
नोएडा। औद्योगिक निवेश और कारोबार को बढ़ावा देने के उद्देश्य से नोएडा प्राधिकरण ने औद्योगिक भूखंडों के ट्रांसफर चार्ज में तीन प्रतिशत अंक की कटौती की है। अब कार्यशील औद्योगिक इकाई के अंतरण पर 10 प्रतिशत के बजाय सात प्रतिशत शुल्क देना होगा।
प्राधिकरण बोर्ड ने यूनिफाइड रेगुलेशंस-2025 के प्रावधानों में संशोधन को मंजूरी दी है। इससे इकाइयों के दूसरे निवेशक को हस्तांतरण, कारोबार के पुनर्गठन और नए निवेशक के प्रवेश की लागत कम होगी।
बता दें कि बुधवार को सेक्टर-96 स्थित नोएडा प्राधिकरण मुख्य प्रशासनिक भवन में अवस्थापना एवं औद्योगिक विकास आयुक्त दीपक कुमार की अध्यक्षता में प्राधिकरण की 224 वीं बोर्ड बैठक आयोजित हुई। इसमें प्राधिकरण सीईओ ने 20 मुद्दों को चर्चा के लिए रखा, जिसमें 11 अनुमोदित किया गया।
नोएडा प्राधिकरण सीईओ के साथ बैठक
इस दौरान नोएडा प्राधिकरण सीईओ कृष्णा करुणेश के साथ यमुना प्राधिकरण सीईओ राकेश कुमार सिंह, ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण सीईओ रवि कुमार एनजी उपस्थित रहे।
उद्यमियों की ओर से नोएडा एंटरप्रिनियोर्स एसोसिएशन (एनईए) के विपिन कुमार मल्हन ने ट्रांसफर चार्ज, निर्माण की समयसीमा, समयवृद्धि शुल्क और कंपनी की अंशधारिता में बदलाव से जुड़ी प्रक्रियाओं में व्यावहारिक कठिनाइयों का मुद्दा उठाया था।
इसके बाद 5 सितंबर 2026 को हुई प्राधिकरण की 223वीं बोर्ड बैठक में मामले की समीक्षा के लिए नोएडा, ग्रेटर नोएडा और यमुना एक्सप्रेसवे प्राधिकरण के अधिकारियों की संयुक्त समिति बनाई गई। समिति ने 23 अक्टूबर को हुई बैठक में विभिन्न प्रावधानों में बदलाव की संस्तुति की, जिसे बोर्ड ने मंजूरी दे दी।
यूनिफाइड रेगुलेशंस-2025 में ट्रांसफर चार्ज
यूनिफाइड रेगुलेशंस-2025 में कार्यशील औद्योगिक इकाइयों का ट्रांसफर चार्ज पहले की चार प्रतिशत दर से बढ़ाकर 10 प्रतिशत किया गया था। अब इसे सात प्रतिशत करने से मौजूदा दर में तीन प्रतिशत अंक की कमी होगी। हालांकि, यह पुरानी दर से तीन प्रतिशत अंक अधिक रहेगा। शुल्क की गणना और बकाया भुगतान की अन्य शर्तें मौजूदा नीति के अनुसार लागू रहेंगी।
प्राधिकरण सीईओ कृष्णा करुणेश ने बताया कि निर्माण पूरा करने और उत्पादन शुरू करने के लिए समयवृद्धि के नियमों में भी राहत दी गई है। 20 हजार वर्गमीटर तक के भूखंडों के लिए तीन साल और इससे बड़े भूखंडों के लिए पांच साल की मूल अवधि पहले की तरह रहेगी।
इसके बाद अधिकतम तीन साल तक समयवृद्धि मिल सकेगी, जिसमें हर बार अधिकतम एक साल की अनुमति होगी। पहले अतिरिक्त वर्ष के लिए भूखंड क्षेत्रफल पर तीन प्रतिशत, दूसरे वर्ष के लिए पांच प्रतिशत और तीसरे वर्ष के लिए सात प्रतिशत शुल्क देना होगा।
500 रुपये प्रतिदिन से घटाकर 300 रुपये की मंजूरी
आंशिक वर्ष की देरी पर वास्तविक विलंब अवधि के अनुपात में शुल्क लिया जाएगा। अंशधारिता में बदलाव की सूचना तय समय में न देने पर लगने वाला विलंब शुल्क 500 रुपये प्रतिदिन से घटाकर 300 रुपये प्रतिदिन करने की मंजूरी दी गई है। प्राइवेट लिमिटेड कंपनी के एलएलपी में बदलने की प्रक्रिया भी आसान होगी।
सभी शेयरधारक यदि उसी अनुपात में एलएलपी के भागीदार बनें और स्वामित्व व नियंत्रण में बदलाव न हो, तो घोषणा विलेख के आधार पर प्राधिकरण के अभिलेखों में संस्था का स्वरूप बदला जा सकेगा। सास-ससुर से पुत्रवधू को शेयर हस्तांतरण को शुल्क छूट के लिए निर्धारित पारिवारिक संबंधों में शामिल किया जाएगा।
पुत्र, पुत्री, माता-पिता, पति-पत्नी, सगे भाई-बहन, दामाद, पौत्र-पौत्री और अधिसूचना में निर्धारित अन्य संबंध भी इसके दायरे में होंगे। संशोधन बोर्ड की मंजूरी के बाद जारी कार्यालय आदेश की तारीख से प्रभावी होंगे और लंबित तथा नए आवेदनों पर लागू होंगे। पहले दी गई अनुमतियों के तहत जमा शुल्क लौटाया या समायोजित नहीं किया जाएगा।
