गाजियाबाद। केंद्र सरकार से सेवानिवृत्त अधिकारी को मनी लांड्रिंग के मुकदमे में फंसने का डर दिखाकर साइबर ठगों ने करीब 48 दिन तक डिजिटल अरेस्ट कर 2.21 करोड़ रुपये की ठगी के मामले में पुलिस ने एक आरोपित को गिरफ्तार किया है।
पांचवी पास पानीपत निवासी आरोपित महताब के खाते में छह लाख रुपये ट्रांसफर कराए गए थे। जबकि उसे कमीशन के रूप में 17 हजार रुपये मिले थे। पुलिस पूरे मामले के मास्टरमाइंड की तलाश में जुटी है। इस मामले में ठगी से संबंधित 1.25 करोड़ रुपये फ्रीज कराए हैं।
सुप्रीम कोर्ट से वारंट जारी होने का भय दिखाया गया
वसुंधरा निवासी केंद्र सरकार के सेवानिवृत्त अधिकारी रत्नाकर मुगशुजी गेडाम को आरोपितों ने 27 मार्च को बताया था कि उनके आधार कार्ड का इस्तेमाल मनी लांड्रिंग और धोखाधड़ी के मामलों में हुआ है। उनके एटीएम कार्ड के भी गलत इस्तेमाल की बात कही गई। इसके बाद ईडी और सुप्रीम कोर्ट से वारंट जारी होने का भय दिखाया गया।
आरोपितों ने फर्जी वारंट उनके वाट्सएप पर भेजकर उन्हें डिजिटल अरेस्ट बताकर 27 मार्च से 14 मई के बीच जांच के नाम पर अलग-अलग बैंक खातों में कुल 2.21 करोड़ रुपये ट्रांसफर करा लिए। शिकायत के आधार पर एक जून को साइबर क्राइम थाने में केस दर्ज कर पुलिस ने जांच शुरू की।
जांच के दौरान मंगलवार को पुलिस ने पानीपत की गोपाल कालोनी निवासी महताब को गिरफ्तार किया है। घटना से संबंधित छह लाख रुपये महताब के बैंक खाते में भी ट्रांसफर हुए थे। उसने चेक के माध्यम से रकम निकाल ली। इसके बदले उसे 17 हजार रुपये कमीशन दिया गया था।
महताब ने पुलिस को बताया कि पानीपत निवासी साहिल शर्मा ने गेमिंग में खाते के इस्तेमाल की बात कहकर उससे बैंक खाते की जानकारी ली थी। खाते में रकम आने के बाद वह उसे निकालकर अपना कमीशन काटकर साहिल को देता था।
विभिन्न बैंक खातों में 1.25 करोड़ रुपये फ्रीज कराए गए
एसीपी क्राइम अमित सक्सेना के मुताबिक मामले में विभिन्न बैंक खातों में 1.25 करोड़ रुपये फ्रीज कराए गए हैं। एनसीआरपी पोर्टल की एसओपी के अनुसार रकम वापस कराने की कार्रवाई चल रही है। फरार आरोपित साहिल शर्मा की तलाश की जा रही है। महताब के पास से घटना में प्रयुक्त मोबाइल फोन बरामद किया गया है।
