नोएडा में ई-साइकिल परियोजना पर उठे सवाल, 62 डॉक स्टेशनों से अवैध विज्ञापन वसूली का आरोप

News Desk
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नोएडा। प्राधिकरण में ई-साइकिल परियोजना के माध्यम से अवैध विज्ञापन उगाही का एक गंभीर मामला सामने आया है। मामले में एक ब्लैकलिस्टेड कंपनी द्वारा 62 डॉक स्टेशनों के सामने अवैध यूनीपोल के माध्यम से विज्ञापन कराया जा रहा है।

इससे प्रतिमाह 15 करोड़ रुपये की अवैध वसूली और घोटाले के आरोप लगे हैं, साथ ही वाह्य विज्ञापन विभाग व कंपनी अधिकारियों की संलिप्तता भी उजागर हुई है। परियोजना पर वर्ष 2018 से कार्य जारी था।

वर्ष 2021 में 1860 वर्ग मीटर में 62 डॉक स्टेशनों का निर्माण हुआ। करीब 50 करोड़ की जमीन कंपनी को निश्शुल्क में देना बड़ा सवाल है। मामले में प्राधिकरण अधिकारियों का दावा है कि जिस कंपनी को डॉक स्टेशनों पर ई-साइकिल संचालन व विज्ञापन का अधिकार दिया गया था, उसका अनुबंध अगस्त 2025 में समाप्त कर दिया गया है।

यह स्थिति तब बनी जब प्राधिकरण के सीईओ कृष्णा करुणेश ने पदभार ग्रहण करने के बाद जनस्वास्थ्य विभाग व नोएडा ट्रैफिक सेल (एनटीसी) को जनवरी में समाप्त कर दिया था। फिर भी ई-साइकिल परियोजना के तहत अवैध विज्ञापन की वसूली रोकने को कोई कदम नहीं उठा है।

जबकि इस घोटाले से संबंधित शासन स्तर पर लगातार शिकायत की जा रही है। इस पर तत्कालीन अपर मुख्य कार्यपालक अधिकारी सतीश पाल कई बार शासन को आख्या प्रस्तुत कर चुके है, लेकिन इस बार इस प्रकरण की शिकायतकर्ताओं ने शासन स्तर अधिकारी व कंपनी की साठगांठ के जरिये प्रति माह 15 करोड़ रुपये की उगाही का आरोप लगाया है, जिसके आधार पर जांच शुरू हुई है।

62 डॉक स्टेशनों को कंपनी से वापस नहीं लिया

बता दें कि प्राधिकरण अधिकारियों ने कंपनी से उन 62 डॉक स्टेशनों को वापस नहीं लिया, जिनसे विज्ञापन का अधिकार दिया गया था। इसके विपरीत कंपनी को एक वर्ष से संरक्षण दिया जा रहा है।

मामले में शासन स्तर पर जांच के आदेश भी दिए गए थे। इसमें ई-साइकिल परियोजना का अनुबंध समाप्त करने व कंपनी को ब्लैक लिस्ट करने का उल्लेख है, पर घोटाले के उजागर होने के बाद शासन को गुमराह करने का मामला भी सामने आया है।

50 करोड़ की जमीन कंपनी को निश्शुल्क दी

प्राधिकरण अधिकारियों के अनुसार, एनटीसी ने 30 सितंबर 2022 को टर्बन मोबिलिटी कंपनी संग अनुबंध किया था। इसके तहत 2021 में दो करोड़ की लागत से तैयार 62 डॉक स्टेशनों का मालिकाना हक कंपनी को निश्शुल्क दिया गया।

यह भूमि वर्तमान में 50 करोड़ की आंकी जा रही है। वहीं, कंपनी को इन डॉक स्टेशनों पर 50 वर्ग फीट विज्ञापन लगाने का अधिकार भी दिया गया था, जिससे घोटाले की नींव रखी गई।

620 ई-साइकिल रखने का था लक्ष्य

अनुबंध के अनुसार, 62 डॉक स्टेशनों पर 620 ई-साइकिल रखी जानी थीं व प्रतिदिन एक साइकिल के माध्यम से 15 चक्कर लगाने का लक्ष्य था, जिससे 1125 टन कार्बन उत्सर्जन कम होना था।

वहीं, कंपनी ने परियोजना की मूल भावना को पूरा नहीं किया। इसके बजाय कंपनी के अधिकारियों ने प्राधिकरण अधिकारियों के साथ साठगांठ कर विज्ञापन नियमों में बदलाव करवा लिया।

अनुबंध बरकरार रहने की शर्त स्पष्ट नहीं

कंपनी का अनुबंध उस दिन समाप्त होना चाहिए था, जब इसे दूसरी कंपनी को बेचा गया। अनुबंध की शर्तों में यह स्पष्ट नहीं किया गया था कि कंपनी बिकने के बाद अनुबंध बरकरार रहेगा। इस संबंध में प्राधिकरण या एनटीसी को कोई सूचना नहीं दी गई।

डाॅक स्टेशन को कब्जे में लेने व अवैध रूप से संचालित यूनीपोल के विज्ञापन को बंद कराने का आदेश संबंधित अधिकारी को दिया गया है। कुछ जगह बंद कराने की सूचना से अवगत भी कराया गया है।

– एसपी सिंह, महाप्रबंधक (सिविल), नोएडा प्राधिकरण

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