गाजियाबाद में उपभोक्ता को राहत, 1.90 लाख का गलत बिजली बिल रद्द; निगम पर लगा हर्जाना

News Desk
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गाजियाबाद। उपभोक्ता को गलत बिजली का बिल भेजने और शिकायत पर उसे ठीक करने की एवज में रिश्वत मांगने के मामले में जिला उपभोक्ता विवाद प्रतितोष आयोग ने उत्तर प्रदेश पावर कॉरपोरेशन लिमिटेड के चेयरमैन सहित विद्युत निगम के पांच अफसरों पर जिला उपभोक्ता विवाद प्रतितोष आयोग ने दस हजार रुपये का जुर्माना लगाया है।

विजयनगर के मवई में रहने वाले सुंदर लाल शर्मा ने परिवाद दाखिल कर बताया कि विद्युत उपकेंद्र इलेक्ट्रो स्टील राठी से उन्होंने दो किलोवाट का बिजली कनेक्शन लिया था। उन्होंने मार्च 2016 तक नियमित रूप से विद्युत बिल का भुगतान किया।

बिजली के मीटर में खराबी

आने पर 28 मई 2016 को विद्युत निगम ने नया मीटर लगाया। मीटर बदलने के बाद अगस्त माह में 81,071 रुपये का बिजली का बिल जारी किया, जो कि गलत था। शिकायत पर बिल में सुधार कर 4,213 रुपये का नया बिल जारी किया गया, जिसका भुगतान कर दिया गया।

आरोप है कि तय समय पर बिजली का बिल जमा करने के बावजूद छह जून 2017 को 1,90,471 रुपये का गलत बिजली का बिल जारी कर दिया गया। इसकी शिकायत पीड़ित ने विद्युत वितरण खंड नगरीय पंचम के अधिशासी अभियंता के कार्यालय में की तो बिल में सुधार के लिए 20 हजार रुपये की रिश्वत की मांग की गई।

रिश्वत न देने पर बिजली का बिल सही करने से मना कर दिया गया। पीड़ित ने सेवा में कमी का मामला मानते हुए इस संबंध में 13 जून 2017 को जिला उपभोक्ता विवाद प्रतितोष आयोग में उत्तर प्रदेश पावर कॉरपोरेशन लिमिटेड के चेयरमैन, विद्युत वितरण मंडल नगरीय प्रथम कविनगर के अधीक्षण अभियंता, विद्युत वितरण उपखंड नगरीय प्रथम उपकेंद्र जीटी रोड के अधिशासी अभियंता, विद्युत वितरण उपखंड नगरीय प्रथम प्रताप विहार के उपखंड अधिकारी और विद्युत उपकेंद्र इलेक्ट्रो स्टील राठी के अवर अभियंता के खिलाफ परिवाद दर्ज कराया।

आयोग के सामने उपस्थित नहीं हुए विपक्षी सदस्य

केस की सुनवाई के दौरान विपक्षी सदस्य अपना पक्ष रखने के लिए आयोग के सामने उपस्थित नहीं हुए, न ही कोई दस्तावेज प्रस्तुत किया। इस मामले में आयोग ने फैसला सुनाते हुए विद्युत निगम द्वारा जारी किया गया 1,90,471 रुपये का विद्युत बिल निरस्त कर दिया है।

विपक्षीगण को 30 दिन के अंदर संशोधित बिल जारी करने और विद्युत संयोजन को विच्छेदित न करने के आदेश दिए हैं। इसके अलावा विपक्षीगण को संयुक्त रूप से परिवादी को वाद व्यय, मानसिक एवं आर्थिक क्षति के लिए 30 दिन के अंदर 10 हजार रुपये पीड़ित को देने के आदेश जारी किए हैं।

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