स्वतंत्रता दिवस पर दिल्ली पुलिस के 17 कर्मियों को सम्मान, दो को राष्ट्रपति पदक

News Desk
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नई दिल्ली। स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर इस बार दिल्ली पुलिस के 17 अधिकारियों और जवानों को राष्ट्रपति पदक व उत्कृष्ट सेवा पदक से सम्मानित किया जाएगा। उनमें से दो को राष्ट्रपति पदक और 15 को उत्कृष्ट सेवा पदक से सम्मानित होंगे।

राष्ट्रपति पदक पाने वालों में अतिरिक्त पुलिस आयुक्त दिनेश कुमार गुप्ता और एसआइ राजेश कुमार शामिल हैं। दिनेश कुमार गुप्ता ने दिल्ली पुलिस में फील्ड आपरेशन से लेकर ट्रैफिक और विशेष विभागों में महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां संभाली हैं। वर्तमान में वह यातायात अतिरिक्त पुलिस आयुक्त के रूप में बड़े राष्ट्रीय समारोहों, धार्मिक आयोजनों और सार्वजनिक कार्यक्रमों में यातायात प्रबंधन की जिम्मेदारी संभाल रहे हैं।

एसआइ राजेश कुमार 1988 में कांस्टेबल के रूप में दिल्ली पुलिस में शामिल हुए थे। उन्होंने क्वार्टर अलाटमेंट सेल की वेबसाइट को पारदर्शी बनाने और डायरेक्टरेट आफ एस्टेट्स में दिल्ली पुलिस के नोडल अधिकारी के रूप में महत्वपूर्ण कार्य किया। उन्हें 2005 में उत्कृष्ट सेवा पदक से सम्मानित किया गया।

मेधावी सेवा पदक पाने वालों में संयुक्त पुलिस आयुक्त सुरेंदर कुमार और नूपुर प्रसाद समेत 15 अधिकारी-जवान शामिल हैं। सुरेंदर कुमार ने ई-बीट बुक, ई-साइन, साइबर फ्रॉड ई-एफआइआर, मेडलीप्र और जिपनेट जैसी तकनीकी व्यवस्थाओं को मजबूत करने में भूमिका निभाई। वह वर्तमान में क्राइम ब्रांच में संयुक्त पुलिस आयुक्त हैं।

नूपुर प्रसाद ने शाहदरा की पहली डीसीपी के रूप में जिला ढांचा तैयार करने के साथ सीबीआइ में रहते हुए अगस्ता वेस्टलैंड और सुशांत सिंह राजपूत मृत्यु मामले की जांच की निगरानी की। फिलहाल वह आर्थिक अपराध शाखा में संयुक्त आयुक्त हैं। इनके अलावा यह पदक पाने वालों में इंस्पेक्टर राकेश कुमार भट्ट, इंस्पेक्टर तारा दत्त, एएसआइ कैलाश चंद, अंजना कुमारी, सतीश पाटिल, आनंद बल्लभ, प्रदीप कुमार शर्मा, बिंदु, एएसआइ दिनेश कुमारी, हेड कांस्टेबल ललिता, शर्मिला, पुष्पा रानी और हेड कांस्टेबल विजय सिंह शामिल हैं।

इन अधिकारियों और जवानों ने आतंकियों व गैंग्सटरों की गिरफ्तारी, जघन्य अपराधों के पर्दाफाश, अवैध शराब व मादक पदार्थों की तस्करी पर कार्रवाई, सुरक्षा व्यवस्था, जनसेवा, रिकार्ड डिजिटाइजेशन और विभागीय प्रशासन में उल्लेखनीय योगदान दिया है। ललिता ने गुमशुदा बच्चों को उनके परिवारों तक पहुंचाने और महिलाओं को आत्मरक्षा प्रशिक्षण देने में योगदान दिया, जबकि शर्मिला ने ई-एचआरएमएस के माध्यम से मेडिकल बिलों के ई-भुगतान की व्यवस्था को प्रभावी बनाने में भूमिका निभाई है।

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