दनकौर (ग्रेटर नोएडा)। यमुना प्राधिकरण क्षेत्र के उस्मानपुर गांव में बदहाल मूलभूत सुविधाओं से नाराज ग्रामीणों का गुस्सा बुधवार को अनोखे अंदाज में फूट पड़ा। ग्रामीणों ने गांव की कीचड़ से लबालब भरी गलियों में धान की रोपाई कर यमुना प्राधिकरण के अधिकारियों का ध्यान समस्या की ओर आकर्षित करने का प्रयास किया।
ग्रामीणों का कहना है कि करीब 15 वर्ष पहले प्राधिकरण ने गांव की भूमि का अधिग्रहण करते समय उसे हाईटेक गांव बनाने और सभी बुनियादी सुविधाएं उपलब्ध कराने का वादा किया था, लेकिन आज तक अधिकांश वादे कागजों तक ही सीमित हैं।
ग्रामीणों का पैदल निकलना तक मुश्किल
ग्रामीणों के अनुसार गांव की नालियां लंबे समय से कीचड़ और कचरे से अटी पड़ी हैं। निकासी की उचित व्यवस्था नहीं होने के कारण गंदा पानी गलियों और सड़कों पर बहता रहता है। वर्षा के बाद हालात और भी खराब हो गए हैं। जगह-जगह जलभराव होने से ग्रामीणों का पैदल निकलना तक मुश्किल हो गया है।
सबसे अधिक परेशानी स्कूली छात्र-छात्राओं, बुजुर्गों और महिलाओं को उठानी पड़ रही है। बच्चों को स्कूल जाने के लिए कीचड़ और गंदे पानी से होकर गुजरना पड़ता है, जिससे हादसे और संक्रमण का खतरा बना रहता है।
ग्रामीण आंदोलन तेज करने को मजबूर होंगे
प्रदर्शन कर रहे ग्रामीण अलाउद्दीन हकीकत और शाहरुख ने कहा कि कई बार यमुना प्राधिकरण के अधिकारियों से शिकायत की गई, लेकिन समस्या का स्थायी समाधान नहीं कराया गया। उनका आरोप है कि गांव के विकास कार्यों की लगातार अनदेखी की जा रही है। यदि जल्द ही नालियों की सफाई, जल निकासी और सड़कों की मरम्मत नहीं कराई गई तो ग्रामीण आंदोलन तेज करने को मजबूर होंगे।
ग्रामीणों का कहना है कि जिस गांव को आधुनिक सुविधाओं से लैस करने का सपना दिखाया गया था, वहां आज लोगों को मूलभूत सुविधाओं के लिए भी संघर्ष करना पड़ रहा है। धान की रोपाई के माध्यम से ग्रामीणों ने यह संदेश देने का प्रयास किया कि गांव की गलियां खेतों जैसी बन चुकी हैं।
मानसून के बाद काम शुरू होगा
ग्रामीणों ने प्राधिकरण से शीघ्र प्रभावी कार्रवाई कर गांव की बदहाल व्यवस्था को सुधारने और अधूरे विकास कार्यों को प्राथमिकता के आधार पर पूरा कराने की मांग की है। प्राधिकरण के महाप्रबंधक परियोजना राजेंद्र भाटी का कहना है कि गांवों में विकास कार्य कराए गए हैं, आगे भी कराए जाएंगे, मानसून के बाद काम शुरू होगा।

