नई दिल्ली। चिड़ियाघर में मरम्मत कार्य के दौरान बरती गई लापरवाही एक नर चिंकारा हिरण पर भारी पड़ गई। बाड़े के पास रखी सीमेंट की प्लास्टिक बोरी उसके सींग में फंस गई। इसके बाद घबराया चिंकारा काफी देर तक बाड़े में इधर-उधर दौड़ता रहा, चूंकि उसकी आंखों पर बोरी होने से उसे दिखाई नहीं दे रहा था। इस दौरान उसका सींग टूट गई और उसे गंभीर चोटें आईं।
सूत्रों का आरोप है कि घटना के समय मौके पर कोई कीपर मौजूद नहीं था और सुरक्षा इंतजाम भी नाकाफी थे। चोट इतनी गंभीर थी कि चिंकारा खड़ा तक नहीं हो पा रहा था।
पैर भी टूट गया था
इलाज के दौरान पता चला कि उसका पैर भी टूट गया है। कुछ दिनों बाद चिंकारा की मौत हो गई। घटना को लेकर चिड़ियाघर की सुरक्षा व्यवस्था और बाड़ों के आसपास चल रहे मरम्मत कार्य पर सवाल उठ रहे हैं।
समय पर समुचित इलाज नहीं मिल सका
चिड़ियाघर के कर्मचारियों ने बताया कि यह चिंकारा करीब पांच वर्ष पहले हरियाणा से लाया गया था। आरोप है कि घायल होने के बाद समय पर समुचित इलाज नहीं मिल सका, जिससे उसकी हालत बिगड़ती चली गई और अंत में उसकी मौत हो गई। हालांकि, चिड़ियाघर के निदेशक डॉ. संजीत कुमार ने मौत के संबंध में कोई टिप्पणी नहीं की।
उन्होंने केवल इतना कहा कि शाकाहारी जानवरों को बाड़े के भीतर दौड़ने या एनिमल हाउस में शिफ्ट करने के दौरान कभी-कभी चोट लग जाती है। सभी घायल जानवरों को तत्काल अस्पताल लाकर उपचार दिया जाता है।
वर्तमान में चिड़ियाघर अस्पताल में छोटे-बड़े मिलाकर कुल 18 जानवर उपचार, पुनर्वास या हैंड रियरिंग (कृत्रिम पालन-पोषण) के विभिन्न चरणों में हैं। इनमें बड़े मांसाहारी जानवर भी शामिल हैं। अधिकारी ने कहा कि स्वस्थ होने पर उन्हें वापस बाड़ों में भेज दिया जाता है।

