतिक रूप से रास्ते रोके, बल्कि सूचनाओं के प्रवाह को रोकने के लिए डिजिटल तकनीक का भी सहारा लिया. जंतर-मंतर और लुटियंस दिल्ली के आसपास कई किलोमीटर के दायरे में मोबाइल इंटरनेट सेवाओं को जैमर के जरिए बाधित कर दिया गया. इंटरनेट न होने के कारण प्रदर्शनकारी आपस में तालमेल नहीं बना सके और न ही सोशल मीडिया के माध्यम से लाइव अपडेट या पुलिस की कार्रवाई के वीडियो साझा कर सके. हालांकि इसका असर सिर्फ प्रदर्शनकारियों पर ही नहीं, बल्कि आसपास के दफ्तरों में काम करने वाले लोगों, मीडियाकर्मियों व पुलिसकर्मियों पर भी देखने को मिला.
पुलिस ने प्रदर्शनकारियों पर जमकर भांजी लाठियां
जो युवा और अन्य प्रदर्शनकारी किसी तरह जंतर-मंतर तक पहुंचने में कामयाब रहे, उनके सामने बहुस्तरीय सुरक्षा घेरा था. संसद की तरफ कूच रोकने के लिए पुलिस ने जंतर-मंतर मार्ग पर एक-दो नहीं, बल्कि कई लेयर की लोहे की बैरिकेडिंग की थी. जैसे ही दोपहर में युवाओं का सब्र टूटा और नारेबाजी करते हुए भीड़ ने पहली बैरिकेडिंग को धक्का देकर आगे बढ़ने की कोशिश की, पुलिस तुरंत हरकत में आ गई.
प्रदर्शनकारियों को बलपूर्वक हिरासत में लिया
पहली बैरिकेडिंग को तोड़ते ही पुलिस ने लाठीचार्ज कर दर्जनों युवाओं, छात्र नेताओं और आगे चल रहे कार्यकर्ताओं को बलपूर्वक हिरासत में ले लिया.प्रदर्शनकारियों का मनोबल तोड़ने के लिए दिल्ली पुलिस लाउडस्पीकर के जरिए लगातार घोषणाएं करती रही कि क्षेत्र में धारा 144 लागू है, इसलिए जगह को जल्द से जल्द खाली कर दें. पुलिस ने स्पष्ट किया कि संसद मार्च की न तो कोई अनुमति मांगी गई है और न ही ऐसी कोई आधिकारिक अनुमति दी गई है.
खाकी के साथ अर्धसैनिक बलों का रहा पहरा
केवल दिल्ली पुलिस ही नहीं, बल्कि स्थिति को नियंत्रण में रखने के लिए जंतर-मंतर के आसपास के पूरे इलाके को छावनी में तब्दील कर दिया गया था. दिल्ली पुलिस के साथ अर्धसैनिक बलों की कई टुकड़ियों को अत्याधुनिक हथियारों, वाटर कैनन और आंसू गैस की गाड़ियों के साथ तैनात किया गया था, ताकि पुलिस स्थिति को काबू में रख सके.
पटेल चौक पर चले लाठी-डंडे और आंसू गैस के गोले
कई घंटों की जद्दोजहद और लाठीचार्ज में दर्जनों युवाओं के घायल होने के बाद दिल्ली पुलिस ने प्रदर्शनकारियों को पटेल चौक तक पहुंचने दिया. पटेल चौक से संसद मार्ग पर प्रदर्शनकारी आगे न बढ़ सकें, इसके लिए बैरिकेडिंग कर दी गई थी. यहां काफी समय तक प्रदर्शनकारी नारेबाजी करते रहे. कई बार लाठीचार्ज हुआ और लोग घायल भी हुए, लेकिन पीछे नहीं हटे. यहां तक कि बारिश में भी प्रदर्शनकारियों का मनोबल कम नहीं हुआ और वे संसद तक मार्च करने की जिद पर अड़े रहे.
संसद मार्च ने बता दिया की युवाओं के मुद्दे सियासत के केंद्र में
दोपहर 2:36 बजे दिल्ली पुलिस ने बारिश के बीच ही आंसू गैस के गोले छोड़ने शुरू कर दिए. इसके बाद प्रदर्शनकारियों ने भी पुलिस पर जूते, चप्पल, पानी की बोतलें व अन्य चीजें फेंकना शुरू कर दिया. दिल्ली पुलिस लगातार आंसू गैस के गोले छोड़कर प्रदर्शनकारियों को पीछे धकेलती रही. इससे भीड़ तितर-बितर हो गई. युवाओं की संसद मार्च की कोशिश को पुलिस की बहुस्तरीय रणनीति व प्रशासनिक सख्ती ने संसद के मुख्य द्वार तक पहुंचने से पहले ही पूरी तरह नाकाम कर दिया.
दिल्ली में जगह-जगह लगा जाम
युवाओं व प्रदर्शनकारियों पर लाठीचार्ज व आंसू गैस के गोले छोड़े जाने के बाद लोग इधर-उधर तितर-बितर हो गए. पटेल चौक की ओर आने वाले सभी रास्ते घंटों तक बंद रहे और यातायात को अन्य रास्तों पर डाइवर्ट किया गया. पुलिस की कार्रवाई के बाद भीड़ आसपास के चौराहों पर भी पहुंच गई. हजारों की संख्या में युवा सड़कों पर दिखे, जिससे लंबा जाम लग गया और लोग घंटों परेशान रहे. देर शाम तक दिल्ली ट्रैफिक पुलिस को यातायात सामान्य करने के लिए कड़ी जद्दोजहद करनी पड़ी.
दिल्ली पुलिस ने बयान जारी कर शांति की अपील की
दिल्ली पुलिस के अतिरिक्त पुलिस आयुक्त राजीव रंजन ने बयान जारी कर सभी प्रदर्शनकारियों से संयम बरतने और शांति व कानून-व्यवस्था बनाए रखने में पुलिस का सहयोग करने की अपील करती है. सभी प्रदर्शनकारियों से अनुरोध है कि वे शांतिपूर्ण ढंग से प्रदर्शन करें. किसी भी गैर-कानूनी या हिंसक गतिविधि में शामिल न हों और ड्यूटी पर तैनात पुलिसकर्मियों द्वारा दिए गए कानूनी निर्देशों का पालन करें.
पुलिस का सहयोग करने की अपील
जनता को सलाह दी जाती है कि वे किसी भी सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म के माध्यम से अफवाहों, गलत जानकारी या अपुष्ट जानकारी पर विश्वास न करें और न ही उन्हें फैलाएं. नागरिकों से अनुरोध है कि वे जानकारी के विश्वसनीय स्रोतों पर ही भरोसा करें और शांति, सद्भाव व कानून-व्यवस्था बनाए रखने में दिल्ली पुलिस का सहयोग करें.
भले ही कागजों पर और प्रशासन के लिहाज से यह ‘संसद मार्च’ विफल हो गया हो, लेकिन जिस तरह देश के कोने-कोने से युवा अपनी आवाज उठाने दिल्ली पहुंचे थे, उसने यह साबित कर दिया कि युवाओं के मुद्दे आज भी देश की सियासत के केंद्र में बने हुए. हैं.

