8 साल के बच्चे के अपहरण और 80 लाख की फिरौती की साजिश का पर्दाफाश, 6 आरोपित गिरफ्तार

News Desk
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बाहरी दिल्ली। भलस्वा डेयरी पुलिस ने आठ साल के बच्चे के नाम पर 80 लाख रुपये की फिरौती मांगने वाले छह आरोपितों को गिरफ्तार किया है। इसमें दो आरोपित 18 साल के व चार नाबालिग हैं।

एक नाबालिग आरोपित पीड़ित की बड़ी बहन के साथ उसी की क्लास में पढ़ता था और परिवार को अच्छी तरह जानता था। उसने आरोपित ग्रुप के लिए मुखबिर का काम किया।

अपहरण के बाद वह परेशान परिवार को दिलासा देता रहा, जबकि पुलिस की गतिविधियों और जांच की प्रगति की जानकारी अपने साथियों तक पहुंचाता रहा। इसका मकसद पुलिस को गुमराह करना और फिरौती की साजिश को अंजाम देने में मदद करना था।

रातभर चला सर्च आपरेशन, सुबह बच्चा सुरक्षित बरामद

दो सितंबर की रात को मुकुंदपुर दिल्ली की रहने वाली एक महिला ने भलस्वा डेयरी पुलिस को शिकायत दी कि उसके आठ साल के बच्चे को अगवा कर लिया गया है। उससे वॉट्सएप काल पर 80 लाख की फिरौती मांगी गई, जिसे बाद में घटाकर 40 लाख कर दिया गया गया।

इस पर मुकुंदपुर, बुराड़ी और आस-पास रात भर पुलिस ने सर्च आपरेशन चलाया। टीम ने सीडीआर, सीएएफ, डिटेल्स और संदिग्ध व्हाट्सएप नंबरों का गहन जांच की और जमीनी स्तर पर जांच-पड़ताल शुरू की।

तालमेल, तकनीकी निगरानी, खुफिया जानकारी की कोशिशों से टीम ने तीन सितंबर को सुबह अगवा बच्चे को सुरक्षित बरामद कर लिया। इस मामले में पुलिस ने दो आरोपितों के साथ-साथ कानून के दायरे में आने वाले चार बच्चों को भी पकड़ा है।

इसमें राहुल (18), शुभम (18) व चार नाबालिग शामिल हैं। इस मामले में स्वरूप नगर के एसीपी रविंदर अहलावत ने एक खास पुलिस टीम बनाई थी। इसका नेतृत्व भलस्वा डेयरी के एसएचओ इंस्पेक्टर राकेश राणा और एसआई महेश ने किया। टीम में हैडकान्स्टेबल प्रतीक, टीनू, गजराज, मनीष और कान्स्टेबल संदीप शामिल रहे।

वहीं आउटर-नार्थ डिस्ट्रिक्ट के अडिशनल डीसीपी लोकेश्वरन आर ने बताया कि दो सितंबर को मुकुंदपुर निवासी रेशमा ने भलस्वा डेयरी थाने में बेटे के अपहरण की शिकायत दी थी। पुलिस की विशेष टीम ने तलाशी अभियान चला कर आरोपियों तक पहुंची और बच्चे को बरामद कर लिया है।

ये अपनाया अपराध का तरीका

आरोपितों से पूछताछ और जांच में पता चला कि आरोपितों ने बच्चे को अगवा करने और फिरौती मांगने की साजिश पहले से रची थी। साजिश के तहत, एक नाबालिग को पीड़ित बच्चे का भरोसा जीतने का काम सौंपा गया था।

कई दिनों तक उसने बच्चे को टाॅफी, चाकलेट और कोल्ड ड्रिंक दीं, जिससे उनके बीच जान-पहचान और भरोसा कायम हुआ और दो सितंबर को उसने बच्चे को बहला-फुसलाकर अपने साथियों के हवाले कर दिया।

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