नई दिल्ली: दिल्ली की जीवनदायिनी और आस्था का प्रतीक यमुना नदी के कायाकल्प के लिए दिल्ली विकास प्राधिकरण (DDA) ने अब एक महत्वाकांक्षी पहल शुरू की है. उपराज्यपाल तरनजीत सिंह संधू के विजन के अनुरूप, DDA ने यमुना डायलॉग्स की शुरुआत की है, जिसका उद्देश्य यमुना के फ्लड प्लेन को न केवल प्रदूषण मुक्त बनाना है, बल्कि इसे एक टिकाऊ और जीवंत पारिस्थितिक गलियारे के रूप में विकसित करना है.
इस दिशा में पहला कदम उठाते हुए, DDA ने हाल ही में स्टेकहोल्डर कंसल्टेशन वर्कशॉप का आयोजन किया. यह कार्यशाला यमुना के पुनरुद्धार को केवल सरकारी फाइलों तक सीमित न रखकर, इसे दिल्ली के नागरिकों, पर्यावरणविदों और विशेषज्ञों की सामूहिक जिम्मेदारी बनाने की एक कोशिश है.
LG का जोर: जनता की भागीदारी ही असली समाधान
हाल ही में उपराज्यपाल तरनजीत सिंह संधू ने यमुना के डूब क्षेत्रों का दौरा किया था और वरिष्ठ अधिकारियों के साथ कई समीक्षा बैठकें की थीं. इन बैठकों में उन्होंने स्पष्ट किया था कि यमुना की सफाई और जीर्णोद्धार के लिए बहुआयामी दृष्टिकोण की आवश्यकता है. उपराज्यपाल का मानना है कि नदी के किनारे केवल निर्माण नहीं होना चाहिए, बल्कि ऐसी योजनाएं बननी चाहिए जो वहां के पारिस्थितिकी तंत्र के साथ तालमेल बिठा सकें. उन्होंने जोर दिया कि चूंकि ये क्षेत्र सार्वजनिक उपयोग के लिए खुले हैं, इसलिए इनके रखरखाव में जनभागीदारी और ग्लोबल बेस्ट प्रैक्टिसेज का समावेश अनिवार्य है.
‘दिल्ली यमुना कॉम्पैक्ट’ बनेगा रोडमैप ‘यमुना डायलॉग्स’ का उद्देश्य राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर के विशेषज्ञों को एक मंच पर लाना है. इस पहल के माध्यम से प्रकृति-आधारित समाधानों, पारिस्थितिक बुनियादी ढांचे के लिए नवीन वित्तपोषण और जलवायु लचीलेपन पर चर्चा की जाएगी. इस पूरी कवायद का मुख्य लक्ष्य ‘दिल्ली यमुना कॉम्पैक्ट’ तैयार करना है. यह एक विस्तृत रोडमैप होगा, जिसमें प्राथमिकताएं, कार्यान्वयन की रणनीतियां और समय-सीमा तय की जाएगी. इसके लिए दो बड़े संवाद सत्र सितंबर 2026 और जनवरी 2027 में आयोजित किए जाएंगे.
दो प्रमुख विषयों पर मंथन आयोजित पहली कार्यशाला में विशेषज्ञों, शहरी नियोजकों और नीति निर्माताओं ने दो मुख्य विषयों बाढ़ के अनुकूल योजना और घाट विकास पर गहन चर्चा की. विशेषज्ञों का मानना है कि बुनियादी ढांचा ऐसा होना चाहिए जो नदी के प्राकृतिक चक्र में बाधा न डाले. साथ ही, घाटों के ऐसे स्वरूप विकसित करने पर विचार किया जा रहा है जो पारिस्थितिक, सांस्कृतिक, मनोरंजक और धार्मिक जरूरतों को एक साथ पूरा कर सकें.
आने वाले हफ्तों में और तेज होगी प्रक्रिया
आने वाले हफ्तों में नेचर-बेस्ड सॉल्यूशंस, जल गुणवत्ता, ड्रेनेज, फाइनेंसिंग मॉडल और ‘गवर्नेंस’ जैसे विषयों पर और अधिक वर्कशॉप आयोजित की जाएंगी. DDA का स्पष्ट संदेश है कि यमुना का भविष्य विज्ञान-आधारित दृष्टिकोण और दिल्लीवासियों की आकांक्षाओं के तालमेल पर टिका होगा.

