दक्षिणी दिल्ली। श्रद्धा वाल्कर हत्याकांड मामले में साकेत कोर्ट में आरोपित आफताब अमीन पूनावाला के खिलाफ मामला चल रहा है। अंतिम संस्कार में देरी की दलील देते हुए श्रद्धा के भाई श्रीजय वाल्कर ने हाई कोर्ट में ट्रायल की समय-सीमा तय करने की मांग की थी, जिसे यह कहते हुए नकार दिया गया कि जिला अदालत में मामले की प्रतिदिन सुनवाई हो रही है।
श्रद्धा की हत्या 1535 दिन पहले 18 मई 2022 को हुई, पर आरोपित छह महीने बाद पकड़ा गया। इस बीच उनसे शव के 35 टुकड़े करके महरौली के जंगलों में ठिकाने लगाए थे। अवशेष अब केस की प्रापर्टी के तौर पर रखे गए हैं।
दो साल पहले हुआ था मां का निधन
श्रद्धा की हत्या से दो वर्ष पहले ही उनकी मां का निधन हो चुका था। फरवरी 2025 में पिता विकास वाल्कर तो इसके एक वर्ष बाद दादी के निधन के बाद परिवार के एकमात्र सदस्य श्रीजय वाल्कर ही हैं, जो अंतिम संस्कार व न्याय पाने की लड़ाई लड़ रहे हैं।
श्रीजय वाल्कर की वकील सीमा कुशवाहा के मुताबिक बचाव पक्ष मामले में जानबूझकर विलंब कर रहा है। सुनवाई में विलंब से आना या तारीख से बचने को कोशिश रहती है। इसके चलते ही हाईकोर्ट में समय-सीमा निर्धारित करने की याचिका लगाई गई थी।
वहां तर्क दिया गया कि केस पर रोजाना सुनवाई हो रही है। हमारी ओर से कुल 221 गवाह पेश किए गए थे। इनमें से 171 के बयान दर्ज होने के बाद जिरह भी पूरी हो चुकी है, जबकि शेष 50 गवाहों के बयान दर्ज करने व उन पर जिरह की प्रक्रिया चल रही है।
देरी होने पर करेंगे हाई कोर्ट का रुख
मामले में बचाव पक्ष की ओर से अब तक गवाहों की लिस्ट ही नहीं दी गई है। केस अभी ट्रायल पर एविडेंस के स्टेज पर है। अनावश्यक विलंब होने पर हम फिर हाई कोर्ट का रुख करेंगे। यह हमारा अधिकार भी है। एक युवक जिसने माता-पिता को खो दिया।
दादी का निधन हो चुका है। परिवार का अकेला सदस्य है, जिस पर अपनी बहन का अंतिम संस्कार कराने की जिम्मेदारी है। बहन को न्याय दिलाने के लिए लड़ रहा है। उसकी कोशिश है कि जितनी जल्दी हो सके, अवशेष रिलीज हो जाएं, ताकि अंतिम संस्कार कर सके।

