राष्ट्रीय शिक्षा नीति के तहत स्कूलों में होने जा रहा बड़ा बदलाव, शिक्षा निदेशालय ने जारी किए नए नियम

Amit
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NEP 2020 Changes in School Admission: राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के तहत स्कूली शिक्षा में बड़ा बदलाव किया गया है। अब शैक्षणिक सत्र 2026-27 से पहली कक्षा में केवल छह वर्ष या उससे अधिक उम्र के बच्चों को ही दाखिला मिलेगा। शिक्षा निदेशालय ने इस संबंध में सभी सरकारी और निजी स्कूलों को सर्कुलर जारी कर दिशा-निर्देश भेज दिए हैं।

फाउंडेशनल स्टेज की संरचना में होगा बदलाव

नई नीति के तहत अब फाउंडेशनल स्टेज की संरचना में बदलाव किया गया है। पहले इस चरण में केवल नर्सरी और केजी (दो कक्षाएँ) शामिल थीं, लेकिन अब इसमें तीन कक्षाएँ — बालवाटिका 1, बालवाटिका 2 और बालवाटिका 3 जोड़ी जाएँगी। इस बदलाव के बाद पहली कक्षा में दाखिले की न्यूनतम उम्र छह वर्ष तय की गई है।

नर्सरी से पहली कक्षा की उम्र में होगा बदलाव 

निदेशालय के अनुसार, नर्सरी (बालवाटिका 1) में दाखिला के लिए उम्र 3 से 4 वर्ष, लोअर केजी (बालवाटिका 2) के लिए उम्र 4 से 5 वर्ष,अपर केजी (बालवाटिका 3) के लिए उम्र  5 से 6 वर्ष और पहली कक्षा के लिए उम्र 6 से 7 वर्ष होना सुनिश्चित किया गया हैं।

पूर्व छात्रों पर नहीं होंगे नए नियम लागू

शिक्षा विभाग ने स्पष्ट किया है कि वर्तमान सत्र (2025-26) में पहले से नर्सरी से पहली कक्षा तक पढ़ रहे छात्रों पर यह नए नियम लागू नहीं होंगे। वहीं, स्कूलों को उम्र सीमा में एक महीने तक की छूट देने का अधिकार भी दिया गया है। यदि कोई छात्र किसी मान्यता प्राप्त स्कूल से वैध प्रमाणपत्र के साथ अगली कक्षा में प्रवेश ले रहा है, तो उसे उम्र संबंधी मानदंडों में रियायत दी जा सकेगी। निदेशालय ने सभी स्कूल प्रमुखों को अभिभावकों को इस बदलाव की जानकारी देने के निर्देश जारी किए हैं।

शैक्षणिक विकास के लिए बेहतर कदम

एक्शन कमेटी ऑफ अनएडेड रिकॉग्नाइज्ड प्राइवेट स्कूल्स के अध्यक्ष भरत अरोड़ा ने इस निर्णय का स्वागत करते हुए कहा कि , “पहली कक्षा के लिए छह वर्ष की उम्र का प्रावधान बच्चों के मानसिक और शैक्षणिक विकास के लिए बेहतर कदम है। यह बदलाव राष्ट्रीय शिक्षा नीति के अनुरूप है और बच्चों को मजबूत प्रारंभिक आधार प्रदान करेगा।”

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