नई दिल्ली। दिल्ली को 2027 तक पूरी तरह से ‘ड्रग्स मुक्त’ बनाने के लक्ष्य के साथ दिल्ली पुलिस ने मादक पदार्थों की तस्करी करने वालों के खिलाफ अभियान तेज कर दिया है। पुलिस की स्पेशल सेल, क्राइम ब्रांच, एंटी-नारकोटिक्स टास्क फोर्स तथा सभी 15 जिलों की पुलिस मादक पदार्थों के सिंडिकेट को खत्म करने में जुटी है। इसमें केंद्रीय एजेंसी नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो के साथ भी लगातार संयुक्त अभियान चलाए जा रहे हैं।
पुलिस के आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, मादक पदार्थों के खिलाफ चलाए जा रहे विशेष अभियान के तहत केस दर्ज करने और तस्करों की गिरफ्तारी में भारी बढ़ोतरी हुई है। पिछले साल जहां ड्रग्स तस्करों के खिलाफ 2154 मामले दर्ज किए गए थे और इन मामलाें में 2853 तस्करों को गिरफ्तार किया गया था वहीं इस साल सात माह में ही कुल 1758 केस दर्ज किए गए और 2333 तस्करों को गिरफ्तार किया जा चुका है।
पुलिस अधिकारी का दावा है कि इस वर्ष के अंत तक पिछले वर्ष की तुलना में दो गुने से भी अधिक तस्करों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। अधिक से अधिक तस्करों को पकड़ने के साथ ही ड्रग्स की बरामदगी भी अधिक की जा रही है।
दिल्ली को ड्रग्स मुक्त करने के लिए कई कदम उठाए जा रहे हैं। ड्रग्स नेटवर्क को जड़ से खत्म करने के लिए उपराज्यपाल और पुलिस कमिश्नर के नेतृत्व में बीते दिनों दिल्ली का पहला समर्पित एंटी-नारकोटिक्स टास्क फोर्स थाना स्थापित किया गया। इसका मुख्य उद्देश्य केवल स्थानीय विक्रेताओं (तस्करों) को ही नहीं, बल्कि अंतरराज्यीय व अंतरराष्ट्रीय ड्रग्स सिंडिकेट, उनके वित्तीय लेन-देन और सप्लाई रूट को ध्वस्त करना है।
”ऑपरेशन कवच” के तहत ताबड़तोड़ छापेमारी की गई। दिल्ली पुलिस पूरे शहर में समय-समय पर ‘आपरेशन कवच’ चला रही है। इसके तहत शहर के संदिग्ध हाटस्पाट्स (नशे की बिक्री वाले संवेदनशील क्षेत्र) को चिन्हित कर एक साथ सैकड़ों स्थानों पर छापेमारी की जाती है। शिक्षण संस्थानों (स्कूल-कॉलेज) के आसपास के क्षेत्रों पर विशेष निगरानी रखी जाती है ताकि युवाओं को नशे के जाल से बचाया जा सके।
ड्रग्स तस्करों की वित्तीय कमर तोड़ने के लिए एनडीपीएस एक्ट के प्रविधानों के तहत सख्त वित्तीय कार्रवाई की जा रही है। तस्करी से अर्जित की गई बेनामी संपत्तियों, मकानों और वाहनों को जब्त किया जा रहा है। उनके बैंक खातों को फ्रीज कर वित्तीय नेटवर्क को निष्प्रभावी बनाया जा रहा है।
पुलिस अधिकारी का कहना है कि मादक पदार्थों की तस्करी के लिए इस्तेमाल होने वाले आधुनिक तरीकों पर नकेल कसने के लिए तकनीकी पुलिसिंग का सहारा लिया जा रहा है।
इसके तहत कोरियर सेवाओं, डार्क वेब और इंटरनेट मीडिया के जरिये होने वाली सप्लाई पर साइबर सेल नजर रख रही है। पड़ोसी राज्यों (हरियाणा, उत्तर प्रदेश, पंजाब आदि) की सीमाओं पर चेकिंग बढ़ा दी गई है ताकि बाहरी राज्यों से दिल्ली में मादक पदार्थों की आवक को रोका जा सके।
मादक पदार्थ जब्ती आंकड़े
| मादक पदार्थ | 2025 | 2026 (30 जून तक) |
|---|---|---|
| चरस | 70.178 किग्रा | 38.559 किग्रा |
| अफीम | 326.859 किग्रा | 14.545 किग्रा |
| गांजा | 5480.451 किग्रा | 2663.681 किग्रा |
| हेरोइन | 76.827 किग्रा | 30.933 किग्रा |
| पोस्त | 59.121 किग्रा | 75.677 किग्रा |
| कोकेन | 12.649 किग्रा | 6.691 किग्रा |
| मेथाक्वालोन | 0.555 किग्रा | 0.096 किग्रा |
| कीटामिन-एम्फेटामिन | 1.752 किग्रा | 0.435 किग्रा |
| कोडीन सिरप-डायलेक्स डीसी सिरप | 2052 बोतल | 499 बोतल |
| अल्प्राजोलम | 2925 बोतल | 56.707 किग्रा और 99,745 टैबलेट |
| एमडीएमए | 16.165 किग्रा, 68 टैब, 0.020 टैब | 5.864 किग्रा व 1704 टैबलेट |

