नोएडा लीजबैक घोटाला: ₹3,800 करोड़ के फर्जीवाड़े में पूर्व सचिव हरीश चंद्र बर्खास्त, रिकवरी के भी आदेश

News Desk
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नोएडा। प्राधिकरण में लीजबैक के नाम पर हुए घोटाले के मामले में 1997 बैच के पीसीएस अधिकारी हरिश्चंद्र को अनियमितता का दोषी पाए जाने के बाद 2021 में सेवा से पदच्युत कर दिया गया था। उन्हें नोएडा प्राधिकरण के सचिव के पद पर रहते हुए नियमों का उल्लंघन करने के आरोप में भूमि की लीजबैक करने का दोषी पाया गया।

कार्रवाई का आधार प्राधिकरण की तत्कालीन सीईओ रितु महेश्वरी की रिपोर्ट रही। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने मामले में दोषी पाए जाने के बाद न केवल उन्हें पदच्युत किया, बल्कि वित्तीय क्षति की वसूली के आदेश भी दिए थे।

घोटाला लगभग 3,800 करोड़ रुपये का

प्राधिकरण ने 2011 में शहदरा गांव के गैर निवासियों और निजी कंपनियों को 175 वर्गमीटर से लेकर 15,340 वर्गमीटर तक के भूखंडों की लीजबैक की थी। मामले में प्राधिकरण के नायब तहसीलदार मनोज कुमार को तत्काल कार्यमुक्त कर दिया गया था। तत्कालीन प्राधिकरण सचिव हरीश चंद्र और विशेष कार्याधिकारी (लैंड) अजय श्रीवास्तव को निलंबित कर विभागीय कार्रवाई की संस्तुति की थी। सूत्रों के अनुसार यह घोटाला लगभग 3,800 करोड़ रुपये का था, जिसकी जांच रिपोर्ट रितु महेश्वरी ने शासन को भेजी थी।

कैसे किया गया इतना बड़ा स्कैम?

जांच में यह सामने आया कि 3 लाख 81 हजार वर्गमीटर से अधिक भूमि को नियमों को दरकिनार करते हुए बाहरी लोगों और तीन निजी कंपनियों के नाम कर दिया गया। बाहरी लोगों को लीजबैक का प्रविधान नहीं था।

अधिकतम 450 वर्ग मीटर भूमि एक परिवार के नाम पर दी जा सकती थी। इसके बावजूद बाहरी लोगों के साथ मिलकर तीन निजी कंपनियों को एकमुश्त लीज दी गई। भूमि की बाजार मूल्य 3,800 करोड़ रुपये उस समय आंकी गई थी।

डीएम व एसएसपी पर भी पक्षपात का आरोप

इस घोटाले की जांच और कार्रवाई से यह स्पष्ट होता है कि सरकारी संस्थानों में पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करने के लिए कठोर कदम उठाए जा रहे हैं। यह कार्रवाई उन सभी के लिए एक चेतावनी है जो सरकारी पदों का दुरुपयोग करने का प्रयास करते हैं।

इससे पहले अगस्त 2018 में हरीश चंद्र का नाम रिटायर्ड कर्नल वीरेंद्र सिंह चौहान के साथ हुए विवाद में भी आया था, जिसके बाद उन्हें निलंबित कर दिया गया था।

यूपी पीसीएस एसोसिएशन ने इस विवाद की निष्पक्ष न्यायिक जांच की मांग की थी और गौतमबुद्धनगर के डीएम व एसएसपी पर पक्षपातपूर्ण कार्रवाई का आरोप लगाया था।

लीज बैक के नाम पर इन नियमों का हुआ था उल्लंघन

  • गांव के किसानों के नाम होती है लीजबैक।
  • मूल किसानों को एक परिवार के नाम पर अधिकतम 450 वर्ग मीटर जमीन दी जाती है।
  • नियमों का उल्लंघन कर तीन लाख 81 हजार 527 वर्ग मीटर जमीन की कर दी गई लीज बैक।
  • शहदरा के पास एक्सप्रेस-वे सटे सेक्टर 140 ए, 141, 142 व 143 की जमीन की हुई लीज बैक।
  • 45 से 75 मीटर चौड़े रोड पर दी गई जमीन।
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