गाजियाबाद की हाईराइज सोसायटियों में बिजली लोड बढ़वाना महंगा, 25 हजार रुपये प्रति किलोवाट तक वसूली का आरोप

News Desk
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गाजियाबाद। हाईराइज सोसायटियों में फ्लैट का बिजली लोड बढ़वाना मनमानी रकम वसूली का जरिया बन गया है। यह हम नहीं फ्लैटों में रहे मालिकों का दावा है। उपभोक्ताओं का कहना है कि निर्धारित सरकारी शुल्क से कई गुना अधिक राशि उनसे मांगी जा रही है।

कुछ सोसायटियों में प्रति किलोवाट 25 हजार रुपये तक वसूले जाने की शिकायत सामने आई है। इससे फ्लैट खरीदारों में नाराजगी है। विद्युत निगम की शुल्क व्यवस्था के अनुसार तीन से चार किलोवाट तक लोड बढ़वाने के लिए प्रोसेसिंग फीस 300 रुपये और पांच से 24 किलोवाट तक 500 रुपये निर्धारित है। इसके अलावा नियमानुसार सुरक्षा धनराशि और अन्य स्वीकृत शुल्क देय होते हैं।

सरकारी शुल्क और बिल्डर की मांग में जमीन आसमान का अंतर

उपभोक्ताओं के अनुसार इन सभी मदों को जोड़ने के बाद भी सरकारी प्रक्रिया में लगने वाली राशि हजारों रुपये के आसपास रहती है, जबकि सोसायटियों में लोड बढ़ाने के नाम पर कई गुना अधिक रकम मांगी जा रही है। फ्लैट में अतिरिक्त विद्युत उपकरण लगाने या परिवार की जरूरत बढ़ने पर उपभोक्ता को लोड बढ़वाना पड़ता है।

सोसायटियों में यही प्रक्रिया बिल्डर या एओए के माध्यम से कराए जाने की बात कही जाती है। आरोप है कि इसी व्यवस्था का फायदा उठाकर कुछ बिल्डर प्रति किलोवाट के हिसाब से अलग शुल्क तय कर रहे हैं। उपभोक्ताओं को यह स्पष्ट नहीं किया जाता कि उनके द्वारा जमा की गई रकम में विद्युत निगम का शुल्क कितना है और सोसायटी या बिल्डर का शुल्क कितना।

कॉमन एरिया के नाम पर भी स्थिति स्पष्ट नहीं

हाईराइज सोसायटियों में फ्लैट के व्यक्तिगत कनेक्शन के अलावा कामन एरिया की बिजली व्यवस्था भी होती है। लिफ्ट, पार्किंग, पंप, सुरक्षा व्यवस्था और अन्य साझा सुविधाओं के लिए बिजली की जरूरत अलग होती है। उपभोक्ताओं का आरोप है कि व्यक्तिगत लोड वृद्धि, कामन एरिया की व्यवस्था और अन्य विद्युत कार्यों के शुल्क को लेकर कई जगह स्पष्ट जानकारी नहीं दी जाती। इससे बिल्डर और निवासी के बीच विवाद की स्थिति बनती है।

रसीद और निगम में जमा राशि का मांगा ब्योरा

फ्लैट खरीदारों की मांग है कि यदि बिल्डर प्रबंधन विद्युत लोड बढ़ाने के नाम पर कोई राशि लेता है तो उसकी मदवार रसीद दी जाए। साथ ही विद्युत निगम में जमा की गई वास्तविक राशि का विवरण भी उपभोक्ता को उपलब्ध कराया जाए। इससे यह स्पष्ट हो सकेगा कि निगम को कितना शुल्क दिया गया और अतिरिक्त राशि किस कार्य के लिए ली गई।

बिल्डर ने सोसायटी के लिए जितना विद्युत लोड स्वीकृत कराया है, उसे सोसायटी के भीतर किस प्रकार वितरित किया जा रहा है, इससे विद्युत निगम का कोई लेना-देना नहीं है। एक बार लोड स्वीकृत होने के बाद सोसायटी के भीतर निवासियों को कितना लोड दिया जाना है, यह बिल्डर अपने स्तर पर तय करता है।

– अनिल कुमार सिंह, अधीक्षण अभियंता, विद्युत निगम

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