नई दिल्ली- दिल्ली में आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग के लोगों के लिए मुफ्त स्वास्थ्य सुविधाओं का दायरा अब और व्यापक हो गया है। दिल्ली उच्च न्यायालय ने अस्पतालों में निःशुल्क इलाज के लिए EWS श्रेणी की वार्षिक आय सीमा को बढ़ाकर पांच लाख रुपये करने के दिल्ली सरकार के निर्णय को स्वीकृति दे दी है। इस फैसले से बड़ी संख्या में ऐसे परिवारों को लाभ मिलेगा, जो अब तक आय सीमा के कारण इस सुविधा से वंचित रह जाते थे।
न्यायमूर्ति प्रतिभा एम. सिंह और न्यायमूर्ति मनमीत पी.एस. अरोड़ा की खंडपीठ ने सुनवाई के दौरान स्पष्ट किया कि संशोधित आय मानदंड दिल्ली के सभी सरकारी अस्पतालों के साथ-साथ उन निजी अस्पतालों पर भी लागू होगा, जिन्हें रियायती दरों पर सरकारी जमीन आवंटित की गई है। अदालत ने यह आदेश आठ जनवरी को पारित किया।
सुनवाई के दौरान दिल्ली सरकार ने अदालत को अवगत कराया कि सक्षम प्राधिकारी ने EWS के लिए आय सीमा को पहले की 2.20 लाख रुपये वार्षिक से बढ़ाकर पांच लाख रुपये करने की औपचारिक मंजूरी दे दी है। अदालत ने कहा कि जो भी व्यक्ति निर्धारित शर्तों को पूरा करता है, वह अब इस नई सीमा के तहत मुफ्त उपचार का लाभ लेने का पात्र होगा।
अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि यह व्यवस्था उन सभी अस्पतालों पर समान रूप से लागू होगी, जहां EWS मरीजों के लिए उपचार की बाध्यता तय की गई है। सरकार को निर्देश दिए गए हैं कि इस बदलाव की जानकारी व्यापक स्तर पर प्रचारित की जाए, ताकि जरूरतमंद लोग समय रहते इसका लाभ उठा सकें।
गौरतलब है कि दो जनवरी को स्वास्थ्य सेवा महानिदेशालय ने एक आदेश जारी कर EWS आय मानक को बढ़ाने की प्रक्रिया पूरी की थी, जो अदालत के पूर्व निर्देशों के अनुपालन में किया गया कदम था। इस फैसले को स्वास्थ्य सेवाओं तक आम लोगों की पहुंच मजबूत करने की दिशा में एक अहम पहल माना जा रहा है।
यह मामला वर्ष 2017 में दिल्ली के सरकारी अस्पतालों में स्वास्थ्य सेवाओं की स्थिति को लेकर स्वतः संज्ञान के रूप में शुरू हुआ था। उस दौरान अदालत ने इलाज व्यवस्था में कमी, डॉक्टरों के खाली पद और बुनियादी ढांचे से जुड़ी समस्याओं को गंभीरता से लेते हुए सुधार के निर्देश दिए थे। इस प्रकरण में वरिष्ठ अधिवक्ता अशोक अग्रवाल को न्यायालय मित्र (एमिकस क्यूरी) नियुक्त किया गया था।
