महिलाओं के पास भ्रष्टाचार के मौके कम होते हैं, ऐसा करती हैं तो उनके साथ सख्ती ज्यादा होती है

Rohit Kumar
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नई दिल्‍ली। ट्रांसपेरेंसी इंटरनेशनल की भ्रष्‍टाचार से जुड़ी रिपोर्ट इस बात का खुलासा हुआ है कि भ्रष्‍टाचार सीमित नहीं हुआ है। भ्रष्‍टाचार पर लगाम लगाने के लिए एजेंसियों को मजबूत करने, वित्‍तीय अपराध पर नकेल कसने और सार्वजनिक खर्च को पारदर्शी बनाने की सिफारिश की है। उधर, कुछ देशों ने भ्रष्‍टाचार रोकने के लिए ज्‍यादा महिलाओं की नियुक्ति करने का तरीका अपनाया है। वर्ष 2011 में मैक्सिको के एक राज्‍य ने ट्रैफ‍िक पुलिस की एक यूनिट सिर्फ महिलाओं के लिए बना दी।

1- ऐसे में यह सवाल उठता है कि क्या पुरुषों की तुलना में महिलाएं कम भ्रष्ट हैं। स्वीडन में यूपैसला विश्वविद्यालय के एलिन बर्जनेगार्ड ने पुरुषों एवं महिलाओं के बीच भ्रष्टाचार में इस अंतर के बारे में बताया है। बर्जनेगार्ड ने बताया कि महिलाओं के पास घूस लेने या अनुचित तरीके से काम करने के मौके सीमित होते हैं, जबकि ओल्ड बायज क्लब में भ्रष्टाचार तेजी से पनपता है। आमतौर पर पुरुषों के वर्चस्व वाले समूहों में अपने जैसे लोगों पर भरोसा करने और उन्हें शामिल करने की प्रवृत्ति होती है।

2- इस अध्‍ययन में यह पाया गया कि अर्जेंटीना में पुरुषों के मुकाबले महिला जनप्रतिनिधियों के भ्रष्टाचार में शामिल दलों से जुड़ने की संभावना कम थी। इसमें आगे कहा गया है कि अर्जेंटीना में महिलाएं सियासत के बजाय एनजीओ या किसी अन्‍य संगठन में जाना ज्‍यादा पसंद करती हैं। इसकी बड़ी वजह यह है कि यदि महिलाएं भ्रष्टाचार में लिप्त हो तो उनको पुरुषों के मुकाबले अधिक कठोर सजा मिलती हैं। उन्हें इसकी कीमत ज्यादा चुकानी होती है।

3- इस रिपोर्ट में कहा गया है कि उन देशों में जहां महिला-पुरुष समानता है। वहां भ्रष्टाचार का अंतर भी मिट सकता है। सामान्य अपराध में ऐसा पहले ही हो चुका है। महिलाएं अभी भी पुरुषों की तुलना में कम अपराध करती हैं। हालांकि, पिछले 50 वर्षों में महिलाएं अधिक अपराधी बन गई हैं। यह आंशिक बढ़ोतरी ही है, क्योंकि तकनीकी और सामाजिक प्रगति ने उन्हें घर से बाहर काम करने के लिए अधिक समय दिया है। ऐसा ही कुछ भ्रष्टाचार के साथ भी हो सकता है।

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