सुप्रीम कोर्ट का बड़ा फैसला: मॉरीशस रूट से कर बचाव पर सख्ती, विदेशी निवेश नियमों में बदलाव का संकेत

Amit
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नई दिल्ली। भारत में विदेशी निवेश से जुड़े कर ढांचे को लेकर सुप्रीम कोर्ट के एक अहम फैसले ने नई बहस छेड़ दी है। वर्षों से विदेशी निवेशकों द्वारा अपनाए जा रहे मॉरीशस मार्ग पर अदालत की सख्त टिप्पणी के बाद यह स्पष्ट हो गया है कि सिर्फ कर लाभ हासिल करने के लिए बनाए गए कॉरपोरेट ढांचों को अब कानूनी संरक्षण नहीं मिलेगा।

सुप्रीम कोर्ट ने अमेरिकी निवेश कंपनी टाइगर ग्लोबल से जुड़े एक मामले में फैसला सुनाते हुए कहा कि यदि किसी विदेशी इकाई का गठन वास्तविक कारोबारी गतिविधियों के बजाय केवल कर बचाव के उद्देश्य से किया गया है, तो ऐसे मामलों में कर संधि के लाभ नहीं दिए जा सकते। यह फैसला भारत की कर व्यवस्था में एक निर्णायक बदलाव के रूप में देखा जा रहा है।

मामला वर्ष 2018 में टाइगर ग्लोबल द्वारा ई-कॉमर्स कंपनी फ्लिपकार्ट में अपनी हिस्सेदारी वॉलमार्ट को बेचने से जुड़ा है। अदालत ने इस सौदे से हुए लाभ को भारत में करयोग्य मानते हुए कहा कि मॉरीशस स्थित इकाइयों का उपयोग महज माध्यम के तौर पर किया गया था। न्यायालय ने इसे कृत्रिम कर-योजना करार दिया और सामान्य कर अपवंचन निरोधक नियम (GAAR) को लागू करने को सही ठहराया।

अब तक बड़ी संख्या में विदेशी निवेशक भारत-मॉरीशस कर संधि के तहत कर छूट का लाभ लेते रहे हैं। इसी मार्ग से भारत में अरबों डॉलर का निवेश आया, लेकिन अदालत के इस फैसले के बाद ऐसे निवेश ढांचों की गहन जांच का रास्ता साफ हो गया है। विशेषज्ञों का मानना है कि अब कर अधिकारी लेन-देन के पीछे की वास्तविक मंशा को परख सकेंगे।

सरकार की ओर से इस फैसले को निवेश के खिलाफ नहीं माना जा रहा है। सरकार का कहना है कि भारत अब भी निवेश के लिए आकर्षक गंतव्य बना हुआ है और पारदर्शी तथा वास्तविक व्यावसायिक गतिविधियों पर आधारित निवेश को पूरा संरक्षण मिलेगा। यह निर्णय कर प्रणाली को मजबूत करने और गलत कर-योजनाओं पर अंकुश लगाने की दिशा में एक बड़ा कदम माना जा रहा है।

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