650 करोड़ के घोटाले का असर! दिल्ली में DGHS का पद बना ‘मुसीबत’, जिम्मेदारी लेने से कतरा रहे डॉक्टर

News Desk
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नई दिल्ली। दिल्ली का स्वास्थ्य सेवा महानिदेशक बनने के लिए कभी लाबिंग होती थी। कई डॉक्टर इस पद को पाने के लिए लालायित रहते थे। लेकिन पिछले कुछ समय यह पद इतना बदनाम हो चुका है कि अब योग्य डीजीएचएस मिलना मुश्किल हो गया। 650 करोड़ के दवा और उपकरण घोटाले में घोटाले में जारी ईडी और एसीबी की जांच और कानूनी पचड़ों के डर से कोई भी डॉक्टर अब इस विवादित पद पर बैठकर अपने करियर पर जोखिम नहीं लेना चाहता।

घोटाले में नाम आने पर डा. वत्सला अग्रवाल को हटाकर डा. सुषमा जैन को लिंक आफिसर बनाकर इस पद की जिम्मेदारी सौंपी गई लेकिन एक माह बाद ही वह चिकित्सा अवकाश पर चली गईं। इसके बाद स्वास्थ्य विभाग ने पश्चिमी दिल्ली के एक अस्पताल के चिकित्सा अधीक्षक को इस पद की पेशकश की लेकिन सूत्रों का कहना है कि उन्होंने मना कर दिया।

यही नहीं, ज्यादा दबाव पड़ने पर उन्होंने स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति लेने की भी बात कह दी। ऐसे में महानिदेशालय में ही तैनात एक डाक्टर को इस पद की पेशकश की गई। लेकिन उन्होंने भी अनिच्छा जाहिर कर दी। उन्होंने बाहरी दिल्ली के अस्पताल में तबादला लेना मंजूर कर लिया। जब योग्य डीजीएचएस नहीं मिला तो करीब 10 दिन पहले स्वास्थ्य विभाग ने इस पद के लिए तीन लिंक आफिसर बना दिया। ताकि ताकि कोई छुट्टी पर जाए तो अन्य दो में से किसी को यह जिम्मेदारी दी जा सके।

बता दें कि घोटाले में नाम सामने आने के बाद डॉ. वत्सला अग्रवाल को नौ जून को निलंबित कर दिया गया था। बाद में एसीबी ने डा. वत्सला अग्रवाल को इस मामले में गिरफ्तार कर लिया। फिलहाल वह जेल में हैं। डॉ. वत्सला के स्थान पर जग प्रवेश चंद्र अस्पताल की चिकित्सा अधीक्षक डॉ. सुषमा जैन को डीजीएचएस की अतिरिक्त जिम्मेदारी दी गई। लेकिन 20 जुलाई के आसपास वह चिकित्सा अवकाश पर चली गईं।

इसके बाद डीडीएचएस के लिए पहला लिंक आफिसर जीटीबी अस्पताल के निदेशक को बनाया गया है। दूसरा हेडगेवार अस्पताल और तीसरा लिंक ऑफिसर लाल बहादुर शास्त्री अस्पताल के चिकित्सा अधीक्षक को बनाया गया है। स्थायी डीजीएचएस की नियुक्त नहीं होने के कारण दिल्ली मेडिकल काउंसिल (डीएमसी) में रजिस्ट्रार का पद भी अस्थायी ही है। करीब डेढ़ साल पहले फरवरी, 2025 में डॉ. गिरीश त्यागी ने इस पद से इस्तीफा दिया था।

इसके बाद डीजीएचएस को ही रजिस्ट्रार पद का लिंक आफिसर बना दिया गया था। यानी जो भी डीजीएचएस होगा वही रजिस्ट्रार का काम देखेगा। इस तरह से लिंक आफिसर के पास कई तरह की जिम्मेदारी हो जाती है जिसे पूरा करना बड़ा मुश्किल होता है। जांच और कानूनी पचड़ों के अलावा कई तरह की जिम्मेदारी लिंक होने से भी डाक्टर इस पद पर बैठने से कतरा रहे हैं।

डीजीएचएस ही नहीं परिवार कल्याण निदेशक का भी पद है खाली

घोटाले के बाद डीजीएचएस ही नहीं बल्कि परिवार कल्याण निदेशालय में निदेशक का भी पद भी करीब डेढ़ महीने से खाली पड़ा है। 30 जून को डॉ. एजी राधिका की सेवानिवृत्ति के बाद इस पद पर किसी की नियुक्त नहीं की गई है। इसके पीछे भी घोटाले से जुड़े विवाद को ही कारण बताया जा रहा है।

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