मोदीनगर/मुरादनगर। साथ-साथ कांवड़ लेने निकले दो दोस्तों की यात्रा हरिद्वार में दर्दनाक हादसे का शिकार हो गई। मोदीनगर के भोजपुर क्षेत्र के गांव शकूरपुर और मुरादनगर के गांव जलालाबाद निवासी दो कांवड़ियों की शनिवार दोपहर हरिद्वार के बहादराबाद क्षेत्र में निर्माणाधीन फ्लाईओवर का भारी भरकम गर्डर गिरने से मौत हो गई। हादसे की सूचना मिलते ही दोनों गांवों में मातम छा गया। परिवारों में कोहराम मच गया। परिजन और ग्रामीण घटनास्थल के लिए रवाना हो गए।
भोजपुर के गांव शकूरपुर निवासी मटरू कश्यप का 22 वर्षीय पुत्र कृष्ण कश्यप आईटीआई करने के बाद एक बिजली वर्कशॉप में इंटर्नशिप कर रहा था। परिजनों के अनुसार कृष्ण की मुरादनगर के गांव जलालाबाद निवासी 21 वर्षीय तनुज कुमार से करीब पांच साल पुरानी दोस्ती थी। दोनों हर साल साथ में कांवड़ लेने जाते थे।
इस बार भी कृष्ण, तनुज, शकूरपुर निवासी अमन और चमन तथा पड़ोसी गांव बखरवा निवासी प्रशांत के साथ 28 जुलाई को हरिद्वार के लिए रवाना हुए थे। परिजनों ने ढोल की थाप के बीच शिवभक्तों के दल को विदा किया था। शनिवार सुबह सभी ने हर की पौड़ी से कांवड़ उठाई। दोपहर करीब दो बजे हरिद्वार से बाहर बहादराबाद के गांव बड़ेडी राजपूतान में निर्माणाधीन फ्लाईओवर के नीचे सभी आराम करने लगे।
इसी दौरान अचानक फ्लाईओवर का लोहे का भारी गर्डर नीचे गिर गया। उसकी चपेट में कई कांवड़िये आ गए। हादसे के बाद मौके पर चीख-पुकार मच गई। गंभीर रूप से घायल कृष्ण कश्यप और तनुज कुमार को अस्पताल ले जाया गया, जहां चिकित्सकों ने दोनों को मृत घोषित कर दिया।
जनवरी में गूंजनी थी शहनाई, घर में छा गया मातम
कृष्ण कश्यप की मौत ने परिवार की खुशियां छीन लीं। पिता मटरू कश्यप ने बताया कि कृष्ण का रिश्ता तय हो चुका था और जनवरी में उसकी शादी होनी थी। परिवार शादी की तैयारियों के सपने देख रहा था, लेकिन हादसे ने सब कुछ उजाड़ दिया। कृष्ण की मौत की खबर से गांव शकूरपुर में शोक की लहर दौड़ गई। जलालाबाद निवासी तनुज कुमार इंटरमीडिएट के बाद सैन्य बल में जाने की तैयारी कर रहा था। उसकी मौत की सूचना मिलते ही पिता महेश, मां सीमा और छोटे भाई सागर का रो-रोकर बुरा हाल हो गया।
दोस्ती की शुरुआत ननिहाल से हुई, साथ ही खत्म हुई जिंदगी की राह
तनुज की ननिहाल शकूरपुर के समीप गांव बखरवा में थी। ननिहाल आने-जाने के दौरान ही उसकी कृष्ण से दोस्ती हुई थी। दोनों की दोस्ती इतनी गहरी थी कि हर सुख-दुख में साथ रहते थे। कांवड़ यात्रा पर भी दोनों हमेशा साथ जाते थे। इस बार भी शिवभक्ति की यात्रा पर निकले दोनों दोस्तों की जिंदगी भी साथ खत्म हुई।

