वाहिद हत्याकांड: 13 साल बाद 12 दोषियों को उम्रकैद, अदालत ने सुनाया फैसला

Amit
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बुलंदशहर: नगर कोतवाली क्षेत्र के मोहल्ला रुकनसराय में 13 साल पहले हुए चर्चित वाहिद हत्याकांड में मंगलवार को जिला एवं सत्र न्यायाधीश मंजीत सिंह श्यौराण की अदालत ने बड़ा फैसला सुनाया। अदालत ने पूर्व सभासद वाहिद समेत सभी 12 आरोपियों को आजीवन कारावास और 50-50 हजार रुपये के अर्थदंड की सजा दी। फैसले के बाद दोषियों को न्यायिक अभिरक्षा में जेल भेज दिया गया।

क्या है मामला

24 अगस्त 2012 को रुकनसराय मोहल्ले में दो पक्षों के बीच खूनी संघर्ष हुआ था। तमंचे, रिवॉल्वर और पिस्टल से हुई अंधाधुंध फायरिंग में भगदड़ मच गई थी। इसी दौरान रईस के भतीजे और गोद लिए बेटे वाहिद (25) को गोली लगने से मौत हो गई थी। घटना से तीन दिन पहले ही युसुफ के बेटों ने रईस के रिश्तेदार आज़ाद पर जानलेवा हमला किया था, जिससे रंजिश और गहरी हो गई थी।

रईस की तहरीर पर 15 आरोपियों के खिलाफ हत्या व हत्या के प्रयास का मुकदमा दर्ज हुआ। सुनवाई के दौरान तीन आरोपियों की मौत हो गई, जबकि शेष 12 पर अदालत ने दोष सिद्ध करते हुए सजा सुनाई।

दोषी करार दिए गए 12 आरोपी

फरीद, असगर, इस्तखार, फारूख, खलील, चमन, पूर्व सभासद वाहिद, साजिद, लुकमान, हाजी शाहिद, अनवार और अशरफ।

अदालत का फैसला

19 अगस्त को सजा पर बहस के बाद अदालत ने सभी 12 दोषियों को उम्रकैद की सजा दी और प्रत्येक पर 50 हजार रुपये का जुर्माना लगाया। फैसले के दौरान अदालत परिसर में भारी सुरक्षा-व्यवस्था रही।

परिजनों का हाल

सजा सुनते ही सभी दोषियों के चेहरे मुरझा गए। बाहर खड़े उनके परिजन फूट-फूटकर रोते रहे। दूसरी ओर, मृतक वाहिद के चाचा रईस ने फैसले पर संतोष जताते हुए कहा—
“वाहिद मेरे लिए औलाद जैसा था। 13 साल तक न्याय का इंतजार किया। अब अदालत ने दोषियों को उम्रकैद देकर हमें सुकून दिया है।”

अदालत परिसर छावनी में तब्दील

कुरैशी और गद्दी बिरादरी से जुड़े इस मामले में किसी भी तरह की गड़बड़ी रोकने के लिए अदालत परिसर को छावनी में तब्दील कर दिया गया। एसपी सिटी शंकर प्रसाद, सीओ सिकंदराबाद भास्कर मिश्र समेत कई थानों का पुलिस बल मुस्तैद रहा।

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