दक्षिणी दिल्ली। साकेत कोर्ट ने एक अंतरराज्यीय बाल तस्करी रैकेट का हिस्सा होने के आरोपित को जमानत देने से इनकार कर दिया। कोर्ट ने कहा कि शिशुओं की तस्करी एक जघन्य अभिशाप है जो सभ्य समाज की नैतिक अंतरात्मा पर हमला करती है।
अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश हरगुरवरिंदर सिंह जग्गी राज कुमार की ओर से दायर जमानत याचिका पर सुनवाई कर रहे थे, जो एक अविवाहित दुष्कर्म पीड़िता से पैदा हुई नवजात बच्ची की तस्करी के संबंध में दर्ज एक मामले में आरोपित था।
बच्चों की तस्करी एक घिनौना अभिशाप
तीन अगस्त के एक आर्डर में कोर्ट ने कहा कि बच्चों की तस्करी एक घिनौना अभिशाप है और सभ्य समाज की नैतिक सोच पर हमला है। इस कोर्ट को बच्चों की ट्रैफिकिंग और बच्चों के कमोडिटी बनने के खतरे के बारे में अपनी गहरी चिंता दर्ज करनी चाहिए।
बच्चे हमारे समाज के सबसे कमजोर और कीमती सदस्य हैं और उनकी जिंदगी, आजादी और इज्जत को व्यवसायिक बाजार के हवाले नहीं किया जा सकता।
अभियोजन पक्ष के मुताबिक यह मामला तब सामने आया जब महिलाओं और बच्चों के लिए स्पेशल पुलिस यूनिट को नवंबर 2023 में सफदरजंग अस्पताल में एक 18 साल की दुष्कर्म पीड़िता से पैदा हुई बच्ची को गैर-कानूनी तरीके से गोद लेने और उसकी तस्करी के बारे में जानकारी मिली।
आरोप है कि अस्पताल के एक हाउसकीपिंग असिस्टेंट ने पीड़ित परिवार को पैसे के बदले बच्ची देने के लिए मनाया, जिसके बाद यूपीआइ के जरिए पीड़िता के चाचा को 50,000 रुपये ट्रांसफर किए गए।
जांच में आरोप लगाया गया कि बच्ची राज कुमार और उसकी पत्नी सुनीता उर्फ सोनिया तक पहुंचने से पहले कई आरोपितों के हाथों से गुजरी। यह भी आरोप है कि उन्होंने बच्ची को एक दिन अपने पास रखा और फिर 1.65 लाख रुपये में किसी दूसरे आरोपित को बेच दिया।
इसके बाद बच्ची को कथित तौर पर 1.75 लाख रुपये में आगे बेच दिया गया। पुलिस ने यह भी दावा किया कि इस वर्ष फरवरी में मुंबई से तस्करी की शिकार दो और बच्चियों को बचाया गया था, जबकि एक बच्ची की बीमारी के कारण मौत हो गई थी।
हालांकि, शिकायतकर्ता की नवजात बेटी का अभी तक पता नहीं चल पाया है। कोर्ट ने बताया कि तीन सह-आरोपियों को भगोड़ा घोषित किया गया है।
बचाव पक्ष ने दलील दी कि राज कुमार को सिर्फ़ इसलिए झूठे मामले में फंसाया गया क्योंकि वह एक सह-आरोपित का पति था, उससे कुछ भी बरामद नहीं हुआ था और चार्जशीट पहले ही दाखिल की जा चुकी थी। उन्होंने यह भी कहा कि वह स्वयं कोर्ट के सामने पेश हुआ था और भागा हुआ नहीं था।
जांच प्रभावित होने की आशंका से जमानत याचिका खारिज
याचिका का विरोध करते हुए अभियोजन पक्ष ने तर्क दिया कि राज कुमार नवजात बच्ची की तस्करी में सक्रिय साजिशकर्ता था और उसकी पत्नी एक आदतन अपराधी थी जो ऐसे ही चार मामलों में शामिल थी।
ऐसे में उसकी रिहाई चल रही जांच को खतरे में डाल सकती है, खासकर जब लापता बच्ची अभी तक बरामद नहीं हुई है।
याचिका को खारिज करते हुए कोर्ट ने कहा कि शिकायतकर्ता का बच्चा गायब है, तीन आरोपित फरार हैं और आवेदक की पत्नी पहले भी ऐसे ही अपराधों में शामिल रही है, ऐसे में इस स्टेज पर बेल देने से जांच पटरी से उतर सकती है, डराया-धमकाया जा सकता है।

