बैंक में गार्ड की लापरवाही बनी 27 साल के मनीष की मौत की वजह, पांच बहनों का इकलौता भाई चला गया

News Desk
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नई दिल्ली: पश्चिमी दिल्ली के आउटर ईसापुर गांव में एक बैंक शाखा के अंदर एक गार्ड की लापरवाही ने 27 वर्षीय मनीष की जान ले ली. पांच बहनों के इकलौते भाई की मौत के बाद परिवार के आंसू थमने का नाम नहीं ले रहे. मृतक मनीष के माता पिता काफी बुजुर्ग हैं और अब वे खुद को बेसहारा और असहाय महसूस कर रहे हैं. दरअसल, 28 जुलाई की सुबह मनीष घर के पास मौजूद स्थानीय बैंक में अपना आधार कार्ड अपडेट करवाने पहुंचे थे, जब वह फॉर्म भर रहे थे. इसी दौरान बैंक में तैनात गार्ड विनोद कुमार (53) अपनी बंदूक में गोलियां भर रहे थे, तभी अचानक फायर हुई जो मनीष की कमर से पार होती हुई दिल तक पहुंची और उनकी घटना स्थल पर ही मौत हो गई.

क्या है पूरा मामला?

मामला साउथ वेस्ट दिल्ली के जाफरपुर कलां स्थित यूनियन बैंक की शाखा का है. जिस युवक को गोली लगी उसका नाम मनीष कुमार था. जो एक किसान परिवार से ताल्लुक रखता था. ईसापुर गांव में रहने वाला यह युवक परिवार में सबसे छोटा था. पांच बहनें उससे बड़ी हैं. आरोपी गार्ड विनोद कुमार की उम्र 53 साल है, जो पूर्व सैनिक भी रह चुके हैं. विनोद कुमार ने पुलिस को बताया कि वह बैंक थोड़ी देरी से आए थे.

आरोपी गार्ड की बंदूक और कारतूस जब्त

पुलिस ने आरोपी गार्ड की 12 बैरल बोर की बंदूक और कारतूस को जब्त कर फरेंसिक जांच के लिए भेज दिया है. सीसीटीवी फुटेज भी सीज किया गया है. इस घटना के बाद शुक्रवार को भी बैंक के ब्रांच पर ताला लगा हुआ मिला. गैर इरादतन हत्या के मामले में गार्ड को गिरफ्तार किया गया है. वहीं परिवार और गांव वाले बैंक से मुआवजा और गार्ड के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की मांग कर रहे है. इस पूरे मामले पर ईटीवी ने ग्राउंड पर जाकर परिवार के सदस्यों से बातचीत की.

मनीष के पिता राम कुमार डागर बतातें हैं कि वही एक हमारे बुढ़ापे का सहारा था. अब यही मांग है कि बेटे की मौत को लेकर सख्त कार्रवाई की जाए. इसमें बैंक में तैनात गार्ड और बैंक मैनेजर दोनों को सजा होनी चाहिए. ताकि परिवार को न्याय मिल सके.

मेट्रो में कॉन्ट्रैक्ट टोकन ऑपरेटर का काम करता था मनीष

मनीष के रिश्तेदार सुखबीर सिंग ने बताया कि मनीष मेट्रो में कॉन्ट्रैक्ट पर टोकन ऑपरेटर का काम करते थे. कुछ महीने पहले कॉन्ट्रैक्ट खत्म होने के बाद पीएफ निकालने के लिए आधार कार्ड में बदलाव करवाना था. जिसके लिए वह अपने घर के पास में मौजूद यूनियन बैंक के ब्रांच में गए थे, जहां वो फॉर्म भर रहे थे. इस बीच सिक्योरिटी गार्ड देर से बैंक में पहुंचा था. वह बैंक के अंदर ही बंदूक में गोली भरने लगा. इसी दौरान जल्दबाजी में अचानक गोली चल गई, जो मनीष की पीठ पर लगी. तुरंत उसे अस्पताल ले जाया गया, जहां डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया.

बैंके मैनेजर के ऊपर सख्त कार्रवाई करने की मांग

सुखबीर सिंग अपनी मांगों का जिक्र करते हुए बताते हैं कि अब हमारी मांग है कि गार्ड और बैंक के मैनेजर के ऊपर सख्त कार्रवाई होनी चाहिए. क्योंकि, अगर गार्ड ड्यूटी के दौरान अपनी गन को बैंक के अंदर लोड कर रहा था, तो क्या मैनेजर ने उसे देखा नहीं या रोकने की कोशिश नहीं की? फिलहाल इन दोनों के ऊपर सख्त से सख्त और जल्दी कार्यवाही होनी चाहिए.

बैंक से अब तक कोई नहीं पहुंचा परिजनों से मिलने

हैरानी की बात यह है कि घटना को करीब 6 दिन पूरे हो चुके हैं. लेकिन यूनियन बैंक की ओर से अभी तक कोई भी अधिकारी, मैनेजर या कर्मचारी पीड़ित परिवार से मिलने नहीं पहुंचा है. नम आंखों के साथ मनीष की बहन सुमन बताती हैं कि एक गार्ड की लापरवाही ने पूरा परिवार उजड़ दिया. अब यही मांग है कि जो आरोपी हैं उनके ऊपर सख्त कार्रवाई होनी चाहिए. हम यही चाहते हैं कि ऐसा हादसा किसी और के साथ कभी ना हो.सोचने की बात यह है कि जिस गार्ड की ड्यूटी बैंक के बाहर होनी चाहिए. वह बैंक अंदर क्या कर रहा था. वहीं ड्यूटी के दौरान किसी को भी गन लोड करने की अनुमति नहीं होती है. यदि गार्डन ड्यूटी के दौरान गन लोड कर रहा था. तो क्या बैंक मैनेजर की नजर उसे पर नहीं पड़ी, यह भी सोचने की बात है.

मां-बाप को पर्याप्त मुआवजा दिया जाए

मनीष की भाभी रिंकी ने बताया कि इन पांचो बहनों का जो इकलौता भाई था वह अब इस दुनिया में नहीं रहा है. इसीलिए सरकार से मांग है कि इन सभी पांचों बहनों को पर्याप्त मुआवजा दिया जाए. वहीं बुजुर्ग हो चुके मां-बाप जो कि वर्तमान में किसी भी तरीके से कमाने की स्थिति में नहीं है उनको भी मुआवजा दिया जाए.

डीसीपी द्वारका कुशल पाल सिंह ने दी जानकारी

वहीं, डीसीपी द्वारका कुशल पाल सिंह का कहना है कि आरोपी की पहचान विनोद कुमार (53) के रूप में हुई है. वह आर्मी से रिटायर है. बेशक गोली गलती से चली हो, मगर उस युवक की क्या गलती थी जो बैंक में अपना काम कराने आया था?

बता दें कि यह पहला मामला नहीं है. इससे पहले इसी साल मई में बिहार के औरंगाबाद में इंडियन बैंक की शाखा के अंदर गार्ड की बंदूक से ही रिकवरी एजेंट की मौत हो गई थी. पिछले साल नवंबर में कैश वैन की सुरक्षा में तैनात गार्ड के हाथ से गिरकर बंदूक चल गई जो चाय की दुकान पर बैठे युवक को लगी. जालंधर, मुंबई में भी इस तरह के मामले सामने आए. दिल्ली के हालिया मामले में पुलिस ने BNS की धारा 105 के तहत मामला दर्ज किया है.

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