गाजियाबाद। एलएडीसी (लीगल एड डिफेंस काउंसिल) की ओर से जेल में बंद आर्थिक रूप से कमजोर 800 कैदियों की पैरवी दो फरवरी 2027 को समाप्त हो जाएगी। एलएडीसी के अनुबंध के नवीनीकरण पर रोक लगा दी गई है। एलएडीसी के अधिवक्ता आर्थिक रूप से कमजोर आरोपितों के मुकदमे निश्शुल्क लड़ते हैं।
इन अधिवक्ताओं का अनुबंध एक वर्ष के लिए होता है। राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण ने निर्देश दिया है कि लीगल एड के मामले बार एसोसिएशन के युवा अधिवक्ताओं को सौंपे जाएं। अनुबंध नवीनीकरण पर रोक के आदेश को लेकर एलएडीसी के अधिवक्ताओं ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर करने का निर्णय लिया है।
पैरवी न होने से सुनवाई लंबी खिंचने की आशंका
गाजियाबाद में लीगल एड डिफेंस काउंसिल के तहत आठ अधिवक्ता काम कर रहे हैं। इनके पास जेल में बंद करीब 800 आरोपितों के मुकदमों की पैरवी की जिम्मेदारी है। इसके अलावा 600 अन्य आरोपितों को निश्शुल्क पैरवी के लिए चिह्नित किया गया है। ये ऐसे कैदी हैं जो आर्थिक रूप से कमजोर होने के कारण निजी अधिवक्ता की फीस नहीं चुका सकते।
आरोपितों की पैरवी के लिए परिवार की ओर से भी कोई अधिवक्ता उपलब्ध नहीं है। राष्ट्रीय विधिक सेवा प्राधिकरण की चार अगस्त की पत्र के आधार पर उत्तर प्रदेश राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण ने छह अगस्त को सभी जिला विधिक सेवा प्राधिकरणों को निर्देश जारी किए हैं।
इसमें कहा गया है कि पंजाब, हरियाणा और चंडीगढ़ में सितंबर 2026 से लीगल एड डिफेंस काउंसिल के अनुबंध का नवीनीकरण नहीं किया जाएगा। अन्य राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में भी मौजूदा अनुबंध की अवधि पूरी होने के बाद नवीनीकरण नहीं होगा।
चीफ एलएडीसी किरणपाल सिंह ने बताया कि कुछ कैदी ऐसे हैं जो मुकदमे में अंतिम निर्णय हुए बिना 10 वर्ष से अधिक समय से जेल में बंद हैं। पैरवी न होने से सुनवाई लंबी खिंचने की आशंका है।
अधिवक्ताओं का कहना है कि वर्तमान व्यवस्था समाप्त होने के बाद यदि नए अधिवक्ताओं को मामलों का हस्तांतरण किया जाता है, तो उन्हें पुराने मुकदमों की जानकारी समझने में समय लगेगा। इससे मुकदमों की सुनवाई प्रभावित हो सकती है। लीगल एड के तहत विभिन्न आपराधिक मामलों में आरोपितों को कानूनी सहायता दी जा रही है।
कानून मंत्री से मिले अधिवक्ता
चीफ एलएडीसी किरणपाल सिंह, डिप्टी चीफ एलएडीसी अजित कुमार हांडा, डिप्टी चीफ एलएडीसी सुनीता सिंह, असिस्टेंट एलएडीसी विचित्र कुमार सहित अन्य अधिवक्ताओं ने कानून मंत्री अर्जुन मेघवाल से मुलाकात कर अनुबंध को समाज के हित में जारी रखने की मांग की।

