गर्भवती बेटी की हत्या में उम्रकैद काट रही अशरफी को राहत नहीं, राज्यपाल ने दया याचिका खारिज की

News Desk
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गाजियाबाद। गर्भवती बेटी की हत्या के मामले में उम्रकैद की सजा काट रही अशरफी को समयपूर्व रिहाई नहीं मिल सकेगी। डासना स्थित जिला कारागार में बंद अशरफी की संविधान के अनुच्छेद 161 के तहत दाखिल दया याचिका पर राज्यपाल ने विचार के बाद उसे खारिज कर दिया है।

अशरफी मूल रूप से हापुड़ के बहादुरगढ़ थाना क्षेत्र के नवादा खुर्द गांव की रहने वाली है। उसके बेटे सुनील के साथ उसे अपनी बेटी मधु की हत्या के मामले में दोषी ठहराया गया था।

जिला एवं सत्र न्यायाधीश हापुड़ ने 30 अप्रैल 2025 को दोनों को दोषी ठहराते हुए उम्रकैद की सजा सुनाई थी। हत्या के साथ साक्ष्य मिटाने के आरोप में भी दोनों को सजा दी गई।

गर्भ में था सात माह का बच्चा, पेट्रोल डालकर जला दिया था

घटना 28 सितंबर 2023 की है। करीब 19 वर्षीय मधु छह-सात माह की गर्भवती थी। वह अपने गर्भ में पल रहे बच्चे के पिता के बारे में बताना नहीं चाहती थी।

आरोप था कि इसी बात को लेकर उसके भाई सुनील ने उसकी गर्दन पर ब्लेड से वार किया और इसके बाद पेट्रोल डालकर आग लगा दी। घटना के समय सुनील की मां अशरफी भी उसके साथ थी। गंभीर रूप से झुलसी मधु को उपचार के लिए अस्पताल भेजा गया था।

मामले में मधु का घटना के बाद दिया गया मृत्यु पूर्व बयान भी अहम साक्ष्य बना। 28 सितंबर की शाम करीब छह बजे चिकित्सक की मौजूदगी में उसका मृत्यु पूर्व बयान दर्ज किया गया था। इसमें उसने अपने भाई सुनील और मां अशरफी पर उसे जलाने का आरोप लगाया था।

अदालत ने इस बयान को ठोस एवं विश्वसनीय माना। इसके अलावा घटनास्थल से ब्लेड, बोतल, माचिस और अन्य सामान की बरामदगी तथा फोरेंसिक रिपोर्ट को भी अभियोजन के पक्ष में महत्वपूर्ण माना गया।

अदालत ने परिस्थितिजन्य साक्ष्यों की पूरी कड़ी पर विचार करने के बाद निष्कर्ष निकाला कि मधु की हत्या सुनील और अशरफी ने मिलकर पेट्रोल डालकर आग लगाकर की और बाद में उसे जली अवस्था में घटनास्थल पर छोड़कर चले गए। दोनों को हत्या और साक्ष्य मिटाने की धारा के तहत दोषी माना गया।

जली हालत में दो ग्रामीणों को मिली थी मधु

चितौड़ा गांव के जंगल में घटना वाली शाम को ग्रामीणों डालचंद और सुखवीर को मधु जली अवस्था में दिखाई। मधु ने अपनी मां अशरफी और भाई सुनील को आग लगाने वाला बताया।

ग्रामीणों की सूचना पर पहुंची पुलिस ने महिला कांस्टेबल की मदद से एंबुलेंस से उसे सीएचसी गढ़मुक्तेश्वर पहुंचाया। हालत गंभीर होने पर चिकित्सकों ने उसे मेरठ मेडिकल कॉलेज रेफर कर दिया।

गढ़मुक्तेश्वर में नायब तहसीलदार पवन कुमार यादव ने उसका मृत्यु पूर्व बयान दर्ज किया। उपचार के दौरान चार अक्टूबर 2023 को मधु की मौत हो गई। इसके बाद मुकदमे में हत्या की धारा 302 जोड़ी गई।

आरोपित मां-बेटे को 29 सितंबर 2023 को गिरफ्तार कर लिया गया। दोनों मधु को बाइक पर बैठाकर ले गए थे। गांव चौकीदार सत्तार की तहरीर पर इस मामले में मुकदमा दर्ज किया गया था।

वृद्ध बता मांगी समयपूर्व रिहाई

समयपूर्व रिहाई के लिए प्रस्तुत प्रस्ताव में 31 अगस्त 2025 तक अशरफी की उम्र 61 वर्ष दर्ज की गई। इसी आधार पर उसे वृद्ध महिला बताते हुए समयपूर्व रिहाई का मामला रखा गया। लेकिन तब तक वह उम्रकैद की सजा के मुकाबले परिहार सहित एक वर्ष 11 माह 27 दिन की सजा ही भुगत पाई थी। समिति ने माना कि इतनी कम सजा भुगतने के बाद रिहाई से समाज में प्रतिकूल संदेश जा सकता है।

पुलिस और डीएम ने भी नहीं दी थी रिहाई की संस्तुति

समयपूर्व रिहाई के प्रस्ताव पर एसपी हापुड़ ने अपराध के समाज पर व्यापक प्रभाव, भविष्य में अपराध से इनकार न किए जाने का हवाला देते हुए रिहाई का विरोध किया था। जिलाधिकारी हापुड़ ने भी पुलिस अधीक्षक की रिपोर्ट से सहमत होते हुए समयपूर्व रिहाई की संस्तुति नहीं की। दया याचिका समिति ने भी इन्हीं तथ्यों पर विचार करते हुए रिहाई की संस्तुति नहीं की।

अशरफी की समयपूर्व रिहाई संबंधी दया याचिका राज्यपाल द्वारा खारिज किए जाने का आदेश मिल गया है। बंदी को इसकी जानकारी दे दी गई है।
-सीताराम शर्मा, जेल अधीक्षक

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