ग्रेटर नोएडा। स्पेशल टास्क फोर्स नोएडा यूनिट ने शेल कंपनियों के जरिए संचालित हो रहे अंतरराष्ट्रीय हवाला और मनी लॉन्ड्रिंग नेटवर्क का पर्दाफाश किया है। एसटीएफ ने एक चीनी नागरिक सहित तीन आरोपितों को गिरफ्तार किया है। चीनी नागरिक का छह वर्ष पहले ही वीजा समाप्त हो चुका था।
आरोप है कि यह गिरोह नोएडा से दर्जनों फर्जी कंपनियां बनाकर करोड़ों रुपये का अवैध लेन-देन कर रहा था। एसटीएफ मनी ट्रेल खंगालने के लिए ईडी और आयकर विभाग से भी समन्वय करेगा।
एसटीएफ के अपर पुलिस अधीक्षक राज कुमार मिश्र के मुताबिक, बुधवार रात करीब 10 बजे सेक्टर-93 स्थित पूर्वांचल सिल्वर सिटी से चीनी नागरिक लियाओ लान्गहुई, गाजियाबाद निवासी चार्टर्ड अकाउंटेंट संजीव कुमार और औरैया निवासी कौशलेंद्र को गिरफ्तार किया गया।
आरोपितों के कब्जे से पांच लैपटाप, नौ मोबाइल फोन, एक टैबलेट, 10 मोहरें, 11 चेकबुक, दो चीनी पासपोर्ट, एक चीनी पहचान पत्र, पैन कार्ड और विभिन्न बैंकों के करीब 4.72 करोड़ रुपये के चेक बरामद किए गए हैं। लियाओ लान्गहुई वर्ष 2018 में भारत आया था, तब से सेक्टर-83 स्थित वाइटीएल मैन्युफैक्चरिंग कंपनी का संचालन कर मोबाइल कवर बनावा रहा था।
आरोप है कि चीन से आयातित कच्चे माल की कीमतों में हेरफेर कर तैयार माल दिल्ली के करोलबाग, नेहरू प्लेस सहित अन्य बाजारों में अंडर इनवायसिंग (टैक्स से बचने को या बिना घोषित किए गए फंड को अंतरराष्ट्रीय सीमाओं के पार चुपके से भेजना) से बेचा जाता था। इससे बची रकम को हवाला के जरिए चीन भेजा जाता था।
एसटीएफ को सूचना मिली थी कि यह गिरोह शेल कंपनियां बनाकर वित्तीय अपराध कर रहा है। सत्यापन के बाद कंपनी के संचालक लियाओ को पूछताछ के लिए बुलाया गया। दस्तावेज न दे पाने पर उसके सेक्टर-93 स्थित फ्लैट पर छापा मार कर कई कंपनियों की चेकबुक, बैंक दस्तावेज, मोहरें और फर्जी पहचान पत्र मिले।
लियाओ के पास से नागालैंड के कोहिमा निवासी सैमुअल लोथा के नाम का आधार कार्ड भी मिला, जिस पर उसकी फोटो लगी थी। उसका वीजा 2020 में ही खत्म हो चुका था। फेज- दो कोतवाली में आरोपितों के खिलाफ मामला दर्ज कराया है। बरामद लैपटाप, मोबाइल और दस्तावेजों की फोरेंसिक जांच होगी।
कई फर्जी शेल कंपनियों से खेल, चालक के नाम बनाई कंपनी
जांच में पता चला कि गिरोह ने जेएनएस इन्फ्रा हाइट्स प्राइवेट लिमिटेड, रेफान एंटरप्राइजेज, टाइडीडेस्क एसेंशियल, जेड वन एंटरप्राइजेज, हनुराज ट्रेडिंग साल्यूशन, यूपीमैक्स इंडिया, मेजेटेक पावर इंडिया और एक्सीलेंस मोबाइल टेक इंडिया जैसी कई शेल कंपनियां बनाई थीं।
इन कंपनियों का वास्तविक कारोबार न के बराबर था, लेकिन इनके नाम पर बैंक खाते खोलकर करोड़ों का लेन-देन किया जाता था। हांगकांग में पंजीकृत एचके हानको कम्युनिकेशन और एचके इंचियो लिमिटेड का भी हवाला ट्रांसफर में इस्तेमाल हो रहा था। आरोपित ने अपने चालक देवेंद्र के नाम से भी कंपनी बनाई थी।
फर्जी कंपनियां बनाने में भारतीय सहयोगियों का रोल
एसटीएफ के अनुसार लियाओ ने सीए संजीव कुमार और कौशलेंद्र की मदद से फर्जी कंपनियां बनवाईं। संजीव पर कंपनी गठन, बैंक खाते खुलवाने और दस्तावेज तैयार कराने की जिम्मेदारी थी। गिरोह कर्मचारियों को लालच देकर उनके दस्तावेजों पर कंपनियां खोलता था, लेकिन खातों का पूरा नियंत्रण चीनी नागरिक के पास रहता था।
इन्हीं खातों से हवाला का पैसा भेजा जाता था। 2019 में वाइटीएल कंपनी में रवि कुमार ढककर उर्फ नटवरलाल शेयर होल्डर था। उसने फर्जी दस्तावेजों से पैन और जीएसटी लिया था। वह धोखाधड़ी और विदेशी अधिनियम के मामले में पहले से जेल में है।

