नई दिल्ली: दिल्ली में शिक्षक दिवस के अवसर पर राज्य शिक्षक पुरस्कार 2026 में118 शिक्षकों को सम्मानित किया गया. समारोह में दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने बतौर मुख्य अतिथि शिरकत की और शिक्षकों को सम्मानित किया. इस अवसर पर शिक्षा मंत्री आशीष सूद, सांसद बांसुरी स्वराज, विधायक अभय वर्मा, नीरज बसोया और चंदन कुमार चौधरी सहित शिक्षा विभाग की निदेशक अंकिता आनंद और भारी संख्या में शिक्षक एवं छात्र-छात्राएं उपस्थित रहे. कार्यक्रम की थीम ‘Celebrating the Architects of Tomorrow’ रही, जो शिक्षकों की उस भूमिका को दर्शाती है जिसमें वे बच्चों के साथ देश के भविष्य को भी आकार देते हैं.
इस वर्ष कुल 118 शिक्षकों को विभिन्न श्रेणियों में उनके उत्कृष्ट कार्यों के लिए सम्मानित किया गया. इनमें 20 स्कूल प्रमुख, शिक्षा निदेशालय और एमसीडी स्कूलों के 69 शिक्षक, तथा तीन सीएम श्री स्कूलों के शिक्षक शामिल रहे. इसके अलावा पुस्तकालय अध्यक्ष, विशेष शिक्षक और खेल शिक्षकों को भी उनके सराहनीय योगदान के लिए सम्मानित किया गया.
कार्यक्रम में मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने शिक्षकों को संबोधित करते हुए कहा कि सरकार दिल्ली की शिक्षा व्यवस्था में सकारात्मक बदलाव लाने और मौजूदा चुनौतियों को दूर करने के लिए लगातार काम करेगी. इस दौरान उत्कृष्ट कार्य करने वाले शिक्षकों को सम्मानित किया गया, जिन्होंने अपने अनुभव साझा करते हुए बताया कि एक शिक्षक का सबसे बड़ा दायित्व हर बच्चे की क्षमता को पहचानकर उसे आगे बढ़ने का अवसर देना है.
शिक्षा व्यवस्था में होगा सकारात्मक बदलाव : मुख्यमंत्री
मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने कहा कि जब वह खुद छात्र थीं, तभी से उनके मन में यह सवाल रहा कि शिक्षा व्यवस्था को और बेहतर कैसे बनाया जाए और छात्रों की समस्याओं का समाधान किस तरह किया जाए. उन्होंने बताया कि दिल्ली विश्वविद्यालय छात्र संघ की अध्यक्ष रहते हुए भी वह छात्रों की समस्याओं और व्यवस्था में सुधार को लेकर लगातार सोचती थीं. मुख्यमंत्री ने कहा कि ईश्वर की कृपा, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के आशीर्वाद और जनता के सहयोग से उन्हें दिल्ली की मुख्यमंत्री के रूप में सेवा करने का अवसर मिला है. उन्होंने कहा कि आज भी उनके सामने यही सवाल है कि व्यवस्था में मौजूद चुनौतियों और अव्यवस्थाओं को कैसे दूर किया जाए और सरकार को मिले समय और अवसर का बेहतर इस्तेमाल किस तरह किया जाए.
रेखा गुप्ता ने कहा कि दिल्ली की पूरी शिक्षा व्यवस्था में सकारात्मक बदलाव लाने के लिए सरकार लगातार काम करेगी.उन्होंने शिक्षकों को शिक्षा व्यवस्था की सबसे अहम कड़ी बताते हुए कहा कि उनके सहयोग से शिक्षा के क्षेत्र में व्यापक सुधार किया जाएगा.
मां के मार्गदर्शन ने बनाया शिक्षक
कार्यक्रम में राजकीय सर्वोदय वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय, सेक्टर-24, रोहिणी की समाजशास्त्र शिक्षिका सुचिता मान को राज्य स्तरीय समारोह में ‘बेस्ट टीचर अवार्ड’ से सम्मानित किया गया. सम्मान मिलने पर उन्होंने खुशी जाहिर करते हुए इसका श्रेय अपने विद्यालय परिवार, विद्यार्थियों और परिजनों को दिया. सुचिता मान ने बताया कि इस उपलब्धि के पीछे विद्यार्थियों की मेहनत, विद्यालय प्रशासन का सहयोग और प्रधानाचार्या का निरंतर मार्गदर्शन महत्वपूर्ण रहा है.उन्होंने बताया कि शुरुआत में उनका सपना इंजीनियर बनने का था, लेकिन अपनी मां की प्रेरणा और मार्गदर्शन से उन्होंने शिक्षा के क्षेत्र को चुना. उनकी मां भी शिक्षा के क्षेत्र से जुड़ी रही हैं और हिंदी टीजीटी शिक्षिका के रूप में 36 वर्षों तक सेवाएं देने के बाद सेवानिवृत्त हुईं.सुचिता मान का कहना है कि एक शिक्षिका और समाजशास्त्री के तौर पर उनका लक्ष्य विद्यार्थियों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा देना और समाज की निरंतर सेवा करना है.
हर छात्र में आगे बढ़ने की क्षमता
नजफगढ़ के शिक्षक नवीन कुमार को भी उनके योगदान के लिए सम्मानित किया गया.उन्होंने बताया कि उनके पिता और परिवार के कई अन्य सदस्य भी शिक्षण क्षेत्र से जुड़े रहे हैं.उनके अनुसार, शिक्षक का सबसे बड़ा दायित्व प्रत्येक बच्चे की क्षमता को पहचानना और उसे आगे बढ़ने का अवसर देना है. महिला और पुरुष शिक्षकों की भूमिका पर उन्होंने कहा कि शिक्षा के क्षेत्र में दोनों समान रूप से महत्वपूर्ण योगदान दे रहे हैं.बच्चों के बेहतर भविष्य के लिए शिक्षक का समर्पण और उसकी सोच सबसे ज्यादा मायने रखती है.
‘भविष्य के आर्किटेक्ट’ हैं शिक्षक
कार्यक्रम में डॉ. जांगिड़ ने कहा कि शिक्षक वास्तव में भविष्य के निर्माणकर्ता होते हैं.उनके अनुसार, जिस तरह देश में आईएएस और आईपीएस अधिकारियों की भूमिका को महत्व दिया जाता है, उसी तरह शिक्षकों को भी बेहतर सुविधाएं, उचित सम्मान और उनकी योग्यता के अनुरूप महत्व मिलना चाहिए. उन्होंने कहा कि अगले 10 से 15 वर्षों में देश और समाज किस दिशा में आगे बढ़ेगा, यह काफी हद तक इस बात पर निर्भर करेगा कि आज शिक्षकों को किस तरह की सुविधाएं मिल रही हैं और शिक्षा का स्तर कैसा है.उनका मानना है कि यदि शिक्षकों को बेहतर संसाधन, सही दिशा और सम्मान दिया जाए तो शिक्षा के माध्यम से समाज में मौजूद कई कमियों और बुराइयों को दूर किया जा सकता है. ‘शिक्षक महाकुंभ’ ने उत्कृष्ट शिक्षकों को सम्मानित करने के साथ यह संदेश भी दिया कि मजबूत समाज और बेहतर राष्ट्र की नींव कक्षा में तैयार होती है.इस निर्माण में शिक्षक की भूमिका सबसे महत्वपूर्ण है और शिक्षा व्यवस्था में सुधार के लिए सरकार और शिक्षकों का समन्वय निर्णायक साबित हो सकता है.
10,417 शिक्षकों की भर्ती प्रक्रिया शुरू
कार्यक्रम में शिक्षा मंत्री आशीष सूद ने कहा कि दिल्ली की शिक्षा व्यवस्था को मजबूत करने में हजारों शिक्षकों का अथक प्रयास शामिल है. राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP) 2020 का उद्देश्य बच्चों को केवल स्कूल लाना नहीं, बल्कि उनकी समझ और क्षमताओं को विकसित करना है. शिक्षा मंत्री ने बड़ी घोषणा करते हुए बताया कि राजधानी में शिक्षकों की कमी को दूर करने के लिए 10,417 शिक्षकों की भर्ती प्रक्रिया शुरू कर दी गई है. इसके साथ ही, विशेष आवश्यकता वाले छात्रों की सहायता के लिए 613 विशेष शिक्षकों की भर्ती का प्रावधान भी किया गया है. उन्होंने अतिथि शिक्षकों की सेवा से जुड़ी समस्याओं के समाधान के लिए भी आवश्यक निर्देश जारी किए जाने की बात कही और विश्वास दिलाया कि सरकार अगले साल तक शिक्षकों से जुड़ी प्रशासनिक व एचआर समस्याओं का समाधान कर लेगी.
