दक्षिणी दिल्ली। साकेत कोर्ट ने मनी लॉन्ड्रिंग मामले में रहेजा डेवलपर्स लिमिटेड के चेयरमैन नवीन एम रहेजा और मैनेजिंग डायरेक्टर नयन एन रहेजा को गिरफ्तारी से अंतरिम राहत दी है।
कोर्ट ने कहा कि गैर-जमानती वारंट का आरोपित के अधिकारों पर गंभीर असर पड़ता है और इन्हें बिना सोचे-समझे जारी नहीं किया जाना चाहिए।
अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश शीतल चौधरी प्रधान ईडी की उस अर्जी पर सुनवाई कर रही थीं, जिसमें एजेंसी द्वारा जांच किए जा रहे मामले में पिता-पुत्र की जोड़ी के खिलाफ ओपन-एंडेड गैर-जमानती वारंट जारी करने की मांग की गई थी।
आरोपितों की ओर से सीनियर एडवोकेट विकास पाहवा पेश हुए, जिनकी मदद करणजावाला एंड कंपनी एडवोकेट्स ने की।
जांच में शामिल नहीं हुए आरोपी
तीन अगस्त के आदेश में कोर्ट ने कहा कि किसी आरोपित के खिलाफ कोई भी प्रक्रिया शुरू करने का मुख्य मकसद उसकी मौजूदगी सुनिश्चित करना होता है। एजेंसी का आरोप था कि आरोपित जांच में शामिल नहीं हुए और 2022 में दर्ज ईसीआइआर (एनफोर्समेंट केस इंफॉर्मेशन रिपोर्ट) के सिलसिले में जारी समन का पालन नहीं किया।
आरोपितों की ओर से पेश पाहवा ने करणजावाला एंड कंपनी के निर्देशों पर कहा कि दोनों आरोपित समन का पालन करते हुए 2025 में चार बार ईडी के सामने व्यक्तिगत रूप से पेश हुए थे और जांच एजेंसी की ओर से मांगे गए दस्तावेज सौंपे थे।
उन्होंने तर्क दिया कि ईसीआइआर 2022 में दर्ज की गई थी, लेकिन ईडी ने लगभग चार साल बाद एनबीडब्ल्यू की मांग की, जबकि आरोपित जांच में सहयोग कर रहे थे।
बचाव पक्ष ने यह भी कहा कि आरोपित न तो फरार थे और न ही कानून की प्रक्रिया से बच रहे थे, वे बुलाए जाने पर जांच में शामिल होने को तैयार थे, और दिल्ली हाई कोर्ट में अग्रिम जमानत याचिका और रिट याचिकाओं सहित कई कार्यवाही लंबित थीं। ईडी ने अर्जी का विरोध करते हुए कहा कि हालांकि आरोपित 2025 में जांच में शामिल हुए थे, पर बाद में वे चार बार पेश नहीं हुए और अप्रैल 2026 में जारी समन का पालन नहीं किया।
ईडी ने तर्क दिया कि अग्रिम जमानत की अर्जी दाखिल करने से आरोपित को जांच में शामिल होने से बचने या सख्त कार्रवाई से बचने का अधिकार नहीं मिल जाता। कोर्ट ने कहा कि मामले में दोनों पक्षों की ओर से बहस अभी पूरी होनी बाकी है।
जांच में सहयोग करने के निर्देश दिए
साथ ही जांच एजेंसी का समन या एनबीडब्ल्यू जारी करने का मकसद सिर्फ सुचारू जांच के लिए आरोपित की मौजूदगी सुनिश्चित करना होता है। अदालत ने नवीन और नयन रहेजा दोनों को निर्देश दिया कि जब भी जांच अधिकारी बुलाएं, वे जांच में शामिल हों और सहयोग करें।
नवीन रहेजा की ज्यादा उम्र को ध्यान में रखते हुए, अदालत ने यह भी कहा कि ईडी वीडियो कान्फ्रेंसिंग के जरिए पेश होने के संबंध में बचाव पक्ष द्वारा बताए गए दिल्ली हाईकोर्ट के फैसले पर विचार कर सकती है। इसके बाद अदालत ने मामले की अगली सुनवाई के लिए तीन सितंबर की तारीख तय की।

